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अब उनकी जनसुनवाई से वे जिले के एसडीएम और तहसीलदारों को भी जोड़ लेते है। उनके पास यदि कोई अपनी जमीन पर अतिक्रमण की शिकायत करता है और वह किसी तहसील या गांव से जुड़ी होती है तो संबंधित एसडीएम और तहसीलदार को तत्काल वीसी के जरिए लाइन पर लेकर उनसे शिकायत के संबंध में पूछा जाता है। यदि इसमें किसी न्यायालय में मामला लंबित है तो वे बता देते है और यदि निराकरण उनके स्तर पर होना है तो तत्काल पटवारी, आरआई को भेजकर अतिक्रमण हटाने के लिए निर्देश दे दिए जाते है।
इसी तर्ज पर अब किसी विभाग से जुड़ी शिकायत जनसुनवाई में आती है तो उस विभाग के अधिकारी को टेलीफोन पर या कागज पर निर्देशित करने के बजाय तत्काल वीसी में ऑनलाईन जोड़ा जाएगा और शिकायत पर तत्काल चर्चा कर उसका निराकरण किया जाएगा। कलेक्टर का कहना है कि तहसील, ग्राम स्तर की शिकायतों पर इस प्रक्रिया से एक-दो दिन के भीतर कार्यवाही हो जाएगी। शिकायतकर्ता को त्वरित न्याय मिलेगा।
गांव से पशु रोड पर ही न आए इसके लिए सुबह सड़कों पर निकलते है कलेक्टर
प्रदेशभर में निराश्रित पशुओं को सड़कों पर आने से रोकने के लिए अभियान चल रहा है। विदिशा कलेक्टर सुबह-सुबह सड़कों पर निकलते है। सड़क पर मवेशी दिखे या यातायात अनियंत्रित मिले और गंदगी के ढेर सड़क या आसपास दिखाई दे तो तत्काल क्षेत्र के संबंधित अधिकारी को मौके पर बुलाकर इन्हें ठीक कराया जाता है। कलेक्टर ने जनपद के सीईओ, ब्लॉक लेबल अधिकारियों, एसडीओ, टीआई को निर्देश दे रखे है कि पालतू गौवंश गांव से ही शहरों की सड़कों पर न आ पाए ऐसा इंतजाम करें। लोग दूध निकालकर पशुओं को सड़कों पर छोड़ देते है। इससे यातायात व्यवस्था गड़बड़ाती है। शाम को फिर गौवंश को लोग ले जाते है। अब ऐसा नहीं होगा गांव से गौवंश शहर की सड़कों पर ही नहीं आ पाएंगे। वहीं गंदगी के ढेर पर तत्काल वीडियो कॉलिंग कर संबंधित को बताया जाता है और एक घंटे के भीतर वहां सफाई हो जाती है।