Fear of Contaminated Water : प्रशासन और नगर निगम रहें सतर्क, इंदौर जैसी घटना न दोहराई जाए: हिम्मत कोठारी

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Fear of Contaminated Water : प्रशासन और नगर निगम रहें सतर्क, इंदौर जैसी घटना न दोहराई जाए: हिम्मत कोठारी

Ratlam : प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में दूषित पानी पीने की वजह मरने वालों का आंकड़ा 15 तक पंहुच गया हैं और सैकड़ों लोग अस्पताल में उपचाररत हैं इनमें से कई की स्थिति गंभीर बनी हुई हैं। इंदौर नगर निगम की लापरवाही का नतीजा अवाम को भुगतना पड़ रहा हैं और हर कोई अपने अपने स्तर पर बयानबाजी कर रहा हैं इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने तो चौंकाने वाली बात कहकर सब को हैरान कर दिया कि अधिकारी हमारी सुन नहीं रहें हैं।

इसी गंभीर मामले को लेकर मध्य प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री हिम्मत कोठारी ने भी एक बयान जारी कर रतलाम नगर निगम के अधिकारियों को चेतावनी दी हैं कि इंदौर जैसी त्रासदी रतलाम में नहीं दोहराई जाएं, वैसे रतलाम भी दुषित पानी के मामले में अछूता नहीं है शहर की कई कॉलोनियों के रहवासियों द्वारा दूषित जलप्रदाय मामले में कई बार शिकायतें कर चुके हैं यह समस्या अखबारों में भी कई बार प्रकाशित हो चुकी, महापौर प्रहलाद पटेल ने भी इन समस्याओं को लेकर अपनी बातें रखीं लेकिन समस्या ज्यों की त्यों है। इसी गंभीर मामले को लेकर कोठारी ने कहा कि यह पहली बार नहीं हैं जब इस प्रकार की शिकायतें सामने आई हों।

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पूर्व में भी चौमुखीपुल, घास बाजार, खेरातीवास एवं पैलेस रोड जैसे क्षेत्रों से दूषित पानी आपूर्ति की शिकायतें प्राप्त हुई थी। उस समय, मैं स्वयं नागरिकों के साथ नगर निगम कार्यालय पहुंचा था और नगर निगम आयुक्त को शिकायत दर्ज कर तत्काल कार्रवाई का आग्रह किया था।

उन्होंने बताया कि समाचार पत्रों में भी समय-समय पर अनेक क्षेत्रों में दूषित जल आपूर्ति की खबरें प्रकाशित होती रही हैं। यह भी देखने में आया हैं कि जब सीवरेज का पानी पेयजल की लाइन में मिल जाता हैं तब नगर निगम अपनी जिम्मेदारी सीवरेज सिस्टम बनाने वाली कंपनी पर डालकर अपने दायित्वों से बचने का प्रयास करता है, वहीं संबंधित कंपनी भी शिकायतों पर समुचित कार्रवाई नहीं करती।

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कोठारी ने कहा कि इंदौर की इस दुखद घटना से सबक लेते हुए जनहित में पूरे शहर की सीवरेज एवं पेयजल पाइप लाइनों का गहन एवं तकनीकी परीक्षण किया जाना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सकें कि कहीं भी सीवरेज का गंदा पानी पेयजल में तो नहीं मिल रहा है। साथ ही सीवरेज लाइन डालने वाली एजेंसी/कंपनी को तत्काल सुधार के लिए आदेशित किया जाए।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में जांच केवल औपचारिकता तक सीमित न रहे, बल्कि दोषियों की स्पष्ट जिम्मेदारी तय करते हुए उनके विरुद्ध कड़ी की जाए ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और आम नागरिकों का जीवन सुरक्षित रह सकें!