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बेहतर यही है कि सब जिम्मेदारों के मन में यह भाव पैदा हो जाए कि जहां भी व्यवस्था में कमी यानि कश्ती में छेद दिख रहा है, उसे बिना देर किए भर दिया जाए। सिर्फ इसका इंतजार न हो कि सरकार कहें तब ही नजरें इनायत हों। मामला चाहे स्वास्थ्य का हो, कानून व्यवस्था का हो, शिक्षा का हो या सड़क, बिजली और पानी का हो। यदि ऐसा हुआ तो सब छोटे-छोटे छेद रिपेयर हो जाएंगे। सारे छेद भर जाएंगे, तो मध्यप्रदेश मालामाल भी हो जाएगा और सुरक्षित भी…।