साबूदाना कैसे बनता है और इसे व्रत में क्यों प्रयोग किया जाता है?

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साबूदाना कैसे बनता है और इसे व्रत में क्यों प्रयोग किया जाता है?

साबूदाना एक खाद्य पदार्थ है। यह छोटे-छोटे मोती की तरह सफ़ेद और गोल होते हैं।भारत मे यह कसावा/टेपियोका की जडों से व अन्य अफ्रीकी देशों मे सैगो पाम नामक पेड़ के तने के गूदे से बनता है। सागो, ताड़ की तरह का एक पौधा होता है। ये मूलरूप से पूर्वी अफ़्रीका का पौधा है।

पकने के बाद यह अपादर्शी से हल्का पारदर्शी, नर्म और स्पंजी हो जाता है। जब किसी भी प्रकार का कोई भी व्रत रखते हैं तो सबसे पहले जिसका सेवन व्रत में किया जाता है। उसका नाम साबूदाना है जिसे लोग व्रत के लिए इस्तेमाल करते हैं।भारत में साबूदाने का उत्पादन सबसे पहले तमिलनाडु के सेलम में हुआ था।

लगभग १९४३-४४ में भारत में इसका उत्पादन एक कुटीर उद्योग के रूप में हुआ था। इसमें पहले टैपियाका की जड़ों को कूट कर उसके दूध को छानकर उसे जमने देते थे। फिर उसकी छोटी छोटी गोलियां बनाकर सेंक लेते थे। जब भी व्रत के खाने की बात होती है तो सबसे पहले साबूदाना का नाम आता है।साबूदाने से कई तरह की रेसिपी बनती है और व्रत में इसका काफी इस्तेमाल किया जाता है।

सफेद मोती की तरह दिखने वाला ये साबूदाना स्वाद में भी काफी अच्छा होता है।

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इतना ही नहीं, कई रिपोर्ट्स में दावा भी किया गया है कि यह आपकी सेहत के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। आप ने अधिकतर लोगों को देखा होगा जो साबूदाने का प्रयोग करते हैं। कई ऐसे लोग भी होते है जो सिर्फ साबूदाने का इस्तेमाल व्रत में करते हैं तो वहीं कई लोग ऐसे भी होते है जो साबूदाने का प्रयोग कभी भी कर लेते हैं। क्या आप ने कभी सोचा है कि साबूदाने का इस्तेमाल व्रत के समय क्यों किया जाता है?आखिर इसमें क्या मिलाया जाता है जिसके कारण हमें इसे व्रत में सेवन करना पड़ता है। आज हम आपको बतायेंगे कि साबूदाने का प्रयोग अधिकतर व्रत के लिए ही क्यो प्रयोग किया जाता है?

कैसे बनता है साबूदाना?

कहा जाता है कि सफेद रंग की छोटी-छोटी गोलियों के रुप में दिखने वाला साबूदाना एक पेड़ के जरिए बनाया जाता है ।यह सीधे पेड़ पर नहीं उगता है साबूदाने को लंबी प्रोसेस के बाद तैयार किया जाता है से इसे तैयार करने में काफी लंबा समय लगता है।यह सागो पाम नाम के एक पेड़ से बनाया जाता है। सागो दक्षिण भारत में काफी होता है और वैसे ये पौधा अफ्रीका का होता है। इसे बनाने के लिए इस सागो पौधे के तने के बीच के हिस्से यानी गुदे को निकाल लिया जाता है। यह एक तरह का ‘टैपिओका रूट’ होता है, जिसे कसावा भी कहा जाता है और इसी से साबूदाना बनता है। जिसका प्रयोग व्रत के लिए किया जाता है।