Congress Relies on ‘NOTA’ in Indore : इंदौर में कांग्रेस ‘नोटा’ के भरोसे मैदान में, किसी को समर्थन नहीं!

कांग्रेस अब भाजपा को सबक सिखाने के तरीके ढूंढने में जुटी!

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Congress Relies on ‘NOTA’ in Indore : इंदौर में कांग्रेस ‘नोटा’ के भरोसे मैदान में, किसी को समर्थन नहीं!

 

Indore : इंदौर लोकसभा सीट से कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार अक्षय कांति बम ने अपना नाम वापस ले लिया। फिर वे भाजपा में शामिल हो गए। इस राजनीतिक उथल-पुथल के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने घोषणा की, कि वे इस सीट पर किसी निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन नहीं देंगे। दरअसल, कांग्रेस ‘नोटा’ के भरोसे चुनाव लड़ेगी।

पटवारी ने कहा कि इस घटना ने इंदौर की छवि खराब कर दी। मैं चाहता हूं कि इंदौर के लोग इस पर ध्यान दें। कांग्रेस चुनाव मैदान में किसी भी (गैर-कांग्रेस) उम्मीदवार को अपना समर्थन नहीं देगी, लेकिन पार्टी भाजपा को सबक सिखाने के तरीके ढूंढेगी। अब सवाल यह नहीं है कि ऐसी कौन सी परिस्थितियां थीं कि पार्टी के उम्मीदवार ने पाला बदल लिया, बल्कि सवाल यह है कि भाजपा ने इंदौर की छवि खराब की।

जीतू पटवारी ने कहा कि आप हमारी 10 गलतियां निकाल सकते हैं। हमने ऐसा उम्मीदवार क्यों चुना, क्यों हमें पहले ही पता नहीं चला। ऐसे बहुत से आरोप कांग्रेस और खुद मेरी कार्यशैली पर उठाए जा सकते हैं। लेकिन, भाजपा को सबक तो सिखाना पड़ेगा और ये काम इंदौर की मीडिया, इंदौर की जनता को करना है।

उन्होंने कहा कि इंदौर की जनता के पास ‘नोटा’ का विकल्प है। ‘नोटा’ को चुनकर इंदौर की जनता भाजपा के इस कृत्य का सही जवाब दे सकती है। यह घटना मतपेटी हाईजैक करने जैसा है और इसने इंदौर में लोकतंत्र की हत्या कर यहां की राजनीति को कलंकित किया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि वे रावण की तरह शक्तिशाली हैं, उसके समान अहंकार रखते हैं इसलिए उन्हें सबक सिखाया जाना चाहिए। ऐसे कई तरीके हैं जिनसे इंदौर के लोग भाजपा को सबक सिखा सकते हैं। उन्हें जो भी तरीका उचित लगे, उसका उपयोग करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई उम्मीदवारों ने शिकायत की है कि वे ‘भयभीत’ हैं। उनका नामांकन ‘गलत तरीके से’ वापस ले लिया गया। यहां तक कि हमने 4-5 उम्मीदवारों को आश्रय और सुरक्षा भी दी थी। क्योंकि, भाजपा उन्हें अपना नामांकन वापस लेने के लिए खोज रही थी।

कांग्रेस उम्मीदवार के नाम वापसी के घटनाक्रम के बाद कांग्रेस असहज स्थिति में है। पहले सूरत में भाजपा उम्मीदवार निर्विरोध विजयी घोषित करने की स्थितियां निर्मित की गई अब इंदौर में इस तरह उम्मीदवार के पाला बदलने से कांग्रेस असहज स्थिति में है। अब वह इसे जनता की लड़ाई बताकर लड़ना चाहती है। बशर्ते कि जनता कांग्रेस की को गंभीरता से ले।