संविधान सभा को लेकर डॉ. विकास दिव्यकीर्ति की टिप्पणी से विवाद: सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

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संविधान सभा को लेकर डॉ. विकास दिव्यकीर्ति की टिप्पणी से विवाद: सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

New Delhi: दृष्टि आईएएस के संस्थापक और शिक्षाविद् डॉ. विकास दिव्यकीर्ति एक बार फिर अपने एक व्याख्यान को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में एक कक्षा सत्र के दौरान भारतीय संविधान सभा पर की गई उनकी टिप्पणी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद इसे लेकर राजनीतिक और बौद्धिक हलकों में बहस शुरू हो गई है।

● क्या कहा डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने
क्लासरूम लेक्चर के दौरान संविधान निर्माण की प्रक्रिया पर चर्चा करते हुए डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने कहा कि संविधान सभा में संविधान की ड्राफ्टिंग और वैचारिक दिशा देने में डॉ. भीमराव अंबेडकर की भूमिका केंद्रीय थी। इसी संदर्भ में उन्होंने व्यंग्यात्मक शैली में यह टिप्पणी की कि संविधान सभा में सबसे गहराई से संवैधानिक ज्ञान रखने वाले व्यक्ति डॉ. अंबेडकर ही थे।

उनकी यह टिप्पणी वीडियो क्लिप के रूप में सोशल मीडिया पर प्रसारित हुई, जिसे लेकर यह आरोप लगाया जा रहा है कि उन्होंने संविधान सभा के अन्य सदस्यों की भूमिका को कमतर बताया।

● संविधान सभा की पृष्ठभूमि
भारतीय संविधान सभा का गठन वर्ष 1946 में हुआ था। इसमें कुल 299 सदस्य शामिल थे। संविधान निर्माण की प्रक्रिया लगभग तीन वर्षों तक चली और इस दौरान कई समितियों का गठन किया गया।

डॉ. भीमराव अंबेडकर को प्रारूप समिति का अध्यक्ष बनाया गया था और संविधान के मसौदे को अंतिम रूप देने में उनकी भूमिका निर्णायक रही। इसके साथ ही कई अन्य समितियों और सदस्यों ने भी अलग-अलग विषयों पर योगदान दिया।

● सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
डॉ. विकास दिव्यकीर्ति का यह वीडियो यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है। बड़ी संख्या में लोग इसे देख रहे हैं और इस पर प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

एक वर्ग इसे डॉ. अंबेडकर की विद्वत्ता और योगदान को रेखांकित करने वाली टिप्पणी मान रहा है, जबकि दूसरा वर्ग इसे संविधान सभा के सामूहिक प्रयास को कम करके आंकने वाला बयान बता रहा है।

● इतिहास और संवैधानिक विशेषज्ञों की राय
संविधान विशेषज्ञों और इतिहासकारों का मानना है कि डॉ. अंबेडकर की भूमिका निर्विवाद रूप से केंद्रीय थी, लेकिन संविधान का निर्माण एक सामूहिक प्रक्रिया थी। इसमें विभिन्न विचारधाराओं, अनुभवों और सामाजिक पृष्ठभूमियों वाले सदस्यों ने योगदान दिया।

इसी कारण संविधान को केवल एक व्यक्ति की कृति के रूप में नहीं, बल्कि व्यापक विमर्श और सहमति का दस्तावेज माना जाता है।

● पहले भी विवादों में रहे हैं बयान
यह पहली बार नहीं है जब डॉ. विकास दिव्यकीर्ति के किसी शैक्षणिक वक्तव्य को लेकर विवाद हुआ हो। इससे पहले भी उनके कुछ व्याख्यानों और उदाहरणों को लेकर सोशल मीडिया पर बहस होती रही है।

हालांकि, उनके समर्थकों का कहना है कि वे जटिल विषयों को सरल और प्रभावी ढंग से समझाने के लिए व्यंग्यात्मक शैली का उपयोग करते हैं।

● क्यों बना यह मुद्दा चर्चा का विषय
यह मामला इसलिए चर्चा में आया क्योंकि-
● बयान एक लोकप्रिय शिक्षाविद् द्वारा दिया गया
● वीडियो बड़े पैमाने पर वायरल हुआ
● विषय सीधे भारतीय संविधान और संविधान सभा से जुड़ा है
● और इसमें ऐतिहासिक भूमिका और योगदान को लेकर व्याख्या का प्रश्न जुड़ा हुआ है

● वर्तमान स्थिति
फिलहाल डॉ. विकास दिव्यकीर्ति की ओर से इस टिप्पणी को लेकर कोई औपचारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। विवाद सोशल मीडिया और सार्वजनिक विमर्श तक सीमित है।
यह बहस एक बार फिर इस सवाल को केंद्र में ला रही है कि इतिहास और संविधान जैसे विषयों पर सार्वजनिक मंचों से की गई टिप्पणियों को किस संदर्भ और संतुलन में देखा जाना चाहिए।