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शिवानी शर्मा

निवास: जयपुर

शिक्षाः बी.काम. ,एम.बी.ए., मोन्टेसरी डिप्लोमा।

ई मेल: shivani6370@gmail.com

सम्प्रतिः स्वतन्त्र लेखन

प्रकाशित कविता संग्रहः अब तक 6 साझा काव्य संग्रह का संपादन ।

एकल काव्य संग्रह: "कुछ ख़्वाब कुछ हक़ीक़त" 2016 में प्रकाशित, (राजस्थान साहित्य अकादमी द्वारा 2017 में पुरस्कृत)

संपादन: 10 वर्ष का अनुभव

पत्रिकाओं से जुड़ाव: राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय पत्रिकाओं में निरन्तर प्रकाशित                

सम्मानः कार्यक्रम संयोजक,संचालक एवं साहित्यकार के रूप में अब तक विभिन्न संस्थाओं द्वारा 10 बार पुरस्कृत

अन्यः 1-1989 से  आकाशवाणी एवं दूरदर्शन से सम्बद्ध, "अजमेर पोएट्री क्लब" की संस्थापक सदस्य


अविश्वास करने का कोई कारण मौजूद नहीं है मेरे पास

अविश्वास करने का कोई कारण मौजूद नहीं है मेरे पास

मीडियावाला.इन गुनगन थानवी  की बात पर अविश्वास करने का कोई कारण मौजूद नहीं है मेरे पास! हां, विश्वास करने के लिए ढेरों किस्से और चेहरे हैं मेरे पास! जब हम छोटे थे तब लड़कियाँ कहती नहीं थीं क्योंकि कोई...

दीदी का कमरा"

मीडियावाला.इन।   राजी ने बेटे सुयश की शादी से पहले मकान में कुछ फेरबदल करने का प्रस्ताव रखा। उसकी की बात से बाप-बेटे दोनों ही असहमत थे। घर में चार बैडरूम, ड्रॉइंग रूम,रसोई, ऊपर जाने की सीढ़ियां और...

आगरा की दोनों घटनाओं ने फिर झिंझोड़ कर रख दिया है!

आगरा की दोनों घटनाओं ने फिर झिंझोड़ कर रख दिया है!

मीडियावाला.इन। दोनों ही घटनाओं में परिचित लड़कों के संलिप्त होने की आंशका निकल रही है। सांजलि के चचेरे भाई की आत्महत्या ने घटना पर नये सिरे से, पर पुराने अनुभवों के...

प्रथम गुरु

प्रथम गुरु

अक्सर ऐसा कहा जाता है कि बालक की प्रथम गुरु उसकी माता होती है परंतु मैं इस बात से सहमत नहीं हूं। माता भी एक इंसान है और उसके अपने सुख-दुख हैं । कुछ चीजों से वह विचलित...

कहानी : कार्यशाला बनाम बातशाला

कहानी : कार्यशाला बनाम बातशाला

शालिनी का आज दफ्तर में पहला दिन था। सुबह से काम कुछ न किया था बस परिचय का दौर ही चल रहा था। बड़े साहब छुट्टी पर थे सो पूरा दफ्तर समूह बनाकर खिड़कियों से छन-छन कर आती धूप...