एमपी में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की तैयारी

एमपी में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की तैयारी

मीडियावाला.इन।

उपचुनाव के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने परिवार के साथ तिरुपति बालाजी का आशीर्वाद लेकर आ गए हैं। चुनाव से पहले भी वे बालाजी का आशीर्वाद लेने गए थे। बालाजी से लौटने के बाद मुख्यमंत्री को मंत्रिमंडल में नए सदस्यों की आमद और प्रदेश में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी पर चिंतन करना है।  खबर है कि मार्च में चौथी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने  कोरोना संकट को देखते हुए मैदानी अफसरों को नहीं बदला था। लेकिन अब भाजपा सांसदों और विधायकों सहित पार्टी कार्यकर्ताओं का भी दबाव है कि कांग्रेस शासनकाल में तैनात किए गए अफसरों को बदला जाए। उम्मीद है शिवराज सिंह चौहान इसी माह के अंत तक बड़ी प्रशासनिक सर्जरी कर सकते हैं।

*सिंधिया जी का कोटा*

मप्र में उपचुनाव के बाद मंत्रिमंडल के शपथ की अटकलें शुरू हो गई हैं। भाजपा के अनेक वरिष्ठ विधायकों को मंत्री बनने का इंतजार है। उपचुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया कोटे के 2 मंत्री इमरती देवी और गिर्राज दंडोतिया चुनाव हार गए हैं। भाजपा के वरिष्ठ विधायकों को भरोसा है कि इन मंत्रियों के स्थान पर उनकी लाटरी लग सकती है। लेकिन अब खबर आ रही है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे से दावा किया जा रहा है कि उनके कोटे के मंत्रियों की संख्या यथावत रखी जाए। यानि सिंधिया के दो समर्थकों को मंत्री बनाया जाए। इनमें अंबाह से कमलेश जाटव और भांडेर से रक्षा सिरोनिया के नाम की अटकलें शुरू हो गई हैं। देखना है भाजपा सिंधिया कोटे को यथावत रखती है या अपने दल के वरिष्ठ विधायकों को मंत्री बनाती है।

*दो दिग्गजों का जाना*

मप्र में इस सप्ताह कांग्रेस और भाजपा के दो दिग्गज नेताओं के निधन से दोनों पार्टियों में शोक की लहर है। कांग्रेस के धनपति पूर्व विधायक विनोद डागा 11 नवंबर को कमलनाथ के घर ठहाके लगा रहे थे। लोग उन्हें मेहगांव चुनाव में उनके द्वारा की गई मेहनत के लिए उन्हें बधाई दे रहे थे। अगले दिन सुबह खबर आई कि विनोद डागा का बैतूल के उस जैन मंदिर में भगवान के दर्शन करते हुए निधन हो गया जिस मंदिर को उन्होंने स्वयं बनवाकर समाज को सौंपा था। डागा के निधन से कांग्रेस ने केवल नेता नहीं बल्कि एक बड़ा आर्थिक स्रोत भी खो दिया है। इसी तरह भाजपा ने कैलाश सारंग के जाने से एक बड़ा मार्गदर्शक खो दिया है। सारंग भाजपा की पहली पीढ़ी के ऐसे नेता थे जिन्होंने पूरी पार्टी को गढ़ा था। फिलहाल मध्यप्रदेश में भाजपा और कांग्रेस शोक मग्न में हैं।

*साधु विरोधी जेल में*
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने भाषण में यह कहते रहे हैं कि उनकी सुबह की पूजा जैन आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के ध्यान के बिना पूरी नहीं होती। उत्तरप्रदेश का एक सिरफिरा पिछले 2 साल से जैन संतों के बारे में आपत्तिजनक और मनगढ़ंत टिप्पणियां सोशल मीडिया पर कर रहा था। जैन समाज ने मप्र में इस सिरफिरे के खिलाफ अलग-अलग शहरों में चार एफआईआर दर्ज कराई थीं। तीन महीने की फरारी के बाद आखिर यह सिरफिरा  टीकमगढ़ पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। फिलहाल वह टीकमगढ़ जेल में कैद है। तय है कि शिवराज के रहते मप्र पुलिस ऐसे साधु विरोधियों को पाताल से खोजकर भी सजा दिलाने में सक्षम है।

*कम्प्यूटर शट डाउन*
मप्र के उपचुनाव में कांग्रेस की हार का सबसे बड़ा खामियाजा कम्प्यूटर बाबा को उठाना पड़ रहा है। फिलहाल सरकार ने उनका शटर पूरी तरह डाउन कर दिया है। पिछले दो साल से कांग्रेस का झंडा लेकर चलने वाले कम्प्यूटर बाबा को इंदौर जेल में शायद एहसास हो गया होगा कि कांच के घर में रहने वाले दूसरे के घरों में पत्थर नहीं फेंकते। उन्हें यह भी अच्छी तरह एहसास हो गया है कि जिस कांग्रेस के लिए वे झोली फैलाए फिर रहे थे उस कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने अभी तक उनके पक्ष में एक शब्द तक नहीं बोला है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बयान जरूर दिया है कि लेकिन उन्होंने ने भी फिलहाल कम्प्यूटर बाबा को अपने हाल पर छोड़ दिया है। कम्प्यूटर बाबा के जरिए अब वे तमाम बाबा चिंतन जरूर कर रहे होंगे जिन्हें राजनीति का चस्का लगा हुआ है।

*कौन बनेगा नेता प्रतिपक्ष*
उपचुनाव हारने के बाद कांग्रेस में अब कमलनाथ का कद पहले जैसा नहीं रहेगा। अभी तक कमलनाथ प्रदेश कांग्रेस में एकछत्र नेता के रूप में स्वीकार कर लिए गए थे। कमलनाथ ने उपचुनाव में गुटबाजी से बचने के लिए सभी प्रमुख पद अपने पास रखे थे। प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष एवं वेटिंग मुख्यमंत्री सभी कुछ कमलनाथ थे। लेकिन अब विधायकों का दबाव है कि कमलनाथ को प्रदेश अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष में से एक पद ही अपना पास रखना चाहिए। तय है कि यदि कमलनाथ मप्र में टिके रहते हैं तो उन्हें नेता प्रतिपक्ष का पद पार्टी के किसी वरिष्ठ विधायक को सौंपना होगा। नेता प्रतिपक्ष के लिए डॉ. गोविंद सिंह, सज्जन सिंह वर्मा, विजयलक्ष्मी साधौ दौड़ में शामिल बता गए हैं। सिंधिया से मुकाबले के लिए डॉ. गोविंद सिंह का दावा मजबूत बताया जा रहा है।

*और अंत में...*
क्या कोई वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अपने खाते में ऐसी फर्म से लाखों रुपए ले सकता है जिसे उसने करोड़ों के ठेके दिए हों। मप्र में ही शायद यह संभव है। एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की ऐसी जानकारी सामने आई है कि उन्होंने लगभग एक करोड़ रुपए अपने सेविंग अकाउंट में बड़ी चालाकी से ले लिए हैं। ठेका लेने वाली फर्म ने तीन किश्तों में यह राशि पहले फर्म के प्रोपराईटर के खाते में डाली, इसके बाद यह रकम प्रोपराईटर के माता-पिता के  ज्वाइन्ट खाते में गई फिर यह राशि प्रोपराईटर के पिता के निजी खाते में आई ठीक छह घंटे बाद लगभग 50 लाख रुपए वरिष्ठ आईएएस के निजी खाते में पहुंच गए। इसके पहले दस लाख और 40 लाख का ट्रांजेक्शन भी हुआ है। इसे लेकर मप्र की जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं।

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रवीन्द्र जैन

रवीन्द्र जैन न्यूज वर्ल्ड चैनल के स्टेट एडीटर हैं.