मोबाइल की तरह रिचार्ज होगा बिजली का मीटर: बैलेंस खत्म तो बिजली गुल

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मोबाइल की तरह रिचार्ज होगा बिजली का मीटर: बैलेंस खत्म तो बिजली गुल

रायपुर: छत्तीसगढ़ के सरकारी दफ्तरों में अब बिजली का बिल बकाया रखना मुमकिन नहीं होगा। 1 अप्रैल 2026 से प्रदेश के सभी सरकारी कार्यालयों और उपक्रमों में बिजली कंपनी का स्मार्ट मीटर प्रीपेड मोड पर काम करना शुरू कर देगा। इसका सीधा मतलब है कि मोबाइल सिम की तरह पहले मीटर को रिचार्ज कराना होगा, तभी दफ्तरों की लाइट जलेगी; बैलेंस खत्म होते ही बिजली सप्लाई अपने आप बंद हो जाएगी।

इस बड़े बदलाव का सबसे ज्यादा असर उन सरकारी विभागों पर पड़ेगा जिनका बिजली बिल अक्सर लाखों-करोड़ों में बकाया रहता था। बिजली कंपनी (CSPDCL) के लिए यह राहत की खबर है क्योंकि इससे उनका बकाया खत्म होगा और राजस्व में सुधार आएगा। हालांकि, आम जनता के लिए राहत की बात यह है कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल यह व्यवस्था लागू नहीं की गई है।

ऊर्जा विभाग के सचिव और छत्तीसगढ़ पावर वितरण कंपनी के चेयरमैन डॉ. रोहित यादव के अनुसार, विकासखंड स्तर तक के 45,370 सरकारी दफ्तरों में स्मार्ट मीटर लगाने का काम पूरा हो चुका है। पहले चरण में इन्हीं दफ्तरों को प्रीपेड सिस्टम से जोड़ा जा रहा है। निचले स्तर के कुल 1.28 लाख दफ्तरों में से अब तक 71 हजार में ही मीटर लग पाए हैं, जहां शत-प्रतिशत काम पूरा होने के बाद ही यह व्यवस्था शुरू होगी।सरकार ने स्पष्ट किया है कि सरकारी विभागों का पुराना बकाया बिल फिलहाल ‘फ्रीज’ कर दिया गया है। इसकी वसूली के लिए आने वाले समय में अलग रणनीति बनाई जाएगी। वर्तमान में फोकस इस बात पर है कि 1 अप्रैल से नई बिजली की खपत के लिए विभागों को अग्रिम भुगतान (Prepaid) करना अनिवार्य हो जाए।

1 अप्रैल से पहले सभी संबंधित विभागों को अपने बजट में बिजली रिचार्ज के लिए अलग से प्रावधान करने के निर्देश दिए गए हैं। बिजली कंपनी अब उन दफ्तरों की सूची तैयार कर रही है जहां मीटर लगने के बावजूद अभी तक सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन का काम बाकी है।