बीजेपी (BJP) की चिंता का अहम चिंतन है कोर बैठक

874

बीजेपी (BJP) की चिंता का अहम चिंतन है कोर बैठक;

मप्र भाजपा (BJP) की कोर कमेटी की बैठक जिस अवस्था में आयोजित नियोजित की गई उसका चिंतन कुछ चिंताओं से भरा नजर आता है|

हालांकि बैठक के बाद कहा गया कि धर्मस्थलों में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर कानूनन रोक लगाई जाएगी और दिखाया भी गया कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने दिल्ली से भोपाल लौटकर तुरतफुरत इस पर कानून बनाने की चिंता भी की।

लेकिन ऐसी महत्वपूर्ण बैठकों में इस तरह के विषय कभी महत्वपूर्ण नहीं होते।

जब बीजेपी (BJP) कोर कमेटी की बैठक दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष के समक्ष की गई हो तब मान लेना चाहिए चिंताएं कुछ भिन्न है और मसले भी गंभीर हैं ।

यह बेमायने है कि शिवराज मंत्रिमंडल में फेरबदल से किया जाना है। कुछ सिंधिया समर्थक मंत्रियों के पास अतिरिक्त विभाग है और मंत्रिमंडल में यह गुंजाइश है कि और लोगों को उपकृत किया जा सके।

हो सकता है आने वाले दिनों में फेरबदल दिखे भी लेकिन इसका मतलब यह नहीं लगाया जाना चाहिए कि कोर कमेटी की बैठक में यही एक बात अहम थी।

दरअसल फेरबदल और लाउडस्पीकर पर नियंत्रण जैसे मसले तो बहाने भर हैं लेकिन जो मामला है, जो नजर आ रहा है वह यह है कि भाजपा (BJP) 2023 के विधानसभा चुनाव और उसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव की गहन तैयारी में जुट गई है।

जिसके पीछे पूर्ण बहुमत के साथ अधिक से अधिक सीटें जीतना है।

यहां यह महत्वपूर्ण है कि 2018 के चुनाव में भाजपा (BJP) कांग्रेस से कुछ सीटें पीछे रह गई थी और उसे बहुमत हासिल नहीं हो पाया था।

लिहाजा शिवराज सिंह को इस्तीफा देना पड़ा और कुछ निर्दलीयों और बसपा के विधायकों के सहारे अंगद का पैर की तरह जमी भाजपा (BJP) को कमलनाथ सत्ता से अनाथ करने में सफल हो गए।

सबको पता है मार्च 2020 में श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने समर्थक विधायकों के साथ कांग्रेस से अलग हुए और बीजेपी (BJP) की सत्ता बनाने में सहायक हुए।

यहां यह गौरतलब है की ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस से टूटकर बाहर नहीं निकलते तो भाजपा (BJP) के लिए सत्ता में लौटना एक स्वप्न बना रहता जो कुछ हुआ वह सिंधिया की देन है उनके ही समर्थन से और सहयोग से आज बीजेपी सत्ता में है।

कोर कमेटी की बैठक में जो चिंताएं की गई होगी उसमें आने वाले दिनों में ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए क्या विशेष हो सकता है इसका चिंतन जरूर किया गया होगा यह इसलिए भी जरूरी है शिवराज सिंह मुख्यमंत्री जरूर है लेकिन आज सरकार सिंधिया की ताकत पर ही बनी हुई है।

इसका मतलब यह कतई नहीं है कि मध्य प्रदेश में बीजेपी (BJP) कमजोर है लेकिन यह जरूर है 2018 के चुनाव में कांग्रेस में बीजेपी (BJP) को बराबर की टक्कर पर ला दिया था भाजपा (BJP) को 109 सीटें मिली और कांग्रेस 114 सीटें हासिल कर उससे आगे निकल गई|

यह हैरतअंगेज था और होना भी चाहिए था लेकिन बीजेपी (BJP) ने 2019 के लोकसभा चुनाव में जिस तरह से फतह हासिल की उस बड़ी विजय के सामने भाजपा (BJP) यह भूल गई कि मध्यप्रदेश में विधान सभा चुनाव परिणाम एक तरह से उसकी हार का संकेत है|

इसका आकलन किया जाना था, बदलाव किया जाना था, तैयारी की जानी चाहिए थी लेकिन तब कुछ भी नहीं हुआ और जब ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस से रूठ कर बाहर निकले और बीजेपी (BJP) में शामिल हुए तब बीजेपी (BJP) ने पुनः सत्ता हासिल कर ली और एक बार फिर शिवराज सिंह चौहान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री चुने गए।

दरअसल चिंतन 2018 की हार के बाद ही की जाना चाहिए था।

लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो इसलिए नहीं हुआ कि उपचुनाव में बीजेपी (BJP) ने वह सुरक्षित अंक प्राप्त कर लिया जिससे सत्ता मजबूती से बनी रहे लेकिन यहां ध्यान देने के लिए यह जरूर है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया जो वर्तमान में केंद्र में नागरिक उड्डयन मंत्री है उनसे तब जरूर कुछ समझौते अंदरूनी तौर पर किए गए होंगे।

उन समझौतों पर 2023 के पहले किस तरह अमल में लाया जाए यह फैसला लेना बीजेपी (BJP) की मजबूरी भी है और जरूरत भी।

मुझे लगता है यही अटके हुए मामले को निष्पादित करने के लिए ही कोर कमेटी की बैठक हुई क्योंकि बीजेपी (BJP) के लिए जरूरी है कि सिंधिया समर्थक जो बीजेपी (BJP) में शामिल हुए हैं उनकी आगे 2023 में कैसी और कितनी भूमिका होगी और जो कुछ होगा, जैसा परिणाम होगा तब किस तरह के राजनीतिक हालात उभर सकते हैं|

इन अवश्यंभावी हालातों पर किस तरह की नीति होना चाहिए यह जरूर कोर कमेटी के सदस्यों के बीच चर्चा का विषय हुए होंगे।मुझे हर बार यह भी लगता है ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्यप्रदेश में लौटेंगे।

कब लौटेंगे चुनाव के पहले या चुनाव के बाद यह आने वाला वक्त बताएगा और यही यही पॉइंट सबसे भारी है।

भाजपा (BJP) की दूसरी सबसे बड़ी चिंता है कि सालों साल तक सत्ता में रहने के बावजूद बीजेपी (BJP) वह आंकड़ा अभी तक हासिल नहीं कर पाई जो 2003 में उमा भारती को मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट कर जीत हासिल की थी तब बीजेपी (BJP) को 230 सीटों में से 173 सीटें सीटें मिली थी|

यह जादुई चमत्कार तब से अभी तक नहीं हुआ है और 2018 वाकई में बीजेपी (BJP) के लिए फजीहत भरा परिणाम लेकर आया जब उसे सिर्फ 109 सीटें मिली और कांग्रेस 57 सीटों से बढ़कर दोगुनी हो गई इसे 114 सीटें मिली गईं।

तब जितने समय भी कमलनाथ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे बीजेपी (BJP) के लिए मुसीबतों का कारक बने रहे ।उन्होंने कम समय में अच्छी चाल से अपनी अच्छी छवि भी निर्मित कर ली थी।

मप्र बीजेपी (BJP) का महागढ़ और राजगढ़ है यहां की राजसत्ता बीजेपी (BJP) कभी खोना नहीं चाहेगी। देश में जो दो-तीन राज्य है उनमें बीजेपी (BJP) को लगता है कि उसका एकछत्र राज् बना रहे और इसी प्रयास में उधेड़बुन करती हुई भाजपा (BJP) तैयारियों में लगी हुई है।

ऐसे में भाजपा (BJP) कि यह मूल चिंता है 173 का वह जादुई आंकड़ा फिर से प्राप्त कर ले जो 2003 में उमा भारती को आगे करने के साथ मिला था।

क्या बीजेपी (BJP) मध्यप्रदेश में 2023 के लिए किसी नए नाम पर विचार कर रही है जिसे मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट किया जा सके, अथवा प्रोजेक्ट किए बिना किस तरह से फिर बड़ी जीत बड़ी जीत हासिल की जा सके यह विचार मंथन एक चिता की तरह बीजेपी के भीतर समाया हुआ है और अब जब 2023 नजदीक आ रहा है साल भर की कवायद भाजपा (BJP) इसी मकसद से करना चाह रही होगी।

तीसरा सबसे महत्वपूर्ण फैसला जो लेना है बीजेपी (BJP) को वह यह है आगे शिवराज सिंह चौहान की क्या भूमिका रहेगी?

दरअसल शिवराज सिंह चौहान ऐतिहासिक मुख्यमंत्री रहे हैं जिनका कार्यकाल अब तक के मुख्यमंत्रियों में सबसे अधिक रहा है।

सच कहा जाए तो एक पीढ़ी गुजर गई और भाजपा किसी नए मुख्यमंत्री को इस बीच प्रोजेक्ट नहीं कर पाई यहां तक कि 2018 के चुनाव में अप्रत्याशित हार के बावजूद बीजेपी नया नेतृत्व नहीं ढूंढ सकी इस बीच भाजपा के भीतर कई बड़े नेता सेवानिवृत्ति की ओर बढ़ गए।

उनके अरमान और अभिलाषा परवान नहीं चढ़ सके क्या यह स्थिति आगे भी जारी रहेगी, तब क्या और भी नेता इसी तरह सेवानिवृत्त हो जाएंगे?

यह विचार बीजेपी जरूर कर रही होगी क्योंकि हो सकता है बीजेपी के भीतर इस बात पर कुछ खनक जरूर पनपती जा रही हो।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के भोपाल दौरे के एक सप्ताह में जिस तरह से तुरंत कोर कमेटी की बैठक दिल्ली में बुलाई यह आगामी तैयारियों के साथ बीते दिनों का रिपोर्ट कार्ड तैयार करना और उस पर चर्चा करना भी है।

कोर कमेटी की बैठक में वीडी शर्मा, नरोत्तम मिश्रा और कैलाश विजयवर्गीय भी थे।

आने वाले दिनों में इनके लिए क्या मौके हैं। और भी जो कुछ है जो तेजी से उभर रहे हैं उनके लिए क्या मौके हैं कोर कमेटी की बैठक का यह भी एक एजेंडा होगा ही।

यही तीन मुद्दे कोर बैठक में आगामी रूपरेखा की नई प्रस्तावना है जिसे पूरा करना बीजेपी की चिंता का अहम चिंतन है।