
ED–I-PAC मामला: सुप्रीम कोर्ट से ममता सरकार को बड़ा झटका
New Delhi: कोलकाता स्थित राजनीतिक रणनीति कंपनी I-PAC के दफ्तर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई को लेकर उपजे टकराव में सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को बड़ा कानूनी झटका दिया है। शीर्ष अदालत ने राज्य पुलिस द्वारा ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR पर तत्काल रोक लगा दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य के DGP राजीव कुमार और अन्य संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है और I-PAC परिसर की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
● क्या है पूरा मामला
-यह विवाद उस समय सामने आया जब ED ने कोलकाता में I-PAC के कार्यालय और उससे जुड़े ठिकानों पर मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित जांच के तहत छापेमारी की। ED का दावा है कि कार्रवाई के दौरान उसके अधिकारियों के काम में बाधा डाली गई और जांच को प्रभावित करने की कोशिश हुई। इसके बाद राज्य पुलिस ने ED अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली, जिसे केंद्रीय एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
● सुप्रीम कोर्ट का रुख
-सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने माना कि केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिकारियों के खिलाफ इस तरह की एफआईआर से जांच की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। अदालत ने प्रारंभिक तौर पर एफआईआर पर रोक लगाते हुए कहा कि मामले में यथास्थिति बनाए रखना आवश्यक है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि I-PAC कार्यालय और उससे जुड़े स्थानों की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, डिजिटल डाटा और अन्य साक्ष्य सुरक्षित रखे जाएं, ताकि आगे की सुनवाई में तथ्यों की निष्पक्ष जांच हो सके।
● राज्य सरकार से जवाब तलब
-सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और डीजीपी राजीव कुमार से इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत जवाब मांगा है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला केवल एक एफआईआर तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारों, दायित्वों और सीमाओं से जुड़ा हुआ गंभीर संवैधानिक प्रश्न है।
● कानूनी और राजनीतिक मायने
-इस आदेश के बाद यह साफ हो गया है कि सुप्रीम कोर्ट केंद्रीय एजेंसियों के कामकाज में कथित हस्तक्षेप के आरोपों को हल्के में नहीं ले रहा है। वहीं, यह मामला केंद्र और राज्य के बीच पहले से चले आ रहे टकराव को भी नई धार देता है। एक ओर जहां राज्य सरकार कार्रवाई को राजनीतिक प्रेरित बता रही है, वहीं ED का कहना है कि कानून के दायरे में रहकर की गई जांच में बाधा डालना स्वीकार्य नहीं है।
● आगे क्या
-फिलहाल एफआईआर पर रोक लागू रहेगी और सभी पक्षों के जवाब आने के बाद सुप्रीम कोर्ट अगली सुनवाई में यह तय करेगा कि मामले की आगे की जांच किस दिशा में जाएगी। इस फैसले पर न केवल बंगाल की राजनीति, बल्कि देशभर में केंद्रीय जांच एजेंसियों और राज्य सरकारों के संबंधों पर भी गहरी नजर रखी जा रही है।





