मोदी जी के मास्टर स्ट्रोक से चटखने लगे विपक्ष के विकेट

मोदी जी के मास्टर स्ट्रोक से चटखने लगे विपक्ष के विकेट

मीडियावाला.इन।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फ्री वैक्सीन का मास्टर स्ट्रोक खेलकर एक तीर से कई निशाने साध लिये। जहां एक ओर 18-44 आयुवर्ग के टीकाकरण को लेकर व्याप्त अव्यवस्था के चलते युवाओं में रोष बढ़ रहा था, कई मुख्यमंत्रियों को खुलकर घटिया राजनीति करने का मौका मिल रहा था, टीकों की बर्बादी हो रही थी राजस्थान का उदाहरण तो याद होगा ही, नेताओं के भ्रामक बयानबाजी के चलते लोगों में Vaccine Hesitancy भी थी, इतना ही नहीं वैक्सीन की आड़ में अनेक मौकापरस्त लोग अंधाधुंध कमाई भी कर रहे थे। लोग ही नहीं कई राज्य भी वैक्सीन के नाम पर चंदा उगाही व मदद मांगने में सक्रिय भी हो गए थे। मोदी जी ने भी एक ही वैक्सीन (घोषणा) से सभी दृश्य व अदृश्य महामरियों का इलाज कर दिया और विपक्ष को परोक्ष संदेश भी दे दिया कि टीकाकरण को लेकर भ्रम न फैलाएं व देश की जनता के जीवन के साथ खिलवाड़ न करें।
एक बात गांठ बांधकर मान लीजिए जब भी आपको लगे कि किसी मसले पर मोदी जी बोल नहीं रहे हैं, चुप हैं, खामोशी धारण किए हैं तो मान लीजिए कुछ बड़ा, अनोखा और महत्वपूर्ण कदम उठाने की तैयारी हो रही है। मोदी उन नेताओं में नहीं हैं जो बोलते ज्यादा हैं और काम कम करते हैं। मोदी इसके बिल्कुल उलट काम करते वाले नेता हैं, बतोलेबाज नहीं हैं, बयानवीर नहीं हैं।
टीकाकरण को लेकर केंद्र सरकार WHO  की गाइडलाइन्स की पालना करते हुए सारा काम कर रही थी। तब गैर भाजपा राज्य सरकारों को लगा कि मोदी अकेले काम करते हुए देश को कोरोना से मुक्त कराने में सफल हो गये तो हमारी राजनीति चौपट हो जाएगी। इसी बिन्दु पर सब चट्टे बट्टे एकमत हुए और मांग कर डाली कि सारे फैसले केन्द्र अकेले कैसे ले सकता है? संविधान के संघीय ढांचे में राज्यों की स्वायत्ता तक का सवाल उठाया गया और याद दिलाया गया कि स्वास्थय सेवाएं तो राज्यसूची का मामला है। केंद्र इसमे दखल देकर संविधान की मूल भावना के साथ खिलवाड़ कर रहा है। शायद वे राज्य सरकारें जो यह सब कुछ अपने हाथ में चाह रहीं थी वे समझ रही थी कि यह जिम्मेदारी भी बाकी कामों की तरह कैसे भी निपटा दी जाएगी। टीके के नाम पर  एक बड़ा बजट अपने पास होगा पर जब वास्तविकता सामने आई तो हाथ से तोते उड़ने लग गए। मोदी जी की वर्किंग स्टायल में एक और महत्वपूर्ण कारक यह भी है कि वे काम विकेन्द्रित कर आपको उसकी जिम्मोदारी सौंप भी दें तो एक अभिभावक के नाते लगातार आप पर निगाह रखते हैं ताकि गलत दिशा में जाने पर तत्काल Course Correction  किया जा सके। ताकि जनता तक अपेक्षित काम व उससे होने वाले लाभ अपने निर्धारित समय पर ही परिलक्षित होने लगें।
 मोदी जी के मास्टर स्ट्रोक के ही कारण समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कोरोना का टीका लगवाने का ऐलान किया है। कोरोना टीका को भाजपा की वैक्सीन बताकर इसे ना लगवाने का ऐलान करने वाले अखिलेश यादव के सुर अब बदल गए हैं। अब अखिलेश ने ट्वीट कर कहा कि हम भी टीका लगवाएंगे। उल्लेखनीय है कि सोमवार को ही उनके पिता और सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने कोरोना का टीका लगवाया था। मुलायम सिंह यादव के टीका लगवाने और मोदी जी की घोषणा के बाद अब अखिलेश यादव के पास टीके लगवाने के सिवा कोई चारा ही न था।
उन्होंने  अपनी झेंप मिटाने के उपक्रम में ट्वीट  में लिखा, "जनाक्रोश को देखते हुए आख़िरकार सरकार ने कोरोना के टीके के राजनीतिकरण की जगह ये घोषणा करी कि वो टीके लगवाएगी। हम “भाजपा के टीके” के ख़िलाफ़ थे पर “भारत सरकार के टीके” का स्वागत करते हुए हम भी टीका लगवाएंगे व टीके की कमी से जो लोग लगवा नहीं सके थे,उनसे भी लगवाने की अपील करते हैं।" 
अब देश के जनता ही अखिलेश से पूछ रही है कि पहले ये तो बता दो कि यही टीका पहले बीजेपी का कैसे था। अब ये भारत सरकार का टीका कैसे हो गया? कुछ तो समझदारी होनी चाहिए। कितने समर्थकों ने वैक्सीन पर भ्रम फैलाने से वैक्सीन नहीं लगवाई होगी इसका जिम्मेदार तो वैक्सीन पर भड़काने ‌वाले होंगे।
सोमवार को मुलायम सिंह यादव द्वारा वैक्सीन लगवाने पर कांग्रेस के पेट में दर्द एकाएक बढ़ गया। लखनऊ के कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद बिलबिला कर कहते हैं कि भाजपाई वैक्सीन और समाजवाद के गठबंधन पर बधाई। 
अखिलेश के इस एलान के बाद सोशल मीडिया पर एकाएक उबाल आ गया। ट्विटर यूजर सनातनी देशभक्त लिखते हैं अखिलेश जी भाजपा का टीका लगवाने का मन बनाकर आपने अपने ऊपर बहुत उपकार किया, अगर आपको कुछ हो जाता तो फिर भाजपा को भला बुरा  कोन बोलता, इसलिए कभी कभी इंसान को अपने स्वास्थ्य पर राजनीति की बजाय अपना दिमाग का भी इस्तेमाल करना चाहिए। गर्वित भारतीय लिखते हैं कि आपके तर्क में कोई दम नहीं है। यह पहले भी भारत सरकार की ही वैक्सीन थी और अब भी वही है, सिर्फ इसपर राजनीति करने वालों का रंग समय समय पर बदला है। अगर इस तरह का गैरजिम्मेदाराना बयान नहीं दिया जाता तो जो लोग आज भी वैक्सीन लेने से घबरा रहे हैं, वो खुशी खुशी वैक्सीन लेकर सुरक्षित हो गए रहते। वाराणसी से रंजीत कुमार सिंह कहते हैं कि जनाक्रोश को देखते हुए आख़िरकार माननीय मुलायम सिंह यादव जी ने टीका लगवा लिया और अखिलेश यादव जी को कहा है कि ज्यादा बकैती मत करो और टीका लगवा लो अफवाह मत फैलाओ।
वरिष्ठ पत्रकार कल्याण कुमार लिखते हैं कि जिंदगी की कीमत राजनीति से बड़ी है। दूसरी लहर की भयावहता से हर कोई डरा हुआ है। ऐसे में अखिलेश जी ने सही फैसला किया है। वे स्वयं ही नहीं अपने सभी कार्यकर्ताओं को भी वैक्सीन लगाने के लिए प्रेरित करें। जीवन है तभी ये लीलाएं हैं। कम से कम इतना तो हुआ कि वैक्सीन से राजनीति हट गई। @Gaursudesh001 लिखते हैं कि गुलाटी खाने में बंदर को भी पछाड़ दिया अपने अखिलेश भैया ने। कल पप्पा ने वैक्सीन लगवा लिया तो इनके भी सुर व ताल बदल गए। सच राजनीति में किसी को भी आप पक्का दुश्मन नहीं मान सकते हैं। मान भी लिया तो ग़लत साबित हो जाओगे

अमन वर्मा लिखते हैं बेटा बीजेपी की वैक्सीन बता वैज्ञानिकों, देश और प्रधानमंत्री का अपमान करता रहा, पर पिता को पता है कि देश के लिए वैक्सीन भी जरूरी है, वैज्ञानिक भी, बीजेपी भी और बीजेपी के पीएम भी।
सुभाष शर्मा लिखते है कि सपाई गूगल कर परेशान हैं, ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी को फ़ोन करके पूछ लिया, विद्वान चचा रामगोपाल भी प्रकाश नहीं डाल पा रहे कि ये BJP की वैक्सीन और भारत सरकार की वैक्सीन के फार्मूले में क्या अंतर है? डार्विनवाद के किस सिद्धांत के तहत कल तक की भाजपाई वैक्सीन आज भारत सरकार की हो गई।
राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार लक्ष्मी प्रसाद पंत @pantlp ने इशारो- इशारों मे ही बड़ा मौजूं सवाल उठाया है कि वैक्सीन तो फ्री हो गई है लेकिन पेचीदा सवाल यह भी है कि राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने वैक्सीन के नाम पर दान दाताओं से डोनेशन और वेतन कटौती से जो धन जुटाया उसका अब क्या होगा..? मोदी जी की घोषणा से राज्यों को सबसे ज्यादा नुकसान इसी बिन्दु पर होना है और यही उनकी चिढ़ की सबसे बड़ी चिंता भी होगी।

सुदेश गौड़

श्री सुदेश गौड़ मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। वे दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, नई दुनिया, राष्ट्रीय सहारा सहित देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। वे नवदुनिया भोपाल के संपादक भी रहे हैं। वर्तमान में वे प्रदेश के अग्रणी न्यूज़ पोर्टल मीडिया वाला के नेशनल हेड हैं।

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