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CCTV Cameras in Police Stations : हाई कोर्ट के डीजीपी को निर्देश ‘हर थाने में अत्याचार रोकने के लिए सीसीटीवी कैमरे हों!’

यदि कैमरे बंद हों तो यह जिम्मेदारी थाने के प्रभारी अधिकारी की!

CCTV Cameras in Police Stations : हाई कोर्ट के डीजीपी को निर्देश ‘हर थाने में अत्याचार रोकने के लिए सीसीटीवी कैमरे हों!’

Indore : मध्यप्रदेश के डीजीपी को मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने आदेश दिए हैं कि सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे हमेशा चालू होना चाहिए। इससे थानों में लोगों पर होने वाले अत्याचारों में कमी आएगी। यदि कोई व्यक्ति थाने जाता है और उसके साथ खराब व्यवहार होता है, तो कैमरे इसका प्रमाण दे सकते हैं। हाई कोर्ट ने कहा कि किसी घटना में थाने के फुटेज मांगे जाने पर यदि नहीं मिलते, तो इसे थाना प्रभारी या अन्य प्रभारी अधिकारी की लापरवाही माना जाएगा। हाई कोर्ट ने डीजीपी को इसके पालन के निर्देश दिए।

जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने निर्मल नाम के युवक के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट में मामला दर्ज किया था। उसने कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी और थाने में प्रताड़ना का आरोप लगाया। कोर्ट ने उसे जमानत दे दी, पर थाने में अत्याचार के संबंध में जो आरोप लगाए, उस पर भी सुनवाई की।

याचिका में उसने पुलिस द्वारा थाने में प्रताड़ित करने सहित कई गंभीर आरोप भी लगाए थे। हाई कोर्ट ने उसे जमानत दी और थाने में अत्याचार के जो आरोप लगाए उस पर अलग से सुनवाई की थी। थाने में रिकाॅर्ड भी उपलब्ध नहीं था। पुलिस रेडियो के वरिष्ठ अधीक्षक विजय खत्री ने कोर्ट में वर्चुअल उपस्थित होकर पुलिस थानों में सीसीटीवी को लेकर जारी की गई एसओपी के बारे में बताया था।

पुलिसकर्मियों को बॉडी कैमरा भी दिया जाए
हाई कोर्ट ने पूछा कि थानों में कैमरे काम कर रहे हैं या नहीं, इसकी जिम्मेदारी सुनिश्चित करने वाला कौन व्यक्ति हैं। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि अब समय आ गया है कि प्रदेश के प्रमुख शहरों के मुख्य पुलिस थानों में पुलिसकर्मियों को बॉडी कैमरे भी दिए जाना चाहिए। इस दिशा में सरकार को सोचना चाहिए।