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क्या जरूरी है CPA
– राजधानी परियोजना में फाइलें लंबी नहीं चलती हैं। यहां पर फैसले आसानी से होते हैं। क्योंकि यहां प्रशासक ही अंतिम निर्णय लेते हैं। इसलिए विकास के काम तेजी से होते हैं। राजधानी के किसी भी विकास कार्य में अगर फंड बढ़ाना हो तो सीपीए में मंजूरी प्रक्रिया आसान है। यहां पर सीपीए में टेंडर प्रक्रिया भी आसान है। इसमें ईई और एसई के स्तर पर ज्यादातर टेंडर मंजूर हो जाते हैं। काम बढ़ने पर यहां वर्क ऑर्डर में संशोधन के लिए उच्चस्तरीय मंजूरी जरूरी नहीं होने से लोकल लेवल पर काम तेजी से पूरा कर लिया जाता है।
काम तो बंटे पर पूरे नहीं हो पाया
सरकार की मंजूरी के बाद सीपीए को बंद करने के निर्णय पर मुहर भी लग गई थी। सीपीए के बंद होने के बाद सीपीए की 92.5 किमी सड़कें और भवनों के साथ मयूर पार्क, शौर्य स्मारक, प्रकाश तरण पुष्कर सहित 24 पार्क पीडब्ल्यूडी को सौंप दिए गए थे। इसके लिए पीडब्ल्यूडी में एक सीपीए डिविजन बनाया गया था। लेकिन उसे बाद भी उनकी हालत सुधर नहीं सकी। एकांत पार्क जैसे नगर वन का रखरखाव वन विभाग को सौंपा गया था लेकिन वह भी मानकों पर खरा नहीं उतर सका।