EOW Action: EOW इंदौर में श्री दादाजी इंस्‍टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंस, खण्‍डवा के प्राचार्य एवं संचालक के विरूद्ध FIR दर्ज 

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EOW Action: EOW इंदौर में श्री दादाजी इंस्‍टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंस, खण्‍डवा के प्राचार्य एवं संचालक के विरूद्ध FIR दर्ज 

इंदौर: EOW Action: आर्थिक अपराध और अनुसंधान ब्यूरो (EOW) इंदौर में श्री दादाजी इंस्‍टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंस, खण्‍डवा के प्राचार्य एवं संचालक के विरूद्ध FIR दर्ज की गई है।

EOW से प्राप्त जानकारी के अनुसार

शैक्षणिक सत्र 2012–13 में शासन द्वारा श्री दादाजी इंस्‍टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंस, खण्‍डवा को 5 पाठ्यक्रमों हेतु 250 सीटों की अस्थायी अनुमति दी गई थी। अनुमति की शर्तों के अनुसार प्रवेश पूर्व संबंधित विश्वविद्यालय से संबद्धता लेना आवश्यक था, जिसका पालन नहीं किया गया।

इसके बावजूद संचालक/प्राचार्य डॉ. अनिल धारवाल द्वारा विश्‍वविद्यालय से बिना संबद्धता लिए DMLT पाठ्यक्रम में छात्रों को नियम विरुद्ध प्रवेश दिया गया।

परिणामस्वरूप विद्यार्थियों की परीक्षा एवं परिणाम में अत्यधिक विलंब हुआ, जिससे छात्रों का नुकसान हुआ।

डॉ. अनिल धारवाल द्वारा 33 छात्रों के एक वर्षीय पाठ्यक्रम को द्विवर्षीय दर्शाकर रूपये 1,65,000/- (एक लाख पैंसठ हजार) अधिक छात्रवृत्ति प्राप्त कर शासन को आर्थिक क्षति पहुँचाई गई।

*आरोपी और अपराध का विवरण इस प्रकार है:*

*आरोपी :-* डॉ. अनिल धारवाल पिता स्व. श्री बाबूलाल धारवाल, प्राचार्य/संचालक श्री दादाजी इंस्‍टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंस, खण्‍डवा, निवासी नाकोडा नगर, भण्डारिया रोड खण्डवा, (म.प्र.)

*अपराध :-* श्री दादाजी इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंसेस, खण्डवा के संचालक एवं प्राचार्य डॉ. अनिल धारवाल को वर्ष 2012–13 में म0प्र0 सरकार के आदेश से कुल 5 पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों के लिए 250 सीटों की अस्थायी अनुमति दी गई थी। आदेश के अनुसार किसी भी डिप्लोमा पाठ्यक्रम में प्रवेश देने से पहले संबंधित विश्वविद्यालय से संस्थान की संबद्धता लेना अनिवार्य था, परंतु इस नियम का पालन नहीं किया गया। संबद्धता प्राप्त किए बिना ही DMLT पाठ्यक्रम में छात्रों का प्रवेश किया गया, जिसके कारण छात्रों की परीक्षाएँ बहुत विलंब से हुईं और उनके परिणाम लगभग 12 वर्ष बाद भी घोषित नहीं हो सके।

श्री दादाजी कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेस, खण्डवा के संचालक-प्राचार्य डॉ. अनिल धारवाल द्वारा वर्ष 2012–13 के DMLT पाठ्यक्रम के छात्रों के संबंध में शासन को गलत जानकारी दी गई। एक वर्षीय पाठ्यक्रम की जगह 24 अ.ज.जा. और 9 अ.जा., कुल 33 छात्रों को द्विवर्षीय पाठ्यक्रम में प्रवेश दिखाकर अधिक शुल्क/छात्रवृत्ति स्वीकृत कराई गई। एक वर्षीय के लिए रूपये 3,000 के स्थान पर द्विवर्षीय के लिए रूपये 18,000 प्रति छात्र दिखाकर कुल रूपये 1,65,000 अतिरिक्त राशि प्राप्त कर स्वयं को सदोष लाभ पहुँचाया गया।

EOW की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार आरोपी के विरूद्ध आर्थिक अपराध प्रकोष्‍ठ, इंदौर में धारा 420 भा0द0वि0 का अपराध पंजीबद्ध किया जाकर विवेचना में लिया गया है।

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