
हॉस्टल निरीक्षण के दौरान कलेक्टर का आपत्तिजनक बयान: वीडियो वायरल होने के बाद खेद व्यक्त किया
Vidisha: मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के उदयपुर से जुड़ा एक प्रशासनिक मामला इन दिनों चर्चा में है। जिले के कलेक्टर अंशुल गुप्ता द्वारा हॉस्टल निरीक्षण के दौरान दिए गए एक आपत्तिजनक बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद मामला सार्वजनिक बहस का विषय बन गया। विवाद बढ़ने पर कलेक्टर ने स्वयं वीडियो के माध्यम से अपने शब्दों के लिए खेद भी व्यक्त किया है।
▪️हॉस्टल निरीक्षण के दौरान हुआ विवाद
▫️जानकारी के अनुसार विदिशा कलेक्टर उदयपुर क्षेत्र के एक सरकारी छात्रावास का निरीक्षण करने पहुंचे थे। निरीक्षण के समय हॉस्टल में बच्चे उपस्थित नहीं मिले। इस पर कलेक्टर ने हॉस्टल स्टाफ से सवाल किए। जवाब में बताया गया कि कड़ाके की ठंड और शीतलहर के चलते बच्चों को अस्थायी छुट्टी देकर घर भेज दिया गया है।
इसी बातचीत के दौरान कलेक्टर ने आवेश में आकर आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया और धमकी भरे लहजे में बयान दे दिया। यह पूरी बातचीत किसी व्यक्ति द्वारा मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर ली गई, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।
*▪️वीडियो वायरल होते ही बढ़ा विरोध*
▫️वीडियो सामने आने के बाद प्रशासनिक भाषा और अधिकारियों के व्यवहार को लेकर सवाल उठने लगे। लोगों ने सोशल मीडिया पर कहा कि उच्च पद पर बैठे अधिकारी से इस तरह की भाषा की अपेक्षा नहीं की जाती। कुछ वर्गों ने इसे प्रशासनिक दबाव और अनुशासन से जोड़ा, जबकि बड़ी संख्या में लोगों ने बयान को अनुचित बताया।
▪️कलेक्टर ने जताया खेद
▫️विवाद बढ़ने के बाद कलेक्टर ने स्वयं एक वीडियो संदेश जारी कर अपने शब्दों पर खेद प्रकट किया। उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान उन्हें कुछ अव्यवस्थाएं नजर आई थीं और उसी आवेश में उनसे यह शब्द निकल गए, जो नहीं निकलने चाहिए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी कर्मचारी या संस्था का अपमान करना नहीं था।
कलेक्टर ने यह भी कहा कि यदि उनके शब्दों से किसी को ठेस पहुंची है तो वह उसके लिए खेद व्यक्त करते हैं और भविष्य में संयमित भाषा का प्रयोग करेंगे।
*▪️छुट्टी का कारण ठंड और स्वास्थ्य बताया गया*
▫️प्रशासनिक स्तर पर यह भी स्पष्ट किया गया कि बच्चों को हॉस्टल से भेजने का निर्णय मौसम की गंभीर स्थिति और बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर लिया गया था। शीतलहर के चलते कई क्षेत्रों में स्कूल और छात्रावासों से जुड़े निर्णय स्थानीय स्तर पर लिए गए थे। इसी कारण बच्चे हॉस्टल में मौजूद नहीं थे।
*▪️प्रशासनिक आचरण पर फिर उठे सवाल*
▫️यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि निरीक्षण और कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों को भाषा और व्यवहार में किस स्तर की मर्यादा रखनी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यवस्था सुधार जरूरी है, लेकिन संवाद का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। उदयपुर का यह मामला फिलहाल प्रशासनिक संवेदनशीलता, जवाबदेही और सार्वजनिक व्यवहार को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।





