रोंगटे खड़े हो गए यह लिखते हुए कि सरकार को हाईटेक श्मशान घाट बनाने की जरूरत...

रोंगटे खड़े हो गए यह लिखते हुए कि सरकार को हाईटेक श्मशान घाट बनाने की जरूरत...

मीडियावाला.इन।

आजादी के 74 वर्षों में चाहे केन्द्र की मोदी सरकार हो या राज्य की सरकारें, उसमें पश्चिम बंगाल को छोड़कर मानव इतिहास के सबसे भयावह दौर से गुजर रहे है, माना जायेगा। हम यदि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्य की बात करें तो दोनों राज्यों को मिलाकर लगभग 14 करोड़ लोगों की जिन्दगी बचाने के लिए MP के CM शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) को अग्नि परीक्षा के दौर से ही गुजरना पड़ रहा है। दोनों राज्यों में कोरोना संक्रमण की तेज तूफानी रफ्तार ने सरकार को ऐसे संकट में डाल दिया है, जिससे उबर पाना सचमुच में दूभर हो गया है। शिवराज सिंह चौहान और भूपेश बघेल दोनों के पास जनता को कोरोना महामारी के प्रकोप से बचाने की चुनौतियों का पहाड़ खड़ा है। 

हमने छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश दोनों राज्यों में सरकार की विषम परिस्थितियों का जायजा लिया है और जब यह पाया कि मौतों का आंकड़ा सरकार छुपा नहीं रही है बल्कि मौतें रिपोर्ट होने की देरी में भ्रांतियां हैं। जरा सोचिए जिन सरकारों को जनता की जिन्दगी बचाना है, उन्हें कोरोना से हुई मौतों के बाद हिन्दू धर्म पराम्परा के अनुसार अग्नि संस्कार करने के लिए कतार में खड़ा होना पड़ रहा हैं, अग्नि संस्कार के पहले परिवार बमुश्किल अपने उस मृत सदस्य का चेहरा देख ले, बहुत बड़ी बात है। आज तो भोपाल में हुई मौतों के बाद एक-एक शव वाहन में चार-चार शवों का परिवहन सुनकर आँख से अविरल आँसू नहीं रूक रहे हैं। और तो और जब हमें यह लिखना पड़ा है कि सरकार को लाशों के अग्नि संस्कार या दफन के लिए हाईटेक श्मशान  एवं कब्रिस्तान की जरूरत है तो मेरे रोंगटे खड़े हो गए हैं। शिवराज जी हों या भूपेश जी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अधिक से अधिक टेस्टिंग के निर्देश पर जरा गौर कीजिए कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा। सच तो मोदी ने समझ ही लिया है, टेस्टिंग में सरकार ध्यान दे तो कोरोना संक्रमण की रफ्तार को रोका जा सकता है, इसलिए  यदि हम सभी शहरों में 2-3 किलोमीटर के दायरे में भू-खण्ड आरक्षित करके हाईटेक श्मशान की बात कर रहे हैं तो इसकी संवेदना को उस इंसान से पूूछिए जिसका सगा कोरोना की भेंट चढ़ गया है और उसे चिलचिलाती धूप में अग्नि संस्कार के लिए कतार में खड़ा होना पड़ रहा है। जहां तक कब्रिस्तान का मामला है, भोपाल में 700 कब्रिस्तान थे, अब 7 बचे हैं कब्रिस्तानों में बिल्डिरों ने कब्जा कर लिया, कोठियां बना दी और आज दफन के लिये कतार दिखने पर रोंगटे खड़े जरूर होंगे।
 शिवराज जी, भूपेश जी उस इंसान की मनोदशा का अवलोकन करिए जिसने अपने माता-पिता भाई या परिजन को बचाने में सब कुछ लगा दिया, लेकिन कोरोना ने उसे लील लिया है। मेरे तो रोंगटे तब भी आज खड़े हो गए जब दवा की दुकानों में लोग कराह रहे थे, कह रहे थे उसे बचा लो, रेमडीसिविर इंजेक्शन दे दो और तड़प-तड़प कर वह निराश हो गया लेकिन उसे रेमडीसिविर नहीं मिला। तीसरी घटना है राजधानी भोपाल हो या रायपुर कई बड़े अस्पतालों में ऑक्सीजन नहीं है। साहब सप्लाई लॉक डाउन में बाधक है, कैसे बचाएंगे उस मरीज को जिसका ऑक्सीजन स्तर 80 से कम हो गया है। चौथी घटना है और बड़ी से भी बड़ी है कि दोनों राज्य एक-एक लाख बिस्तर अस्पतालों में बढ़ाने की बात कर रहे हैं, अस्पतालों के लिए कोरोना इलाज की फीस तय करके सिटिजन चार्टर बनाने की बात सरकार ने कही, कोई निजी अस्पताल इसे मान नहीं रहा, अवज्ञा की पराकाष्ठा है, अभी भी आरटीपीसीआर टेस्टिंग फीस 700 रुपए की जगह 4000-2000 से कम नहीं, मतलब अवज्ञा की पराकाष्ठा है। मैं इस कॉलम के माध्यम से दोनों सरकारों से विनम्रतापूर्वक चार मुद्दों पर फैसले की अपेक्षा करता हूं, जिसमें पहला यह सरकार लॉकडाउन के साथ-साथ आवश्यक सेवाओं को छोड़कर आम जनता को घर पर ही लॉक रखने की गाइडलाइन जारी करे, फर्क पड़ेगा। दूसरा रेमडीसिविर इंजेक्शन अथवा आवश्यक दवाओं की कालाबाजारी पर रोक लगाएं। तीसरा राज्य भर के निजी अस्पतालों को कोरोना जब तक नहीं गया है, तब तक के लिए अधिग्रहित कर ले तथा चौथा अंतिम सविनय आग्रह है कि हिन्दुओं के लिए मुक्तिधाम जिसे श्मशान घाट कहते हैं, प्रत्येक शहर में निर्माण की प्रक्रिया को तुरंत अपनी योजना में सम्मिलित करे एवं मुसलमानों के लिए हाईटेक कब्रिस्तान व्यवस्था के लिए ठोस कदम उठाए तो दोनों सरकारों का संकट कम होगा। 
हम यदि मध्यप्रदेश में भोपाल, इंदौर, जबलपुर और छिंदवाड़ा की बात करें तो यहां पर हाईटेक श्मशान घाट किसी भी इंसान की अंतिम यात्रा के समय मुख्यमंत्री जी आपकी संवेदना को वह परिवार कभी भी नहीं भूल पाएगा जिसने अपना खोया है।

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विजय कुमार दास

  वरिष्ठ पत्रकार श्री विजय दास राष्ट्रीय हिंदी मेल  समाचार प त्र के  प्रधान सम्पादक है .साथ ही पत्रकारिता के सुदीर्घ अनुभवी श्री दास सेन्ट्रल पत्रकार क्लब के संस्थापक है .