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बाघ के संदिग्ध कंकाल के साथ 5 आरोपी गिरफ्तार, पूछताछ जारी, वन विभाग ने खरीददार बनकर कार्यवाही को दिया अंजाम

अवैध खरीद-फरोख्त की साजिश नाकाम,फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए अंग 

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बाघ के संदिग्ध कंकाल के साथ 5 आरोपी गिरफ्तार, पूछताछ जारी, वन विभाग ने खरीददार बनकर कार्यवाही को दिया अंजाम

गणेश पांडे की रिपोर्ट

भोपाल। बालाघाट वन विभाग ने मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए वन्य प्राणी के संदिग्ध अवयवों की अवैध खरीद-फरोख्त करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं एक आरोपी से पूछताछ जारी है। इन सभी आरोपियों के पास से बाघ के बताए जा रहे कंकाल बरामद हुए हैं।

जानकारी के अनुसार 21 जून को प्राप्त मुखबिर सूचना के आधार पर वन विभाग ने योजनाबद्ध तरीके से विशेष कार्रवाई को अंजाम दिया। विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने खरीददार बनकर आरोपियों से संपर्क किया और सौदेबाजी के दौरान उन्हें रंगे हाथों दबोच लिया। इस कार्रवाई में देवेंद्र मरावी, ओंकार चौधरी, नरेंद्र मर्सकोले, अरुणेंद्र शेखर तिवारी, प्रमोद बंजारी, चंद्रशेखर मरकाम, सूरज नायक एवं अक्षय यादव सहित अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों का विशेष योगदान रहा।

*दो अलग-अलग हड्डियां बरामद*

कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से दो अलग-अलग संदिग्ध हड्डियां, कंकाल बरामद किए गए। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि इनमें से एक बाघ की हड्डी मंडला जिले के बम्हनी बंजर क्षेत्र से लाई गई है, जबकि दूसरे कंकाल की उत्पत्ति की पुष्टि अभी शेष है।

प्रथम दृष्टया दोनों अवयव बाघ के ही प्रतीत हो रहे हैं।वन विभाग ने बरामद अवयवों की वास्तविकता की पुष्टि के लिए उन्हें वैज्ञानिक परीक्षण (फॉरेंसिक जांच) हेतु भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

*इन्हें किया गिरफ्तार*

इस मामले में विभाग ने मंडला जिले के तहसील बिछिया के रामलाल पिता नजरू टेकाम उम्र 52 वर्ष निवासी ग्राम कुरवाही, दशरथ पिता भारत परते उम्र 45 वर्ष निवासी बिछिया, बालाघाट जिले के परसवाड़ा तहसील अंतर्गत हर्राभाट निवासी भीम सिंह पिता समारू परते, ग्राम छपारा निवासी रविन्द्र पिता सुखदेव सोनकुसरे, राजकुमार पिता विष्णुलाल सोनकुसरे को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि देवीदयाल पिता अमृतलाल ढोढरे से पूछताछ जारी है।

वन विभाग द्वारा आरोपियों से गहन पूछताछ कर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि पूरे गिरोह का खुलासा किया जा सके। प्रकरण में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

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