नगर पालिका के ऑल इंडिया मुशायरे में बवाल, 3 प्रकरण दर्ज; अंडे फेंके जाने पर बिहार के शायर ने शायरी से ही दिया जवाब  

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नगर पालिका के ऑल इंडिया मुशायरे में बवाल, 3 प्रकरण दर्ज; अंडे फेंके जाने पर बिहार के शायर ने शायरी से ही दिया जवाब

खरगोन नगर पालिका परिषद द्वारा जमजम मार्केट में आयोजित ऑल इंडिया मुशायरे में शनिवार रात जमकर हंगामा हो गया था। कार्यक्रम के दौरान शायरी को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि मंच पर धक्का-मुक्की, मारपीट और अंडा फेंकने की घटनाएं सामने आईं। मामले में खरगोन कोतवाली पुलिस ने गुरुवार रात तीन अलग-अलग प्रकरण दर्ज किए हैं। अंडे फेंके जाने पर बिहार के शायर ने शायरी से ही जवाब देकर सभी को लाजवाब कर दिया।

कोतवाली प्रभारी बीएल मंडलोई ने बताया कि पुलिस अधीक्षक रवींद्र वर्मा के निर्देश पर प्राप्त शिकायतों के आधार पर कार्रवाई की गई। विवाद उस समय शुरू हुआ जब स्थानीय शायर अबूबकर जिया की कुछ पंक्तियों पर श्रोताओं के एक वर्ग ने आपत्ति जताई। देखते ही देखते कुछ लोग मंच पर चढ़ आए और कार्यक्रम स्थल पर अफरा-तफरी मच गई। आरोप है कि इस दौरान गाली-गलौज और मारपीट भी हुई।

शायर जिया ने थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए अल्ताफ आजाद, आसिफ प्रिंस खान, आरिफ के जीएन समेत सात नामजद और करीब 25 अन्य लोगों पर जानलेवा हमला, लूट और अभद्रता के आरोप लगाए हैं। पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

इसी बीच कार्यक्रम में बिहार से आए शायर अपूर्व गौरव विक्रम शाह पर अंडा फेंके जाने की घटना ने माहौल और गरमा दिया। आयोजन समिति की शिकायत पर पुलिस ने दर्शक फर्दीन के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। पूछताछ में उसने कथित रूप से स्वीकार किया कि उसका निशाना अबूबकर जिया थे, लेकिन अंडा पास बैठे अपूर्व पर जा लगा।

दूसरी ओर, मुस्लिम समाज के कुछ प्रतिनिधियों ने भी अबूबकर जिया पर भड़काऊ शायरी का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। इस शिकायत के आधार पर जिया के खिलाफ भी एक अलग प्रकरण दर्ज किया गया है।

शायर अबू बकर जिया द्वारा ‘मुखबिर’ शीर्षक से पढ़े गए शेर के बाद उपजे विवाद ने कार्यक्रम का माहौल खराब कर दिया था। और हंगामे के बीच अंडा फेंके जाने की घटना हुई। अंडा बिहार के शायर अपूर्व गौरव विक्रम शाह को लगा, जिससे वे क्षणिक रूप से असहज हो गए।

हालांकि, घटना के बाद अपूर्व गौरव विक्रम शाह ने संयम का परिचय देते हुए शायरी के माध्यम से अपनी बात रखी। उन्होंने विवाद करने वालों को माफ करते हुए नसीहत भी दी। उन्होंने शेर पढ़ा—

 

“काट कर गैरों की टांगे खुद लगा लेते हैं लोग,

इस शहर में इस तरह भी कद बढ़ाते लेते हैं लोग,

शेर सुनने का तुम्हें सलीका आता ही नहीं,

शायरों को फिर न जाने क्यों बुला लेते हैं लोग।”

हालांकि उन्होंने कहा कि दो-तीन लोगों से पूरे शहर को नहीं आंका जा सकता।

आयोजन समिति ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि मुशायरा जैसे सांस्कृतिक आयोजनों में इस तरह की घटनाएं दुर्भाग्यपूर्ण हैं।