Indore News: भागीरथपुरा जल त्रासदी पर हाईकोर्ट सख्त: न्यायिक जांच के आदेश

जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अगुवाई में जांच आयोग गठित

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Indore News: भागीरथपुरा जल त्रासदी पर हाईकोर्ट सख्त: न्यायिक जांच के आदेश

के के झा

इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर बेंच के मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से होने वाली मौतों और बीमारियों की गंभीर स्थिति की स्वतंत्र जांच के लिये एक न्यायिक आयोग गठित करने का आदेश दिया है। अदालत ने आयोग के रूप में हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता को नियुक्त किया है, जो इस संकट से जुड़े सभी पहलुओं की गहन समीक्षा करेंगे।

 

*न्यायिक जांच के मुख्य बिंदु:*

न्यायिक आयोग एकल सदस्यीय होगा और इसका नेतृत्व पूर्व जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता करेंगे, जिन्हें दूषित पानी के स्रोत, इसका स्वास्थ्य पर प्रभाव और इंदौर के अन्य हिस्सों पर पड़ने वाले असर सहित मामलों की स्वतंत्र जांच के लिये नियुक्त किया गया है। अदालत ने आयोग को कार्यवाही शुरू होने की तारीख से चार हफ्तों के भीतर एक अन्तरिम रिपोर्ट पेश करने का निर्देश भी दिया है।

आयोग को दीवानी अदालत की शक्तियाँ दी गई हैं, जिससे वह अधिकारियों और गवाहों को तलब कर सकता है, सरकारी विभागों और निकायों से दस्तावेज़ प्राप्त कर सकता है, तथा पानी की गुणवत्ता की जांच कराने के आदेश दे सकता है। यह जिम्मेदार अधिकारियों/कर्मचारियों की पहचान और लोगों को मुआवजा निर्देश देने के लिये सुझाव भी दे सकेगा।

सुनवाई के दौरान सरकारी रिपोर्ट पेश की गयी, जिसमें दावा किया गया कि भागीरथपुरा में कुल 23 मौतों में से लगभग 16 मौतें दूषित पानी के कारण फैलने वाली उल्टी-दस्त बीमारी से जुड़ी हो सकती हैं, हालांकि याचिकाकर्ताओं और स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मृतकों की संख्या इससे अधिक है। अदालत ने गवर्नमेंट की रिपोर्ट में ‘वर्बल ऑटोप्सी’ शब्द के उपयोग पर भी सवाल उठाये।

याचिकाकर्ता रितेश ईनानी, जो इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं, ने मामले को लेकर उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दायर की थी और सुरक्षित पेयजल, मुफ्त इलाज व निष्पक्ष जांच की मांग की थी।

 

*पृष्ठभूमि:*

भागीरथपुरा में दूषित पेयजल के कारण हुई बीमारी और मौतों का संकट दिसंबर 2025 के अन्त से शुरू हुआ था, जब पानी की आपूर्ति में सीवेज के मिश्रण और ई-कोलाई सहित अन्य बैक्टीरिया पाए जाने की रिपोर्टें आईं। इससे यहाँ सैकड़ों लोग बीमार पड़े और कई लोगों की मौत हुई, जिससे प्रशासन, स्वास्थ्य अधिकारियों और उच्च न्यायालय की निगरानी में यह मामला एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दा बन गया है।

*न्यायिक जांच का महत्व:*

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि स्वतंत्र एवं विश्वसनीय जांच ही इस घटना के कारणों, जिम्मेदार पक्षों और भविष्य में ऐसे संकटों से बचने के उपायों की समीक्षा कर सकती है। इससे प्रभावित नागरिकों को न्याय और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।