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अलीराजपुर भी आदिवासी इलाका है और यहाँ भी अफसर राज से इंकार नहीं सकता। संभावना है कि निवाड़ी की तरह मुख्यमंत्री यहाँ भी मंच लूटने के लिए ऐसी कार्रवाई कर सकते हैं। लेकिन, सवाल ये है कि इस तरह की प्रशासनिक कार्रवाई हमेशा क्यों नहीं की जाती! किसी भी कार्रवाई के लिए फाइल क्यों चलती रहती है। तत्काल कार्रवाई करके अधिकारियों को सबक क्यों नहीं सिखाया जाता?