SP के खिलाफ रोजनामचे में रिपोर्ट: भोपाल देहात पुलिस में अंदरूनी टकराव उजागर

● 14 सितंबर को दर्ज हुआ था मामला, विभागीय कार्रवाई के बाद आया सार्वजनिक चर्चा में

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SP के खिलाफ रोजनामचे में रिपोर्ट: भोपाल देहात पुलिस में अंदरूनी टकराव उजागर

Bhopal: मध्यप्रदेश के भोपाल देहात पुलिस महकमे में एक असामान्य और संवेदनशील घटनाक्रम सामने आया है। सूखीसेवनिया थाने में पदस्थ एक उप निरीक्षक द्वारा अपने ही वरिष्ठ अधिकारी, भोपाल देहात के पुलिस अधीक्षक के खिलाफ थाने के रोजनामचे में गंभीर आरोप दर्ज कराए गए हैं। यह प्रविष्टि 14 सितंबर 2025 की है, जो लंबे समय तक विभागीय रिकॉर्ड तक सीमित रही, लेकिन अब विभागीय स्तर पर चल रही कार्रवाइयों के चलते सार्वजनिक चर्चा में आ गई है। यह मामला पुलिस विभाग के भीतर कार्यसंस्कृति, संवाद और अधिकारों को लेकर गहरे सवाल खड़े कर रहा है।

 

● 14 सितंबर को रोजनामचे में दर्ज हुई थी प्रविष्टि

सूखीसेवनिया थाने में पदस्थ उप निरीक्षक केसी यादव ने 14 सितंबर 2025 को थाने के रोजनामचे में विस्तृत प्रविष्टि दर्ज कराई थी। इस प्रविष्टि में उन्होंने भोपाल देहात के पुलिस अधीक्षक रामशरण प्रजापति पर गाली- गलौज, अपमानजनक व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। रोजनामचा पुलिस थाने का आधिकारिक अभिलेख होता है और उसमें दर्ज की गई हर प्रविष्टि विभागीय रिकॉर्ड का हिस्सा मानी जाती है।

 

● एसपी कार्यालय से जुड़ी बताई गई घटना

रोजनामचे में दर्ज विवरण के अनुसार, यह विवाद आबकारी एक्ट से जुड़े एक प्रकरण की केस डायरी को लेकर उत्पन्न हुआ। उल्लेख है कि एसपी कार्यालय में हुई बैठक के बाद जब उप निरीक्षक ने हाईकोर्ट में प्रस्तुत किए जाने के लिए केस डायरी वापस मांगी, तो इसे लेकर टकराव की स्थिति बनी। प्रविष्टि में एसपी कार्यालय में कथित रूप से किए गए व्यवहार को अपमानजनक और दबावपूर्ण बताया गया है।

 

● मानसिक दबाव और सेवा अवधि का उल्लेख

रोजनामचे की प्रविष्टि और बाद में की गई शिकायतों में उप निरीक्षक ने अपनी लंबी सेवा अवधि का भी उल्लेख किया है। उन्होंने लिखा है कि तीन दशक से अधिक की सेवा में यह पहला अवसर था जब उन्हें इस स्तर के मानसिक दबाव और अपमान का सामना करना पड़ा। दस्तावेजों में यह भी दर्ज है कि यह स्थिति केवल एक दिन की घटना तक सीमित नहीं बताई गई, बल्कि इसे लंबे समय से जारी दबाव के रूप में उल्लेखित किया गया है।

 

● मामला लंबे समय तक विभागीय रिकॉर्ड में दबा रहा

14 सितंबर को रोजनामचे में दर्ज होने के बावजूद यह मामला कई महीनों तक सार्वजनिक नहीं हुआ। इस दौरान न तो कोई आधिकारिक बयान सामने आया और न ही पुलिस महकमे के बाहर इसकी चर्चा हुई। यह पूरा घटनाक्रम विभागीय फाइलों और रिकॉर्ड के भीतर ही सीमित रहा।

 

● विभागीय जांच शुरू होने के बाद बदली स्थिति

बाद के चरण में उप निरीक्षक के खिलाफ दो अलग-अलग मामलों में विभागीय जांच शुरू की गई। इसी के बाद यह मामला पुलिस महकमे के भीतर चर्चा का विषय बना। जांच की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही रोजनामचे की प्रविष्टि और उससे जुड़े आरोपों की जानकारी सामने आने लगी और मामला सार्वजनिक डोमेन तक पहुंच गया।

 

● उच्च अधिकारियों और आयोग तक पहुंची शिकायतें

रोजनामचे में दर्ज आरोपों के साथ-साथ उप निरीक्षक द्वारा मुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक, आईजी भोपाल देहात और मानवाधिकार आयोग को भी लिखित शिकायतें भेजी गईं। इन शिकायतों के संज्ञान में आने के बाद मामला केवल स्थानीय थाना या जिला स्तर तक सीमित न रहकर राज्य स्तर तक पहुंच गया।

 

● रोजनामचा बना विवाद का केंद्रीय दस्तावेज

पुलिस व्यवस्था में रोजनामचा केवल ड्यूटी का विवरण नहीं, बल्कि एक आधिकारिक और कानूनी महत्व का दस्तावेज माना जाता है। किसी उप निरीक्षक द्वारा अपने ही पुलिस अधीक्षक के खिलाफ इस माध्यम से आरोप दर्ज कराना विभागीय स्तर पर असाधारण घटनाक्रम माना जा रहा है। इसी कारण यह मामला सामान्य प्रशासनिक मतभेद से अलग श्रेणी में आ गया है।

 

● अन्य अधिकारियों से जुड़ी बातें भी आईं सामने

शिकायतों में यह भी उल्लेख किया गया है कि केवल एक अधिकारी ही नहीं, बल्कि अन्य कनिष्ठ अधिकारियों पर भी दबाव की स्थिति बताई गई है। दस्तावेजों में महिला अधिकारियों के संदर्भ का भी जिक्र है, हालांकि इन बिंदुओं पर फिलहाल कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है।

 

● पहले भी उठ चुके हैं विभागीय मतभेद के संकेत

भोपाल देहात पुलिस में इससे पहले भी कुछ प्रशासनिक आदेशों और उनके त्वरित निरस्तीकरण को लेकर अंदरूनी असंतोष की चर्चा होती रही है। हालांकि वे मामले औपचारिक स्तर से आगे नहीं बढ़ पाए थे और सार्वजनिक विवाद का रूप नहीं ले सके।

● मौजूदा स्थिति

फिलहाल यह पूरा मामला विभागीय और प्रशासनिक स्तर पर विचाराधीन है। रोजनामचे की प्रविष्टि, उच्च अधिकारियों को भेजी गई शिकायतें और शुरू की गई विभागीय जांचें इस प्रकरण के केंद्र में हैं। आने वाले समय में जांच की दिशा और उस पर होने वाली कार्रवाई पर पूरे पुलिस महकमे की निगाहें टिकी हुई हैं।