Central Vista Project: PM मोदी की व्यक्तिगत संपत्ति नहीं बल्कि राष्ट्रीय गौरव

606

Central Vista Project: PM मोदी की व्यक्तिगत संपत्ति नहीं बल्कि राष्ट्रीय गौरव

स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रीय महत्व की सबसे बड़ी सेंट्रल विस्ता परियोजना, जो रिकॉर्ड 28 माह के समय में पूरी हुई है, को जब मूर्त रूप मिलने वाला है तो विपक्षी दलों ने इसके लोकार्पण कार्यक्रम का बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया है। विपक्षी दलों का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विरोध शनै शनै नफरत में बदलता जा रहा है और उन्हें पता ही नहीं लगता कि कब उनकी यह नफरत राष्ट्र विरोध में परिवर्तित हो जाती है। विपक्ष किसी भी कीमत पर यह नहीं चाहता है की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके द्वारा किए गए अच्छे कार्यों के लिए कभी इतिहास में याद रखा जाए। इसी सोच के साथ नई संसद का विरोध किया जा रहा है। जब इस परियोजना की शुरुआत हो रही थी तो कई विपक्षी दलों ने परियोजना शुरू न हो सके इसके लिए तमाम कानूनी अड़ंगे भी लगाए थे पर दिल्ली उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी एक न सुनी और इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय महत्व का मानते हुए इसमें किसी भी प्रकार का व्यवधान नहीं आने दिया। कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दल इस देश की संवैधानिक संस्थाओं चाहे वह राष्ट्रपति पद हो, चुनाव आयोग या सुप्रीम कोर्ट हो, सभी पर किसी ना किसी बहाने से अंगुली उठाते रहे हैं।

WhatsApp Image 2023 05 25 at 10.11.45 PM

ये विपक्षी दल यह भी भूल जाते हैं किसी व्यक्ति का विरोध किया जाए या किसी दल का विरोध किया जाए यह तो उचित है पर उसके विरोध की आड़ में इस राष्ट्र का और संवैधानिक संस्थाओं का विरोध किया जाना सरासर राष्ट्रविरोधी ही माना जाएगा।

download 3 5

28 मई को नई दिल्ली में बने नए संसद भवन का लोकार्पण प्रस्तावित है और विपक्षी पार्टियों का कहना है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की जगह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लोकार्पण समारोह में आमंत्रित किया जाना राष्ट्रपति का और देश के आदिवासी तथा पिछड़े समुदायों का ‘अपमान’ है। इस पर पलटवार करते हुए केंद्रीय आवासन और शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी ने कहा कि “अतीत में माननीय राष्ट्रपति के बारे में अपने नेताओं द्वारा की गई अभद्र टिप्पणियों के बाद, कांग्रेस अध्यक्ष उनके चुनाव पर अनावश्यक टिप्पणियां करती रही है। दुखद है कि राष्ट्रीय पार्टी होने का दावा करने वाली कांग्रेस में भारत की प्रगति में राष्ट्रीय भावना और गर्व की भावना का अभाव है। नए संसद भवन का प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लोकार्पण का विरोध करने से पहले कांग्रेस को याद करना चाहिए कि 24 अक्टूबर 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने संसदीय एनेक्सी का उद्घाटन किया था। उन्होंने कांग्रेस का एक और उदाहरण देते हुए कहा कि 15 अगस्त 1987 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने संसदीय पुस्तकालय की नींव रखी थी। तब ऐसा किया जाना क्या राष्ट्रपति का अपमान नहीं था? कांग्रेस का मानना है कि जो काम हम करें वह ठीक, वही काम कोई दूसरा करें तो गलत।

WhatsApp Image 2023 05 25 at 10.11.45 PM 1

ऐसा ही एक और उदाहरण है छत्तीसगढ़ का। अगस्त 2020 में छत्तीसगढ़ में नवीन विधानसभा भवन का शिलान्यास कांग्रेस सांसद सोनिया गांधी और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने किस हैसियत से किया था। वहां लगे शिलापट्ट इस बात के गवाह हैं। महिलाओं और अनुसूचित जाति के हिमायती बनने का ढोंग करने वाली कांग्रेस ने उस समय की राज्यपाल अनसूया उईके तक का नाम शिलापट्ट में नहीं अंकित होने दिया था। आपको बता दें कि श्रीमती उईके मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से आती हैं और जनजाति समाज से हैं। इतना ही नहीं राज्य के चुने हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का नाम भी काफी नीचे लिखा गया है। क्या यह चुने हुए मुख्यमंत्री का अपमान नहीं है।

कांग्रेस अपने गिरेबान में झांक कर देखे तो उसकी ऐसी बहुत सी करतूतें देखने को मिलेंगी जो खुद उन्हें शर्मसार कर देंगी। एक और उदाहरण है 3 दिसंबर 2011 को जब मणिपुर विधानसभा भवन का उद्घाटन हुआ था। उस उद्घाटन शिलापट्ट में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ श्रीमती सोनिया गांधी,चेयर पर्सन, यूपीए का भी नाम अंकित है। आखिर कांग्रेस की स्वयंभू नेता सोनिया गांधी किस संवैधानिक पद पर थीं जो उनका नाम इस शिलापट्ट पर आज भी अंकित है।
नई दिल्ली के सेंट्रल विस्ता प्रोजेक्ट को लेकर विपक्ष का विरोध इसलिए भी बेमानी साबित होता है यह संंसद भवन भविष्य की जरूरतों को देखते हुए तैयार कराया गया है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यक्तिगत संपत्ति नहीं बल्कि इस देश का राष्ट्रीय गौरव है।

WhatsApp Image 2023 05 25 at 10.11.44 PM

इंटरनेट पर जरा सर्च कर लीजिए कि गांधी परिवार के नाम पर इस देश में क्या-क्या है। तो आप जानकर दंग रह जाएंगे कि 600 से ज्यादा सरकारी योजनाओं, भवनों, स्टेडियम और हवाई अड्डों का नाम जवाहरलाल नेहरू इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के नाम पर रखा गया था। जबकि नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में जो आम आदमी के लिए आवास योजना शुरू की गई है, उसका नाम प्रधानमंत्री आवासीय योजना है न कि नरेंद्र मोदी आवासीय योजना। इसी प्रकार मध्यप्रदेश में जो विशिष्ट स्कूल स्थापित किए गए हैं उनका नाम भी सीएम राइज स्कूल है न कि शिवराज सिंह चौहान के खुद के नाम पर।

इसके विपरीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के लोकतंत्र को दुनिया भर में प्रतिष्ठित किया है। हाल ही में 23 मई को सिडनी में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए उन्होंने भारतीय गौरव की चर्चा करते हुए कहा था कि भारत हजारों वर्षों से जीवंत सभ्यता रहा है। भारत मदर ऑफ डेमोक्रेसी है यानी प्रजातंत्र की मां है। हमने समय के अनुसार खुद को ढाला है लेकिन अपने मूल सिद्धांतों पर हमेशा टिके रहे हैं।

 

कांग्रेस कब समझेगी की देश में कुछ चीजें राजनीति से परे होनी चाहिए। संसद भवन किसी एक पार्टी विशेष का नहीं एक व्यक्ति का नहीं, जिसको देश की जनता सत्ता सौंपेगी उसका होगा। आज जब 21वीं सदी में भारत एक नया स्वरूप धारण कर रहा है, भारत के लोकतंत्र का मंदिर संसद भी एक नया युगानुरूप स्वरूप ले रही है। यह शुभ अवसर है पर कुछ लोग ऐसे होते हैं जो हर शुभ कार्य में विघ्न उत्पन्न करके ही संतोष का अनुभव करते हैं।

कांग्रेस समेत अधिकांश विपक्षी दल ऐसे ही “विघ्न संतोषी” हैं।
अन्यथा विपक्ष एक कार्य बता दें जिसमें इन्होंने कोई विघ्न बाधा न उत्पन्न की हो और इनको कोई अनावश्यक आपत्ति न रही हो।

कांग्रेस और विपक्ष का नई संसद भवन का प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लोकार्पण किए जाने का विरोध किसी भी मायने में न उचित है न ही सम्यक है। राष्ट्रहित में इन सभी दलों को इस तरह के राष्ट्रीय गौरवशाली प्रतीकों के किसी भी विरोध से बचना चाहिए। उन्हें नहीं पता कि इस तरह के विरोध करके वे खुद अपनी जड़ों में मट्ठा डाल रहे हैं।

Author profile
Sudesh Gaud
सुदेश गौड़

श्री सुदेश गौड़ मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। वे दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, नई दुनिया, राष्ट्रीय सहारा सहित देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। वे नवदुनिया भोपाल के संपादक भी रहे हैं। वर्तमान में वे प्रदेश के अग्रणी न्यूज़ पोर्टल मीडिया वाला के नेशनल हेड हैं।