
Indore Municipal Budget: बजट बढ़ता गया, समस्याएं जस की तस? जानिए विकास के दावों की जमीनी हकीकत
वरिष्ठ पत्रकार के के झा की विशेष रिपोर्ट
इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहरों में अग्रणी इंदौर में हर साल बजट का आकार बढ़ रहा है, योजनाएं भी बड़ी बन रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर समस्याएं अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई हैं। नगर निगम का 8,453 करोड़ रुपये का नया बजट एक बार फिर विकास के बड़े दावे करता है, मगर पिछले वर्षों के वादों का आकलन कई सवाल खड़े करता है।

*ग्राउंड रिपोर्ट: क्या कहते हैं हालात*
*पानी—सबसे बड़ा मुद्दा अब भी कायम*
शहर में नर्मदा जल आपूर्ति के बावजूद कई इलाकों में गंदे पानी और कम प्रेशर की शिकायतें सामने आती रही हैं। हाल ही में भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी का मामला सामने आया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि पाइपलाइन और मॉनिटरिंग सिस्टम में अभी भी खामियां मौजूद हैं।
*सड़कें—हर बारिश में खुलती पोल*
मास्टर प्लान की सड़कों को समय पर पूरा करने का दावा हर साल दोहराया जाता है, लेकिन हकीकत में कई सड़कें अधूरी हैं या कुछ ही महीनों में खराब हो जाती हैं। बारिश के दौरान गड्ढे और जलभराव की समस्या आम हो जाती है।
*सीवरेज—विस्तार के दावे, समस्या बरकरार*
सीवरेज नेटवर्क के विस्तार पर करोड़ों खर्च होने के बावजूद कई इलाकों में ओवरफ्लो और ड्रेनेज की समस्या लगातार बनी हुई है, जिससे नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

*डेटा क्या कहता है?*
बजट 5 साल में ~7,500 करोड़ से बढ़कर 8,453 करोड़
* हर साल इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस
* इसके बावजूद ग्राउंड इम्पैक्ट सीमित नजर आता है
*–जनता की आवाज*
“पानी की समस्या हर साल सुनते हैं कि खत्म होगी, लेकिन हालात वैसे ही हैं।”
— स्थानीय निवासी
“सड़कें बनती हैं, लेकिन कुछ ही समय में खराब हो जाती हैं, निगरानी की कमी है।”
— वाहन चालक
*प्रशासन का पक्ष*
महापौर पुष्यमित्र भार्गव का कहना है कि नया बजट शहर को भविष्य के लिए तैयार करने वाला है और जल, सड़क व इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष ध्यान दिया गया है।
*बड़ा सवाल*
क्या हर साल बढ़ता बजट शहर की मूल समस्याओं का स्थायी समाधान दे पाएगा, या यह सिर्फ कागजी योजनाओं तक सीमित रह जाएगा?
“इंदौर में विकास की रफ्तार को लेकर दावे मजबूत हैं, लेकिन अब जनता को इंतजार है—जमीन पर बदलाव कब नजर आएगा।”





