मंडाले न सही, म्यांमार में लगेगी लोकमान्य तिळक की तस्वीर

मंडाले न सही, म्यांमार में लगेगी लोकमान्य तिळक की तस्वीर

मीडियावाला.इन।

आज एक अगस्त को लोकमान्य तिळक के महाप्रयाण  का शताब्दी वर्ष है। ऐसे महान महामना को याद करना हर हिंदुस्तानी का फर्ज है। यह और बात है कि हम हमारे महापुरुषों को सिरे से भूलते जा रहे हैं। रस्मी तौर पर याद भी करते हैं तो जन्म तिथि,पुण्य तिथि पर। कुछ को तो उस मौके पर भी नहीं । न उनका जिक्र इतिहास में है न अन्य साहित्य उनके लिये रचा गया। पहले मुगलों ने फिर अंग्रेजों ने और अब काले अंग्रेजों ने उस इतिहास को काल कवलित कर डाला। बहरहाल।

आज का दिन देश के इतिहास में उल्लेखनीय और अफसोसभरा एकसाथ याद किया जायेगा। दरअसल, तमाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की तरह तिळक भी अंंग्रेजों के कोप से बच नहीं पाये थे। इन वीर सेेनाीनयों को या तो गोली से उड़ा दिया जाता, फांसी दे दी जाती या काले पानी से लेकर तो अनेक दूरस्थ जेलों में डाल दिया जाता। तिळक को भी अंग्रेजों ने जेल में डाल दिया था और जीवन का लंबा हिस्सा वहां बिताना पड़ा। तब के बर्मा और आज के म्यांमार में स्थित मंडाले की जेल में तिळक को 23 सितंबर 1908 से 8 जून 1914 तक बंदी बनाकर रखा गया था।

अफसोस इस बात का कि उस मंडाले की जेल में तिळक को दी गई यातना को हमने भुला दिया। कभी किसी सरकार ने उस ओर झांका तक नहीं। आजादी के बाद की उस कांग्रेस सरकार ने भी नहीं जिसका नेतृत्व महात्मा गांधी के प्रिय जवाहरलाल नेहरू कर रहे थे। ऐसा लगता है, जैसे उन्होंने तो संभवतया अपने समकालीनों को अतीत में कैद रहने को छोड़ दिया हो। वह मंडाले जेल अब जमींदोज हो चुकी है। एक स्मृति विलुप्त हो गई। उल्लेखनीय इसलिये कि तिळक को यादों में बरकरार रखने के लिये भगीरथ प्रयास कर रहे महाराष्ट्र निवासी दिलीप साठे की कोशिशों से आज म्यांमार स्थित भारतीय दूतावास में लोकमान्य तिळक की तस्वीर और नामपट्टिका लगाई जायेगी। यदि ये महानुभाव प्रयास न करते तो पता नहीं और कितने बरस तिळक को यह सम्मान नहीं मिल पाता।

यह वही मंडाले की जेल थी, जहां तिळक ने कारावास बिताते हुए गीता रहस्य लिखा था, जो आज और आने वाले बरसोबरस चुनिंदा गीता भाष्य के तौर पर याद रखा जायेगा। वे लोग सचमुच महान होते हैं, जो कारावास के कष्टों को सृजन काल में तब्दील कर देते हैं। तिळक ने भी गीता का अध्ययन कर उसके गूढ़ रहस्यों को न केवल समझा बल्कि लोक ग्राह्य तरीके से उसे परिभाषित भी किया।

आजाद भारत में उस मंडाले जेल को भुला दिया गया। यदि समय रहते भारत सरकार चेत जाती तो बर्मा सरकार से चर्चा कर उसे स्मारक मेें तब्दील करने का प्रस्ताव दे सकती थी, जिसका खर्च भी भारत वहन कर लेता। बर्मा सरकार को उसकी कोई उपयोगिता नहीं लगी और कालातंर मेें उसे तोड़ दिया गया। अब वह जगह सेना के उपयोग में आ रही है।

लोकमान्य तिळक सहित अनेक राष्ट्रभक्तों के जीवन के अनछुए पहलुओं को उजागर करने, उनके साहित्य को खोजने और उनकी कर्मस्थली को पुनर्जीवन देने के उद्देश्य से दिलीप साठे ने बीड़ा उठाया है। दिलीप साठे मूलत: मुंबई  के निवासी हैं और कर सलाहकार हैं। इसी सिलसिलिे में साठे ने म्यामांर की यात्रा कर मंडाले जेल देखना चाही। जब वे वहां पहुंचे तो अफसोस के अलावा कुछ हाथ नहीं लगा। जेल तोडक़र सेना के परिसर की तरह उसका उपयोग किया जा रहा था। तब वे भारतीय उच्चायोग पहुंचे और  राजदूत सौरव कुमार से मुलाकात कर यात्रा का उद्देश्य बताया। साथ ही मांग की कि  तिळक के लिये सम्मान स्वरूप उच्चायोग में ही उनकी एक तस्वीर और नामपट्टिका लगाई जाये। सौरव कुमार ने इसे स्वीकार कर लिया और आज एक अगस्त 2020 को वह होने जा रहा है। साठे ने तिळक के गीता रहस्य की अंर्तकथा के तौर पर मराठी में किताब लिखी है-मंडालेतील गीता रहस्य। वह किताब भी सौरव कुमार को भेंट की गई।

इससे पूर्व बरसों से अनेक बार साठे भारत सरकार से अनुरोध करते रहे कि मंडाले जेल को स्मारक बनाने के लिये म्यांमार सरकार के साथ बातचीत की जाये, किंतु कभी कोई जवाब नहीं आया। यह दर्शाता है कि हमारे महापुरुषो के लिये हमारी सरकारों का क्या रवैया है। साठे के प्रयासों को सौरव कुमार ने काफी तरजीह दी और 1 अगस्त को म्यांमार की राजधानी यंगून में कार्यक्रम भी आयोजित किये हैं। उसके तहत स्थानीय भाषा में तिळक के प्रति जागरुकता के लिहाज से एक व्याख्यान आयोजित किया गया है। एक डिजिटल प्रदर्शनी भी लगाई जा रही है। इसे भारतीय दूतावात और स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केेंद्र आयोजित कर रहा है। साथ ही भारतीय सांस्कृतिक परिषद दिल्ली की ओर से अंतरराष्ट्रीय वेबिनार लोकमान्य के स्वराज्य से आत्म निर्भर भारत का आयोजन भी किया जा रहा है। इसमें यंगून के विद्वान माउंग भाग लेंगे।

RB

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रमण रावल

संपादक - वीकेंड पोस्ट 

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प्रधान संपादक - भास्कर टीवी(बीटीवी), इंदौर

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कार्यकारी संपादक  - चौथा संसार, इंदौर  

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साहित्य संपादक - चौथासंसार, इंदौर                                                             

समाचार संपादक - प्रभातकिरण, इंदौर                                                            


1979 से 1981 तक साप्ताहिक अखबार युग प्रभात,स्पूतनिक और दैनिक अखबार इंदौर समाचार में उप संपादक और नगर प्रतिनिधि के दायित्व का निर्वाह किया । 


शिक्षा - वाणिज्य स्नातक (1976), विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन


उल्लेखनीय-

० 1990 में  दैनिक नवभारत के लिये इंदौर के 50 से अधिक उद्योगपतियों , कारोबारियों से साक्षात्कार लेकर उनके उत्थान की दास्तान का प्रकाशन । इंदौर के इतिहास में पहली बार कॉर्पोरेट प्रोफाइल दिया गया।

० अनेक विख्यात हस्तियों का साक्षात्कार-बाबा आमटे,अटल बिहारी वाजपेयी,चंद्रशेखर,चौधरी चरणसिंह,संत लोंगोवाल,हरिवंश राय बच्चन,गुलाम अली,श्रीराम लागू,सदाशिवराव अमरापुरकर,सुनील दत्त,जगदगुरु शंकाराचार्य,दिग्विजयसिंह,कैलाश जोशी,वीरेंद्र कुमार सखलेचा,सुब्रमण्यम स्वामी, लोकमान्य टिळक के प्रपोत्र दीपक टिळक।

० 1984 के आम चुनाव का कवरेज करने उ.प्र. का दौरा,जहां अमेठी,रायबरेली,इलाहाबाद के राजनीतिक समीकरण का जायजा लिया।

० अमिताभ बच्चन से साक्षात्कार, 1985।

० 2011 से नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने की संभावना वाले अनेक लेखों का विभिन्न अखबारों में प्रकाशन, जिसके संकलन की किताब मोदी युग का विमोचन जुलाई 2014 में किया गया। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को भी किताब भेंट की गयी। 2019 में केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के एक माह के भीतर किताब युग-युग मोदी का प्रकाशन 23 जून 2019 को।

सम्मान- मध्यप्रदेश शासन के जनसंपर्क विभाग द्वारा स्थापित राहुल बारपुते आंचलिक पत्रकारिता सम्मान-2016 से सम्मानित।

विशेष-  भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा 18 से 20 अगस्त तक मॉरीशस में आयोजित 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन में सरकारी प्रतिनिधिमंडल में बतौर सदस्य शरीक।

मनोनयन- म.प्र. शासन के जनसंपर्क विभाग की राज्य स्तरीय पत्रकार अधिमान्यता समिति के दो बार सदस्य मनोनीत।

किताबें-इंदौर के सितारे(2014),इंदौर के सितारे भाग-2(2015),इंदौर के सितारे भाग 3(2018), मोदी युग(2014), अंगदान(2016) , युग-युग मोदी(2019) सहित 8 किताबें प्रकाशित ।

भाषा-हिंदी,मराठी,गुजराती,सामान्य अंग्रेजी।

रुचि-मानवीय,सामाजिक,राजनीतिक मुद्दों पर लेखन,साक्षात्कार ।

संप्रति- 2014 से बतौर स्वतंत्र पत्रकार भास्कर, नईदुनिया,प्रभातकिरण,अग्निबाण, चौथा संसार,दबंग दुनिया,पीपुल्स समाचार,आचरण , लोकमत समाचार , राज एक्सप्रेस, वेबदुनिया , मीडियावाला डॉट इन  आदि में लेखन।