अमझेरा में श्रीकृष्ण–रुक्मणि स्थल का नाम बदलने पर विवाद, शोधकर्ताओं के फैसले पर इतिहासकारों और ग्रामीणों में आक्रोश

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अमझेरा में श्रीकृष्ण–रुक्मणि स्थल का नाम बदलने पर विवाद, शोधकर्ताओं के फैसले पर इतिहासकारों और ग्रामीणों में आक्रोश

अमझेरा से गोपाल खंडेलवाल 

अमझेरा (धार): मध्य प्रदेश के धार जिले में अमझेरा स्थित श्रीकृष्ण–रुक्मणि हरण स्थल, माता अमका–झमका तीर्थ के पौराणिक नाम को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। विगत दिनों उज्जैन के कुछ शोधकर्ताओं द्वारा इस स्थल को श्रीकृष्ण–रुक्मणि “वरण “स्थल नाम दिए जाने के बाद नगर के इतिहासकारों और ग्रामीणों ने सोशल मीडिया पर आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि पौराणिक नाम को अचानक बदलना इतिहास से छेड़छाड़ है।

ग्रामीणों का आरोप है कि “हरण” जैसे स्थापित शब्द को “वरण” में बदलना न केवल परंपराओं के विपरीत है, बल्कि इससे द्वापरकाल से जुड़ी मान्यताओं को भी ठेस पहुंचती है। गांव में इस फैसले को लेकर आक्रोश देखा जा रहा है।

*”सोशल मीडिया पर इतिहासकार बोले “*

नगर के इतिहासकारों ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं देते हुए कहा कि श्रीकृष्ण–रुक्मणि **हरण** की कथा शास्त्रों और लोक परंपराओं में स्थापित है। बिना व्यापक शोध, जनसंवाद और इतिहासकारों की सहमति के नाम बदलना उचित नहीं हे। इतिहासकारों से विचार विमर्श किए बिना नाम बदलने का फैसला भी गलत है। इतिहासकार प्रदीप सिंह पवार, नवीन माथुर पंचोली, पंडित सचिन रावल ने ग्रुप पर आपत्ति दर्ज कराते हुए अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है वही नगर जनपद सदस्य प्रतिनिधि शुभम दीक्षित ने कहा कि शोधकर्ताओं को पहले नगर के वरिष्ठजनों समाजजनों से परामर्श लेना चाहिए फिर नाम बदलने का विचार करना था। नगर में आक्रोश बढ़ रहा हे।

ग्रामीणों का कहना है कि नाम परिवर्तन से आस्था पर असर पड़ता है। पहले स्थानीय समाज, संतों और इतिहासकारों से चर्चा होनी चाहिए थी। निर्णय वापस लेने की मांग भी उठने लगी है।

*अब आगे क्या?*

विवाद के बीच मांग उठ रही है कि नामकरण पर निर्णय से पहले विशेषज्ञ समिति बने, जिसमें इतिहासकार, पुरातत्वविद्, स्थानीय प्रतिनिधि और ग्रामीण शामिल हों।