दरभंगा राज की अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी का निधन: मिथिलांचल में शोक की लहर

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दरभंगा राज की अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी का निधन: मिथिलांचल में शोक की लहर

Darbhanga: बिहार के ऐतिहासिक दरभंगा राज परिवार की महारानी कामसुंदरी देवी का सोमवार को 94 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने दरभंगा स्थित कल्याणी निवास में अंतिम सांस ली। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं और घरेलू उपचार के बीच उनका इलाज जारी था। उनके निधन के साथ ही दरभंगा राज की एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक कड़ी समाप्त हो गई।

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महाराजा कामेश्वर सिंह की तीसरी पत्नी थीं महारानी

-महारानी कामसुंदरी देवी दरभंगा रियासत के अंतिम शासक महाराजा कामेश्वर सिंह की तीसरी पत्नी थीं। महाराजा कामेश्वर सिंह न केवल एक शक्तिशाली जमींदार थे बल्कि वे शिक्षा, समाज सुधार और राष्ट्र सेवा के लिए भी देशभर में जाने जाते थे। उनके निधन के बाद महारानी ने राज परिवार की परंपराओं और सांस्कृतिक उत्तराधिकार को गरिमा के साथ आगे बढ़ाया।

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कल्याणी निवास से निकली अंतिम यात्रा

-महारानी के निधन के बाद कल्याणी निवास में शोक सभा आयोजित की गई। बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, सामाजिक प्रतिनिधि और राज परिवार से जुड़े लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। वातावरण पूरी तरह शोकाकुल रहा और मिथिलांचल में कई स्थानों पर लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

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मधेश्वरनाथ परिसर में हुआ अंतिम संस्कार

-महारानी का अंतिम संस्कार दरभंगा के कामेश्वर नगर स्थित मधेश्वरनाथ परिसर में पारंपरिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। यह वही स्थान है जहां दशकों से दरभंगा राज परिवार के सदस्यों का अंतिम संस्कार होता रहा है। वैदिक मंत्रोच्चार और राजपरंपरा के अनुरूप अंतिम क्रियाएं पूरी की गईं।

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1962 के युद्ध में दरभंगा राज का ऐतिहासिक योगदान

-दरभंगा राज परिवार का नाम भारतीय इतिहास में 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान देश के लिए किए गए अभूतपूर्व योगदान के कारण विशेष रूप से दर्ज है। उस कठिन समय में राज परिवार ने देश की रक्षा के लिए सरकार को लगभग 600 किलो सोना दान किया था। इसके साथ ही अपने तीन निजी विमान और 90 एकड़ भूमि भी सरकार को सौंपी गई थी। इसी भूमि पर आज दरभंगा एयरपोर्ट संचालित है, जो क्षेत्र की कनेक्टिविटी का महत्वपूर्ण केंद्र है।

● शिक्षा और सामाजिक विकास में भी योगदान

-दरभंगा राज परिवार ने शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किए। मिथिला क्षेत्र में कई शैक्षणिक संस्थानों, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक सुविधाओं के विकास में इस राज परिवार की भूमिका ऐतिहासिक रही है। महारानी कामसुंदरी देवी इन सभी परंपराओं की साक्षी और संरक्षक रही हैं।

● मिथिलांचल में शोक का माहौल

-महारानी के निधन को केवल एक राजपरिवार की क्षति नहीं बल्कि मिथिलांचल की सांस्कृतिक विरासत की क्षति के रूप में देखा जा रहा है। आम लोग, बुद्धिजीवी वर्ग और सामाजिक संगठनों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

महारानी कामसुंदरी देवी का जीवन सादगी, परंपरा और ऐतिहासिक चेतना का प्रतीक रहा। उनके निधन के साथ ही दरभंगा राज के एक युग का शांत अंत हो गया।