Buddha Purnima: राजकुमार सिद्धार्थ गौतम बुद्ध का जन्मदिन

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Buddha Purnima: राजकुमार सिद्धार्थ गौतम बुद्ध का जन्मदिन

डॉ .तेजप्रकाश व्यास

हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष वैशाख माह की पूर्णिमा तिथि को बुद्ध पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। वैशाख शुक्ल पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा या पीपल पूर्णिमा कहा जाता है। इस बार यह पूर्णिमा 23 मई 2024 को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार वैशाख पूर्णिमा भगवान बुद्ध के जीवन की तीन अहम बातें -बुद्ध का जन्म, बुद्ध को ज्ञान प्राप्ति और बुद्ध का निर्वाण के कारण भी विशेष तिथि मानी जाती है। इस दिन भगवान गौतम बुद्ध का जन्म भी हुआ था और संयोग से इसी दिन भगवान बुद्ध को ज्ञान की भी प्राप्ति हुई थी।

बुद्ध पूर्णिमा तिथि

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, बुद्ध पूर्णिमा की तिथि 22 मई 2024, बुधवार को शाम 6.47 बजे शुरू होगी। वहीं, यह तिथि अगले दिन यानी गुरुवार, 23 मई 2024 को शाम 7.22 बजे समाप्त होगी। इस तरह बुद्ध पूर्णिमा पर्व 23 मई 2024 को मनाया जाएगा।

बुद्ध पूर्णिमा पूजन नियम

बुद्ध पूर्णिमा के दौरान भक्त अपने घरों की सफाई करके दिन की शुरुआत करते हैं। कुछ लोग इस दिन नहाने के पानी में गंगा मिलाकर स्नान करते हैं। इस दिन पूरे घर में गंगाजल छिड़का जाता है। मोमबत्ती या दीपक जलाए जाते हैं और घरों को फूलों से सजाते हैं। हल्दी, रोली या कुमकुम से प्रवेश द्वार पर स्वस्तिक बनाएं। इस दिन बोधि वृक्ष के पास दूध डाला जाता है। जरूरतमंद लोगों को भोजन और कपड़े भी दान करें। इस दिन तामसिक चीजों से दूर रहें।

पुराणों में महात्मा बुद्ध को भगवान विष्णु का नौवां अवतार माना गया है। इस दिन बौद्ध मतावलंबी बौद्ध विहारों और मठों में इकट्ठा होकर एक साथ उपासना करते हैं। दीप प्रज्जवलित कर बुद्ध की शिक्षाओं का अनुसरण करने का संकल्प लेते हैं। गौतम बुद्ध के जीवन से जुड़े कई ऐसे प्रसंग हैं, जिनमें सुखी जीवन और सफलता पाने के सूत्र छिपे हैं।

अष्टांगिक मार्ग

महात्मा बुद्ध ने बताया कि तृष्णा ही सभी दुखों का मूल कारण है। तृष्णा के कारण संसार की विभिन्न वस्तुओं की ओर मनुष्य प्रवृत्त होता है और जब वह उन्हें प्राप्त नहीं कर सकता अथवा जब वे प्राप्त होकर भी नष्ट हो जाती हैं तब उसे दुख होता है। तृष्णा के साथ मृत्यु प्राप्त करने वाला प्राणी उसकी प्रेरणा से फिर भी जन्म ग्रहण करता है और संसार के दुख चक्र में पिसता रहता है। अत: तृष्णा को त्याग देने का मार्ग ही मुक्ति का मार्ग है।

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भगवान बुद्ध का अष्टांगिक मार्ग वह माध्यम है जो दुख के निदान का मार्ग बताता है। उनका यह अष्टांगिक मार्ग ज्ञान, संकल्प, वचन, कर्म, आजीव, व्यायाम, स्मृति और समाधि के सन्दर्भ में सम्यकता से साक्षात्कार कराता है। गौतम बुद्ध ने मनुष्य के बहुत से दुखों का कारण उसके स्वयं का अज्ञान और मिथ्या दृष्टि बताया है। महात्मा बुद्ध ने पहली बार सारनाथ में प्रवचन दिया था उनका प्रथम उपदेश ‘धर्मचक्र प्रवर्तन’ के नाम से जाना जाता है जो उन्होंने आषाढ़ पूर्णिमा के दिन पांच भिक्षुओं को दिया था। भेदभाव रहित होकर हर वर्ग के लोगों ने महात्मा बुद्ध की शरण ली व उनके उपदेशों का अनुसरण किया। कुछ ही दिनों में पूरे भारत में ‘बुद्धं शरणं गच्छामि, धम्मं शरणं गच्छामि, संघ शरणम् गच्छामि’का जयघोष गूंजने लगा। उन्होंने कहा कि केवल मांस खाने वाला ही अपवित्र नहीं होता बल्कि क्रोध, व्यभिचार, छल, कपट, ईर्ष्या और दूसरों की निंदा भी इंसान को अपवित्र बनाती है। मन की शुद्धता के लिए पवित्र जीवन बिताना जरूरी है।

भगवान बुद्ध का महानिर्वाण

भगवान बुद्ध का धर्म प्रचार 40 वर्षों तक चलता रहा। अंत में उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में पावापुरी नामक स्थान पर 80 वर्ष की अवस्था में ई.पू. 483 में वैशाख की पूर्णिमा के दिन ही महानिर्वाण प्राप्त हुआ। बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर कुशीनगर के महापरिनिर्वाण मंदिर में एक महीने तक चलने वाले विशाल मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें देश विदेश के लाखों बौद्ध अनुयायी यहां पहुंचते हैं।

भगवान बुद्ध अपने ज्ञान के लिए विशेषकर जाने जाते है। उनके अनमोल विचार आज भी युवाओं को मार्गदर्शित करते हैं। जीवन में कामयाबी हासिल करने के लिए सही मार्गदर्शन का होना बेहद जरूरी है। सफलता की पहली सीढ़ी का नाम ही मार्गदर्शन है, बिना इसके शिखर तक पहुंचना असंभव होता है।

हर व्यक्ति अपने जीवन में आगे बढ़ना चाहता है, जिसके लिए वह कई प्रयास भी करता है। परंतु सही मार्गदर्शन न मिलने के कारण असफलताओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में हम सभी को भगवान गौतम बुद्ध के विचारों का पालन करना चाहिए। यह विचार उनके अनुभवों और ज्ञान पर

आधारित है। ये अनमोल विचार जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। माना जाता है कि भगवान बुद्ध ने हमेशा लोगों को अहिंसा और करुणा का भाव सिखाया है।

गौतम बुद्ध के जीवन से जुड़े कई ऐसे प्रसंग हैं, जिनमें सुखी जीवन और सफलता पाने के सूत्र छिपे हैं।

ऐसे में आइए उनके अनमोल विचारों के बारे में जान लेते हैं।

“शांति भीतर से आती है। इसे बाहर मत खोजो।”
(स्रोत) “द बुद्धा वर्ड्स ऑन मेडिटेशन एंड स्पिरिचुअल प्रैक्टिस” (भोधि भिक्षु द्वारा)

“स्वास्थ्य सबसे बड़ा उपहार है, संतोष सबसे बड़ी संपत्ति है, निष्ठा सबसे अच्छा संबंध है।”
(स्रोत), “धम्मपद: बुद्ध के उपदेश” ( थॉमस बायरम द्वारा अनुवादित)

“तीन चीजें लंबे समय तक छिपी नहीं रह सकतीं: सूर्य, चंद्रमा और सत्य।”
(स्रोत) “बुद्धा की शिक्षाएं” (एडवर्ड कॉन्ज़ द्वारा)
मन ही सब कुछ है। आप जो सोचते हैं, वही बनते हैं।”
(स्रोत) “बुद्ध और उनकी शिक्षाएं” (नारदा थेरा द्वारा)

बुद्ध के कुछ अन्य विचार:

गौतम बुद्ध कहते हैं कि
* जीवन में हजारों लड़ाइयां जीतने से अच्छा है कि तुम स्वयं पर विजय प्राप्त कर लो। फिर जीत हमेशा तुम्हारी होगी, इसे तुमसे कोई नहीं छीन सकता।
* किसी भी हालात में तीन चीजें कभी भी छुपी नहीं रह सकती, वो है- सूर्य, चन्द्रमा और सत्य।

* जीवन में किसी उद्देश्य या लक्ष्य तक पहुंचने से ज्यादा महत्वपूर्ण उस यात्रा को अच्छे से संपन्न करना होता है।

* बुराई से बुराई कभी खत्म नहीं होती। घृणा को तो केवल प्रेम द्वारा ही समाप्त किया जा सकता है, यह एक अटूट सत्य है।

* सत्य के मार्ग पर चलते हुए व्यक्ति केवल दो ही गलतियां कर सकता है, पहली या तो पूरा रास्ता न तय करना, दूसरी या फिर शुरुआत ही न करना।

. भविष्य के सपनों में मत खोओ और भूतकाल में मत उलझो सिर्फ वर्तमान पर ध्यान दो। जीवन में खुश रहने का यही एक सही रास्ता है।

* जिस तरह एक जलते हुए दीये से हजारों दीपक रोशन किए जा सकते है, फिर भी उस दीये की रोशनी कम नहीं होती, उसी तरह खुशियां बांटने से हमेशा बढ़ती है, कभी कम नहीं होती।

. जीवन में आप चाहें जितनी अच्छी-अच्छी किताबें पढ़ लो, कितने भी अच्छे शब्द सुन लें, लेकिन जब तक आप उनको अपने जीवन में नहीं अपनाते तब तक उसका कोई फायदा नहीं होगा।

. क्रोध में हजारों शब्दों को गलत बोलने से अच्छा, मौन वह एक शब्द है जो जीवन में शांति लाता है।

* हमेशा क्रोधित रहना, जलते हुए कोयले को किसी दूसरे व्यक्ति पर फेंकने की इच्छा से पकड़ रखने के समान है। यह क्रोध सबसे पहले आपको ही जलाता है।

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