सरकारी अस्पताल हमीदिया और जेपी में…इलाज से पहले पार्किंग की लड़ाई: वसूली और विवाद

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सरकारी अस्पताल हमीदिया और जेपी में…इलाज से पहले पार्किंग की लड़ाई: वसूली और विवाद

टेंडर अटका, मनमानी चरम पर; मरीज-परिजन हर दिन झेल रहे परेशानी

भोपाल: राजधानी भोपाल के सरकारी अस्पताल हमीदिया और जेपी में इलाज से पहले पार्किंग की लड़ाई की खबरें आए दिन आती रहती है।

यह लड़ाई अनावश्यक वसूली से शुरू होकर बड़े विवाद में बदल जाती है। दरअसल इन दोनों चिकित्सालय में पार्किंग को लेकर टेंडर अटके हुए हैं। यही वजह है कि मनमानी चरम पर है और मरीज-परिजन हर दिन परेशानी झेल रहे है।

जानिए 2 उदाहरण

केस एक : शिवाजी नगर के रोशन सिंह जेपी अस्पताल पहुंचे और गाड़ी खड़ी की तो वहां कर्मचारी ने 10 रुपए मांगे। इस पर मरीज ने पार्किंग पर्ची मांगी तो कर्मचारी ने मना कर दिया। ऐसे में मरीज ने पैसे देने से इंकार कर दिया। इस बात पर दोनों में जमकर बहस हो गई।

केस दो : हाउसिंग बोर्ड निवासी फैलान खान हमीदिया अस्पताल गए तो पार्किंग में दो घंटे की पार्किंग के लिए 30 ले लिए। फैजान ने बताया कि वह अभी लौट आएगा, लेकिन कर्मचारी नहीं माना और कहा कि 30 रुपए ही देने होंगे। विरोध करने पर कर्मचारियों से तीखी नोकझोंक हो गई।

शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में मरीज को इलाज से पहले पार्किंग की जंग लड़नी पड़ रही है। जयप्रकाश अस्पताल और हमीदिया अस्पताल में पार्किंग व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतरी हुई है। कहीं टेंडर लंबित होने से अव्यवस्था है, तो कहीं तय दरों के बावजूद खुलेआम ज्यादा वसूली की जा रही है। इसका खामियाजा मरीजों और उनके परिजनों को भुगतना पड़ रहा है।

जेपी अस्पताल में लंबे समय से पार्किंग का टेंडर नहीं हो पाया है। नतीजतन, यहां पार्किंग कर्मचारियों की मनमानी चल रही है। अस्पताल परिसर में गाड़ियां बेतरतीब खड़ी रहती हैं, जिससे न केवल यातायात बाधित होता है, बल्कि एंबुलेंस तक को रास्ता बनाने में मशक्कत करनी पड़ती है। वहीं हमीदिया अस्पताल में मामला अलग है। यहां पार्किंग शुल्क को लेकर शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। यहां पार्किंग दर 10 रुपए तीन घंटे और छह घंटे के 30 रूपए तय किए गए हैं, लेकिन कर्मचारी सीधे 30 वसूल रहे हैं। इससे मरीजों के परिजनों के साथ आए दिन बहस और विवाद की स्थिति बन रही है।

कलेक्टर भी जता चुके हैं नाराजगी

जेपी अस्पताल की पार्किंग को लेकर बीते दिनों तत्कालीन कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह भी नाराजगी जता चुके हैं। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को सख्त लहजे में जल्द ही टेंडर करने के निर्देश दिए थे। मरीज पहले से ही शारीरिक और मानसिक परेशानी में होते हैं, लेकिन पार्किंग की अव्यवस्था उनकी मुश्किलें और बढ़ा देती है। कई बार विवाद इतना बढ़ जाता है कि मारपीट की नौबत आ जाती है। कर्मचारियों का व्यवहार और मनमानी वसूली लोगों में आक्रोश पैदा कर रही है।

पहले भी उठते रहे हैं सवाल, सुधार नहीं

दोनों अस्पतालों में पार्किंग को लेकर विवाद कोई नया मामला नहीं है। जेपी अस्पताल में पार्किंग में मरीज ही नहीं डॉक्टर और स्टाफ के साथ भी विवाद हो चुके हैं। बीते साल गाड़ी खड़ी करने की बात पर अस्पताल के एक डॉक्टर और पार्किंग कर्मचारी में मारपीट हो गई थी। वहीं हमीदिया अस्पताल में भी पार्किंग शुल्क को लेकर बहस इतनी बढ़ गई थी कि कर्मचारी ने परिजन को सिर में डंडा मार दिया था।