मुख्यमंत्री का मास्टर स्ट्रोक

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मुख्यमंत्री का मास्टर स्ट्रोक

राजेश ज्वेल की विशेष रिपोर्ट

इंदौर: खेती किसानी से पुश्तैनी रूप से जुड़े रहे मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने एक और संवेदनशील फैसला आज लिया, जिसके दूरगामी परिणाम तो होंगे ही वही भूमि की अनुपलब्धता के कारण अधर में लटके प्रोजेक्ट्स को भी गति मिलेगी .किसानों की इन दिनों सबसे अधिक शिकायतें भूमि अधिग्रहण को लेकर रहती है .

उज्जैन सिंहस्थ से लेकर इंदौर और प्रदेश भर में तमाम प्रोजेक्ट के लिए जो जमीनें अधिग्रहित की जा रही है , उनका विरोध किसानों और उनसे जुड़े संगठनों द्वारा लगातार किया जाता रहा है, ऐसे में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कैबिनेट के जरिए किसानों को चार गुना तक मुआवजा देने का जो प्रावधान किया है, उससे काफी हद तक भूमि अधिग्रहण से जुड़ी जटिलताएं और किसानों की नाराजगी खत्म होगी.

यह भी उल्लेखनीय है कि उज्जैन सिंहस्थ के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीनों को लेकर भी किसान संगठनों ने लगातार विरोध प्रदर्शन किए और उसके बाद किसानों की भावनाओं का सम्मान करते हुए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने न सिर्फ उज्जैन विकास प्राधिकरण की सभी टीपीएस योजनाएं निरस्त करवाई बल्कि इंदौर- उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर से लेकर पीथमपुर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्टों में भी किसानों को पर्याप्त मुआवजा दिलवाया . समय समय पर जिला कलेक्टरों को किसानों से जुड़ी तमाम योजनाओं का लाभ देने के भी निर्देश मुख्यमंत्री द्वारा दिए जाते रहे है.

समर्थन मूल्य पर भी जोरदार खरीदारी इसी कारण इन दिनों चल भी रही है. सरकारी कीमत यानि गाइड लाइन से मुआवजा राशि को किसान कम मानते है क्योंकि बाजार भाव इससे कही ज्यादा रहता है, यही कारण है कि रेलवे लाइन से लेकर इकोनॉमिक कॉरिडोर , हाईवे, एयर पोर्ट सहित कई अन्य प्रोजेक्ट अभी भी किसानों के विरोध के चलते अमल में नहीं आ पा रहे हैं .अब उम्मीद की जाना चाहिए कि मुख्यमंत्री ने जो मुआवजे की राशि चार गुणा तक कर दी है , उससे अब बाजार भाव और सरकारी मूल्य लगभग बराबर हो जाएगा . इससे जहां किसानों को अपनी जमीनों के बदले पर्याप्त क्षतिपूर्ति राशि हासिल होगी वहीं दूसरी तरफ सभी विभागों को अपने प्रोजेक्ट समय सीमा में पूरा करने में आसानी होगी .

एक तरह से यह निर्णय सरकार के लिए भी फायदेमंद है, क्योंकि इससे जहां किसानों की नाराजगी कम होगी और उन्हें पर्याप्त मुआवजा राशि मिलेगी , वहीं दूसरी तरफ प्रोजेक्ट्स की कास्ट यानी लागत बढ़ने से जो नुकसान संबंधित विभाग को होता है, उसमें भी अच्छी खासी बचत होगी .एक तरह से जो राशि प्रोजेक्ट कॉस्ट बढ़ने और कोर्ट कचहरी में खर्च होती है, वही या उससे भी कम राशि किसानों को अब बढ़े हुए मुआवजे के रूप में मिल जाएगी . इससे किसान खुशहाल होगा, तो सारे प्रोजेक्ट समय सीमा में पूरे होंगे, जिसका लाभ आम जनता को मिलेगा और विकास की गाड़ी तेज रफ्तार से दौड़ने लगेगी. कुल मिलाकर मुख्यमंत्री का यह निर्णय इसीलिए मास्टर स्ट्रोक कहा जा सकता है, क्योंकि ये अन्नदाताओं के साथ पूरे प्रदेश के हित में भी है .अन्य राज्य जो भूमि अधिग्रहण की चुनौतियों से जूझ रहे है, उनके लिए भी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा लिया ये निर्णय प्रेरणादायक बनेगा।

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