

Butea Monosperma Lutea: पीले पलाश की आमद का फागोत्सव
इस समय गमले में पीला पलाश खिल रहा है। अन्य अनेक किस्म के पौधों में भिन्न-भिन्न रंग के फूल खिल रहे हैं, मानों फागोत्सव मना रहे है। पलाश दुर्लभ प्रजाति का फूल माना जाता है । फिर भी यदि 10″ गमले में ही फूल आने लगे तो आश्चर्य भी होता है । पीले पलाश को (ब्यूटिया मोनोस्पर्मा ल्यूटिया) को आमतौर पर जंगल की पीली लौ के रूप में जाना जाता है। इसमें करिश्माई हाथीदांत सदृश्य फूलों की कलियाँ और पूरे मुकुट को कवर करने वाले चमकीले पीले फूल होते हैं।
भारतीय संस्कृति में पीले रंग का अत्यधिक महत्व माना गया है। पीले रंग के पलाश को पीताम्बरी पलाश भी कहा जाता है। भगवान कृष्ण पीले रंग के वस्त्रों में सुशोभित रहते थे, इसीलिए पीताम्बरधारी कहलाए। पीला रंग शुद्ध और सात्विक प्रवृत्ति के साथ ही सादगी और निर्मलता का भी प्रतीक है।
एक मजेदार बात बताता हूं, एक सदी पहले तक भावी दामाद का चयन करने के पूर्व परीक्षा के रूप में पलाश के पत्तों से पत्तल दोने बनवाये जाते थे । ठीक ढंग से बनाने पर ही दामाद के रूप में स्वीकार किया जाता था।
* सामान्य पलाश – Butea monosperma
* पीला पलाश – Butea monosperma lutea
* सफेद पलाश – butea parviflora
महेश बंसल, इंदौर
डाॅ. मुरलीधर चाँदनीवाला की दो कवितायेँ