खतरनाक है राजनीति का नया 'स्ट्रेन '

खतरनाक है राजनीति का नया 'स्ट्रेन '

मीडियावाला.इन।

कोरोना वायरस की तरह राजनीति का नया ' स्ट्रेन ' भी बेहद घातक है ,राजनीति का नया 'स्ट्रेन ' बड़ी तेजी से अपना रूप बदल रहा है. राजनीतिक  स्ट्रेन में आ रही अप्रत्याशित तब्दीली से जनता भौंचक और कार्यकर्ता हतप्रभ हैं .अब दल के दल बेचे और खरीदे जा रहे हैं और रओं-रिओज नए 'ऑफर ' दिए जा रहे हैं .
बिहार में भाजपा के साथ जुगलबंदी कर रही जेडीयू ने असम में अपने सारे विधायक भाजपा की गोद में डाल दिए .वैसे इसकी कोई जरूरत नहीं थी लेकिन जब हुक्म हुआ तो उदूली कौन करता ? अन्यथा इसकी प्रतिक्रिया में भाजपा पर वार किया जाना बनता था .लेकिन ऐसा नहीं हुआ. भाजपा ने अलग-अलग विधायक खरीदने के बजाय पूरी पार्टी ही खरीद ली. इसमें भाजपा का कोई दोष नहीं है,जब कोई खुद बिकने को तैयार हो तो भाजपा क्या कर सकती है भला ?वैसे भी असम में जेडीयू के विधायक भाजपा के साथ थे,पहले बाहर खड़े थे अब आंगन में खड़े हैं .यानि केवल स्थितियां बदली हैं .
राजनीति का ये नया स्ट्रेन  असम से होता हुआ अब बिहार तक आ पहुंचा है. बिहार में मुख्य विपक्षी दल राजद ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश बाबू को ऑफर दिया है कि वे सीएम का पद राजद के तेजस्वी यादव को देकर दिल्ली में विपक्ष के नेता बनें और आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री पद के दावेदार भी .राजद का मानना है कि नीतीश बाबू सोलह साल सीएम रह  लिए,अब उन्हें पीएम बनना चाहिए .मुमकिन है कि राजद के प्रस्ताव पर नीतीश बाबू के मन में भी लड्डू फूट रहे हों ! आखिर उनके मन में भी तो पीएम का सपना पनप ही रहा है. आपको याद है कि देश में अनेक किस्मत वाले तीन-तीन चार-चार माह के लिए ही सही लेकिन प्रधानमंत्री तो बने ही हैं .
राजनीति के नए स्ट्रेन की मारक  क्षमता पहले से ज्यादा है. इसी का परिणाम है कि दिल्ली की देहलीज पर बैठे किसानों के आंदोलन को पूरा एक महीना हो गया लेकिन देश की सरकार की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ा .सरकार देश में किसान रेलों के साथ ही बिना ड्रायवर वाली रेल चलने में जुटी रही .मुमकिन है कि ये स्ट्रेन अब किसान आंदोलन की भी हवा निकाल दे .दुनिया में अभी तक भारतीय राजनीति में मिले नए स्ट्रेन का कोई प्रतिरोधी टीका नहीं बना है .
भारत की राजनीति में मुद्दों पर कम गैर मुद्दों पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है. मुद्दे तो अपने आप ठिकाने लग जाते हैं. मसलन आज भारीतय राजनीत्ति की चिंता ये है कि प्रधानमंत्री ने अपनी पत्नी को क्यों त्यागा ? या राहुल गांधी अपनी ननिहाल गए हैं या किसी प्रेयसी के पास ? राजनीति से इतर ये ऐसे मुद्दे हैं जो राजनीति में हींग का काम करते हैं,यानि इस हींग के बिना राजनीति की कोई तरकारी बनती ही नहीं है . देश इन्हीं मुद्दों में उलझा रहता है और सरकार अपनी तमाम उलझने परदे के पीछे से सुलझा लेती है .वैसे राजनीति है ही उलझन का नाम .
दक्षिण में सुपर अभिनेता रजनीकांत पर सियासत के नए स्ट्रेन का सीधा आसार हुया .वे भविष्य के तमाम खतरों को भांप गए और उन्होंने सियासत से तौबा करने का सार्वजनिक ऐलान कर दिया. ऐलान  ही नहीं किया बल्कि जनता से सार्वजनिक माफ़ी भी मांग ली .हिंदी के सुपर स्टार अमिताभ बच्चन वर्षों पहले सियासत से नाता तोड़ चुके हैं .वे जानते हैं कि श्रीमती बच्चन एक बार राजनीति से जूझ सकतीं हैं लेकिन वे नहीं. वे सियासत के लिए नहीं बल्कि घड़ी के विज्ञापनों के लिए बने हैं .कल्पना कीजिये अगर उत्तर,दक्षिण के ये मोहन अभिनेता जिन्हे कुछ लोग शहंशाह भी कहते हैं अगर सियासत में होते तो वालीवुड का क्या होता ?अरबों की ये इंडस्ट्री बर्बाद हो जाती .
बहरहाल राजनीति के नए स्ट्रेन ने नेताओं को नेतागीरी के साथ ही अभिनय और मॉडलिंग कला में भी दक्ष बना दिया है. हमारे देश के अनेक नामचीन्ह नेता मॉडलिंग और अभिनय एक साथ कर सकते हैं .ये उनकी महानता है कि उन्होंने अभी विधिवत इन क्षेत्रों में कदम नहीं रखा है ,अन्यथा बड़े-बड़े  मॉडलों की छुट्टी हो सकती थी. लक्स के विज्ञापनों से लेकर नमक के विज्ञापनों तक नेता ही नेता होते .मै देश के नेताओं की इज्जत इसी दरियादिली की वजह से करता हूँ .
राजनीति के इस नए स्ट्रेन के लक्षण हाल ही में हरियाणा में दिखाई दिए हैं.स्थानीय निकाय के चुनाव में इसी स्ट्रेन की वजह से स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा का विजय रथ ठहर सा गया.गनीमत है कि इस नए स्ट्रेन के पांव पसारने से पहले भाजपा हैदराबाद में स्थानीय निकाय के चुनाव लड़ चुकी थी. मध्यप्रदेश में इसी नए स्ट्रेन की वजह से स्थानीय निकाय के चुनाव तीन माह आगे बढ़ा दिए गए हैं .मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को उम्मीद है कि मुमकिन है कि इन तीन महीनों में इस नए स्ट्रेन का कोई तोड़ निकल आये .स्ट्रेन पर दवाओं के प्रयोग चल रहे हैं .किसान आंदोलन पर इसका इस्तेमाल किया गया है. नतीजा 4  जनवरी को आने की उम्मीद है .
राजनीति के नए स्ट्रेन  का सबसे अधिक और बुरा असर कांग्र्रेस पर हुआ है.पार्टी के दिग्गज या तो कोरंटीन हैं या विदेश यात्रा पर चले गए हैं .राहुल भाई साहब की विदेश यात्रा आज की सबसे ज्यादा गर्म खबर है. अभी ये तय नहीं हो पाया है कि राहुल जी नानी के पास गए हैं या कहीं और ?वे किसानों को अकेला छोड़कर चले गए हैं,अब किसानों को बहकायेगा कौन ?किसान बहके रहते हैं तो सरकार को दूसरे काम करने का बहाना मिल जाता है .वैसे किसान राजनीति पर भी इस नए स्ट्रेन का भयानक असर हुआ है.अब तक इससे 42  जानें जा चुकी हैं .
राजनीति में उभर कर सामने आ रहे इस नए स्ट्रेन को देखने का अपना-अपना नजरिया है. कोई इसे ईश्वर की कृपा मानता है तो कोई देवीय प्रकोप .किसी को ये अप्रत्याशित लगता है ,तो किसी को अवश्यम्भावी .यानि इसको लेकर अभी तक कोई एकराय नहीं है .लोकतंत्र में एक राय होना बड़ा कठिन काम है. कठिन न होता तो किसान दिल्ली की दहलीज पर इतने लम्बे समय तक डेरा न डाले रहते . बहरहाल नए साल की शुभकामनाओं के साथ अपनी कामना तो यही है कि मालिक सबका साथ और सबका विकास की कल्पना को साकार करे, अच्छे दिनों को वापस लौटा दे .रसोई गैस,पेट्रोल,डीजल कम कर दे ,किसानों के मन की बात  बात मान ले ,आदि...आदि

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राकेश अचल

राकेश अचल ग्वालियर - चंबल क्षेत्र के वरिष्ठ और जाने माने पत्रकार है। वर्तमान वे फ्री लांस पत्रकार है। वे आज तक के ग्वालियर के रिपोर्टर रहे है।