
Big Action of ED: नगर निगम के सहायक राजस्व अधिकारी की ₹1.06 करोड़ की संपत्ति कुर्क
इंदौर। भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इंदौर नगर निगम में पदस्थ सहायक राजस्व अधिकारी राजेश परमार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए ₹1.06 करोड़ मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है।
यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है। कुर्की आदेश ईडी के इंदौर उप-आंचलिक कार्यालय द्वारा जारी किया गया।
ED के अनुसार, कुर्क की गई संपत्तियों में आवासीय मकान, प्लॉट, एक फ्लैट तथा कृषि भूमि शामिल हैं, जो राजेश परमार और उनके परिजनों के नाम दर्ज हैं।
यह कार्रवाई आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW), भोपाल द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई है। एफआईआर में परमार पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
जांच एजेंसी के मुताबिक, वर्ष 2007 से 2022 के बीच राजेश परमार ने अपनी ज्ञात वैध आय की तुलना में कहीं अधिक, लगभग ₹1.66 करोड़ की संपत्तियाँ अर्जित कीं। यह राशि उनकी घोषित आय से लगभग 175 प्रतिशत अधिक पाई गई। ईडी ने इस मामले में अपराध से अर्जित आय (Proceeds of Crime) को करीब ₹1.21 करोड़ आंका है।
ED की जांच में यह भी सामने आया कि अवैध गतिविधियों से अर्जित धन को सीधे और परोक्ष रूप से संपत्तियों की खरीद में इस्तेमाल किया गया। जांच में पाया गया कि बड़ी मात्रा में नकद को पहले बैंक खातों में जमा किया गया और फिर विभिन्न बैंक ट्रांसफर के माध्यम से उसे घुमाकर अचल संपत्तियों के अधिग्रहण में लगाया गया, ताकि धन के अवैध स्रोत को छिपाया जा सके।
प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि जांच के दौरान राजेश परमार से संपत्तियों के अधिग्रहण में प्रयुक्त धन के वैध स्रोत से संबंधित दस्तावेज और स्पष्टीकरण मांगे गए, लेकिन वह कोई संतोषजनक जवाब या प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके।
ED ने स्पष्ट किया है कि यह कुर्की अस्थायी है और मामले में आगे भी विस्तृत जांच जारी रहेगी। जांच पूरी होने के बाद, साक्ष्यों के आधार पर और सख़्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। यह मामला एक बार फिर सरकारी सेवाओं में भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति अर्जन पर एजेंसियों की सख़्ती को रेखांकित करता है।





