Badwani News: रियासत के महाराजा की कुलदेवी मां कालिका के पूर्ण स्वरूप में आनंदमई मूर्ति, जो स्वयं भू होकर स्थापित हुई है

नवरात्रि पर इस मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है

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Badwani News: रियासत के महाराजा की कुलदेवी मां कालिका के पूर्ण स्वरूप में आनंदमई मूर्ति, जो स्वयं भू होकर स्थापित हुई है

Badwani News: रियासत के महाराजा की कुलदेवी मां कालिका के पूर्ण स्वरूप में आनंदमई मूर्ति, जो स्वयं भू होकर स्थापित हुई है

 

बड़वानी से सचिन राठौर की रिपोर्ट

बड़वानी: जिला मुख्यालय पर इन दिनों मां आदि शक्ति की भक्ति के लिए शहर के मंदिर में सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ देखा जा सकता है। बड़वानी जिले के रियासत के महाराजा की कुलदेवी माँ कालिका माता स्वयं भू होकर स्थापित है।

स्टेट कालीन समय में बड़वानी रियासत के महाराजा को मां कालिका ने स्वप्न में दर्शन दिए और जिस जगह मंदिर है उस स्थान पर खुदाई करके बाहर निकालने की मंशा जाहिर की। तब महाराजा ने नियत स्थान पर खुदाई की जिसकी खुदाई में एक पाषाण मूर्ति मिली और उसके साथ ही पानी भी निकल आया जिसे महाराजा ने कुँए का स्वरूप दे दिया तब से लेकर अभी तक भीषण गर्मी के दिनों में भी कुआँ सूखता नहीं है।

बड़वानी महाराज के निजी सचिव शिवपाल सिंह सिसोदिया ने बताया कि माता जी की मूर्ति को जमीन से निकालने के बाद एक पीपल के पेड़ के पास एक छोटा सा मंदिर बनाया गया था लेकिन मूर्ति अचानक मंदिर के बजाय पीपल के वृक्ष के नीचे विराजित हो जाती है वही लगातार इस तरह की घटना होने पर महाराजा ने यथा स्थान पर मूर्ति को रहने दिया और मां कालिका की मूर्ति सुबह दोपहर और शाम को अपने अलग- अलग दर्शन देती रहती है। मूर्ति के समीप पीपल की गोद में छोटा गड्डा है जो कि आसाध्य रोग को दूर करता है। इसी गड्ढे में नवरात्रि में कभी कभी दुध जैसा पानी भी निकलता है जिसे माता का चमत्कार माना जाता है।

इसके अलावा मंदिर में मां कालिका के पूर्ण स्वरूप में आनंद में मूर्ति स्थापित है और साथ ही गजानन महाराज का मंदिर भी है।

नवरात्रि पर यहां मां कालिका को रथ पर विराजित कर शहर में भ्रमण कराया जाता है जिसके बाद मंदिर में विशेष पाठ होता है व साथ ही परिसर में गरबा नृत्य का आयोजन होता है। पूरे नो दिनों तक महाप्रसादी का भी आयोजन होता है। कई सालों से दशहरे के बाद जनसहयोग से बड़े भंडारे का आयोजन भी किया जाता है।