EOW Action: मृत पार्टनर के उत्तराधिकारियों से धोखाधड़ी कर फर्म से बेदखल करने का मामला: EOW भोपाल ने दर्ज की FIR

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EOW Action: मृत पार्टनर के उत्तराधिकारियों से धोखाधड़ी कर फर्म से बेदखल करने का मामला: EOW भोपाल ने दर्ज की FIR

BHOPAL: भोपाल में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ EOW द्वारा एक गंभीर और सुनियोजित आर्थिक अपराध के प्रकरण में FIR दर्ज की गई है। यह मामला मृत पार्टनर के वैध उत्तराधिकारियों को धोखे से बाहर कर फर्म, भूमि और व्यावसायिक गतिविधियों पर अवैध कब्जा स्थापित करने से संबंधित है। जांच में फर्जी पार्टनरशिप डीड, बैकडेटेड दस्तावेज, कूटरचित स्टांप पेपर और स्टांप शुल्क चोरी जैसे गंभीर तथ्य सामने आए हैं।

 

▪️शिकायत और जांच

▫️यह प्रकरण भोपाल निवासी प्रमिला अग्रवाल द्वारा प्रस्तुत शिकायत के आधार पर जांच में आया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि विनोद अग्रवाल एवं उनकी पत्नी अनीता अग्रवाल ने “Era Infrastructure” नामक फर्म से संबंधित दस्तावेजों में जानबूझकर कूटरचना कर मृत पार्टनर स्वर्गीय विजय अग्रवाल के उत्तराधिकारियों को फर्म से बाहर कर दिया। जांच के दौरान EOW को शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में ठोस दस्तावेजी साक्ष्य प्राप्त हुए।

 

▪️फर्म गठन को लेकर कूटरचना और बैकडेटिंग

▫️जांच में यह तथ्य सामने आया कि वर्ष 2012 में “Era Infrastructure” के नाम से फर्म का गठन दर्शाने के लिए एक पार्टनरशिप डीड का ड्राफ्ट तैयार किया गया था, जिसमें विनोद अग्रवाल की 60 प्रतिशत और स्वर्गीय विजय अग्रवाल की 40 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्शाई गई थी। हालांकि इस डीड पर कभी विधिवत हस्ताक्षर नहीं हुए और यह कानूनी रूप से प्रभावी नहीं रही। वर्ष 2017 में विजय अग्रवाल के निधन के बाद आरोपियों द्वारा 11 अप्रैल 2012 की तिथि दर्शाते हुए एक नई पार्टनरशिप डीड तैयार की गई, जिसमें मृत विजय अग्रवाल के स्थान पर अनीता अग्रवाल को पार्टनर बताया गया।

नोटरीकरण और पंजीयन में गंभीर अनियमितता

EOW जांच में यह स्पष्ट हुआ कि उक्त पार्टनरशिप डीड का नोटरीकरण वास्तविक रूप से 11 अप्रैल 2023 को किया गया, जबकि दस्तावेज पर वर्ष 2012 की तिथि अंकित की गई थी। इसके बाद 25 अक्टूबर 2023 को ई-साइन के माध्यम से इसे रजिस्ट्रार फर्म्स एंड सोसायटीज में पंजीकृत कराया गया। इससे यह प्रमाणित हुआ कि दस्तावेज जानबूझकर बैक डेटेड तैयार किए गए ताकि भूमि क्रय की तिथि से पूर्व फर्म का अस्तित्व दर्शाया जा सके।

 

▪️भूमि क्रय: वैध उत्तराधिकारी दरकिनार

▫️जांच में यह भी पाया गया कि ग्राम सनखेड़ी, तहसील हुजूर, जिला भोपाल स्थित लगभग 1.4 एकड़ भूमि वर्ष 2012 में दो विक्रय पत्रों के माध्यम से क्रय की गई थी। इस भूमि के एक हिस्से का भुगतान स्वर्गीय विजय अग्रवाल के बैंक खाते से किया गया था। इसके बावजूद आरोपियों द्वारा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उक्त भूमि पर ज्वाइंट वेंचर, MOU और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की गईं, जिसमें शिकायतकर्ता एवं अन्य वैध उत्तराधिकारियों की सहमति नहीं ली गई।

 

▪️रीयूज स्टांप पेपर और स्टांप शुल्क चोरी

▫️EOW जांच का एक अत्यंत गंभीर पहलू स्टांप पेपर से जुड़ा पाया गया। जांच में यह सिद्ध हुआ कि जिन स्टांप पेपरों का उपयोग कथित पार्टनरशिप डीड तैयार करने में किया गया, वे पूर्व में किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर भूमि रजिस्ट्री हेतु जारी और उपयोग किए जा चुके थे। ये स्टांप न तो विनोद अग्रवाल और न ही अनीता अग्रवाल के नाम पर जारी किए गए थे। स्टांप विक्रेता के रजिस्टर और बयान से यह भी स्पष्ट हुआ कि इन स्टांपों का पुनः उपयोग किया गया, जो विधि विरुद्ध है और स्टांप शुल्क चोरी की श्रेणी में आता है।

फर्म नाम में भी कूटरचना

जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि कथित पार्टनरशिप डीड में पीछे की ओर “New Era Infrastructure” लिखा पाया गया, जबकि वास्तविक फर्म का नाम “Era Infrastructure” बताया गया। इससे दस्तावेजों में जानबूझकर की गई कूटरचना और धोखाधड़ी की पुष्टि होती है।

▪️किन धाराओं में अपराध दर्ज

▫️उपरोक्त तथ्यों के आधार पर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ EOW भोपाल द्वारा विनोद अग्रवाल, अनीता अग्रवाल तथा अन्य अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी आपराधिक षड्यंत्र, धारा 420 धोखाधड़ी, धारा 467 बहुमूल्य दस्तावेज की कूटरचना, धारा 468 धोखाधड़ी के उद्देश्य से कूटरचना तथा धारा 471 कूटरचित दस्तावेज के उपयोग के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना की जा रही है।