मुख्यमंत्री डॉ. यादव अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की 95वीं पुण्यतिथि पर अर्पित करेंगे श्रद्धांजलि, उदयगढ़ भगोरिया उत्सव में करेंगे सहभागिता

मुख्यमंत्री, 171.19 करोड़ रुपये की लागत के विकास कार्यों की देंगे सौगात

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की 95वीं पुण्यतिथि पर अर्पित करेंगे श्रद्धांजलि, उदयगढ़ भगोरिया उत्सव में करेंगे सहभागिता

इंदौर: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद के 95वें शहादत दिवस पर आलीराजपुर के चन्द्रशेखर आजाद नगर (भाबरा) में शुक्रवार 27 फरवरी को आजाद स्मृति मंदिर पहुंचकर अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद मण्डी प्रांगण, चन्द्रशेखर आजाद नगर में उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करेंगे।

अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्यप्रदेश के भाबरा में हुआ था। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अद्वितीय साहस और त्याग का परिचय दिया। दिनांक 27 फरवरी 1931 को प्रयागराज (इलाहाबाद) के अल्फ्रेड पार्क में एक व्यक्ति द्वारा किये गये विश्वासघाट के कारण पुलिस से घिर जाने पर उन्होंने वीरतापूर्वक मुकाबला किया और अंतिम क्षण तक संघर्ष करते हुए अंग्रेजों के हाथों गिरफ्तार न होने का संकल्प को पूर्ण कर अपना बलिदान दे दिया। उनका जीवन राष्ट्रभक्ति, साहस और आत्मसम्मान का प्रेरणास्रोत है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव चन्द्रशेखर आजाद नगर (भाबरा) में विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण करेंगे। वे 79.92 करोड़ रुपये लागत के 14 कार्यों का लोकार्पण तथा 119.02 करोड़ रुपये लागत के 35 कार्यों का भूमि-पूजन करेंगे। जिले में विकास परियोजनाओं से क्षेत्र के समग्र विकास को नई गति मिलेगी।

*जनजातीय प्रतिनिधियों से करेंगे संवाद*

मुख्यमंत्री डॉ. यादव उदयगढ़ में आयोजित पारंपरिक भगोरिया उत्सव में सम्मिलित होंगे। मुख्यमंत्री उत्सव स्थल पर पहुंचकर जनजातीय के प्रतिनिधियों से संवाद भी करेंगे। उदयगढ़ का भगोरिया अपने रंग, उमंग और परंपराओं के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। पारंपरिक वेशभूषा एवं आभूषणों से सजे युवक-युवतियां, मांदल और ढोल की थाप पर थिरकते समूह नृत्य, लोकगीतों की मधुर स्वर लहरियां तथा रंग-गुलाल से सराबोर वातावरण पूरे क्षेत्र को उत्सवमय बना देता है। यह पर्व सामाजिक मेल-जोल, आपसी परिचय और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। यह पर्व जनजातीय जीवन शैली, परंपरागत कला एवं लोक विरासत के संरक्षण का सजीव उदाहरण है।