मानव के सर्वकल्याण के सन्दर्भ में देश की विविधता संदर्भ को समझना जरूरी – पूर्व कुलपति प्रो. रजनीश शुक्ला

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मानव के सर्वकल्याण के सन्दर्भ में देश की विविधता संदर्भ को समझना जरूरी – पूर्व कुलपति प्रो. रजनीश शुक्ला

पुरुषार्थ ओर धर्म अर्थ काम और मोक्ष वैज्ञानिक व्यवस्था है – अमेरिकन विद्वान प्रो. एलेक्स हैंकी

प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस मंदसौर तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का हुआ शुभारंभ

मंदसौर से वरिष्ठ पत्रकार डॉ घनश्याम बटवाल की रिपोर्ट

मन्दसौर : प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, एवं जिले के लीड कॉलेज मंदसौर में तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का गुरुवार को समारोहपूर्वक शुभारम्भ हुआ ।
प्रथम दिवस की शुरुआत अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के पूजन एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई। शंखनाद के साथ से स्वस्तिवाचन से हुआ । महाविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा संगीतमय सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई ।

आरम्भ में महाविद्यालय प्राचार्य प्रो. जे. एस. दुबे ने अतिथि परिचय के साथ अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के विषय प्रवर्तन सहित अन्य जानकारी दी ।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद विभाग संगठन मंत्री श्री विनोद सिरोही द्वारा विकसित भारत के लिए युवाओं को स्टार्टअप के बारे में जानकारी दी एवं युवाओं को अच्छी शिक्षा के साथ राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर की अकादमिक संगोष्ठी माध्यम से महाविद्यालय प्रबंधन के प्रयासों की सराहना की , ज्ञातव्य है कि गत दिनों महाविद्यालय प्रबंधन द्वारा मंदसौर मंथन कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें सभी वर्गों के विद्वानों ने शिरकत की थी ।

सेमिनार में विशेष रूप से मंदसौर आए अंतर्राष्ट्रीय विद्वान प्रोफेसर एलेक्स हेन्की एम आई टी बोस्टन अमेरिका द्वारा वैदिक संस्कृति एवं वसुधैव कुटुम्बकम् के बारे में भारत के दर्शन को रेखांकित करते हुए अपना उद्बोधन प्रस्तुत किया। पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को वैज्ञानिक व्यवस्था बताया।
विकसित भारत के दर्शन को बताते हुए आपने केंद्रीय बजट 2026 का भी उल्लेख किया।
प्रो . एलेक्स हैंकी ने भारत के अष्टांग योग के बारे में उल्लेख करते हुए बताया कि योग के माध्यम से सम्पूर्ण शरीर आनंदित महसूस करता है। निरोगी जीवन का अहम आधार है ।

दर्शनशास्र के विद्वान प्रोफेसर रजनीश शुक्ल पूर्व वाइस चांसलर महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा ने कहा कि विकसित भारत को भारत बोध के बिना नहीं समझा जा सकता। सेमिनार के विषय को रेखांकित करते हुए वेलफेयर स्टेट के स्थान पर भारत की विविधता के संदर्भ में समझना जरूरी हो जाती है। विकसित भारत को हिंद स्वराज्य के रूप में देखा जाना चाहिए। विकसित भारत 2047 को विश्व के अन्य राष्ट्रों के विकास के संदर्भ में नहीं समझा जा सकता । बल्कि मनुष्य के सर्व कल्याण के संदर्भ में ही समझा जा सकता है।

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प्रकाशित शोध स्मारिका का अतिथियों द्वारा विमोचन किया गया।मंच संचालन डॉ. वीणा सिंह ने किया तथा आभार डॉ ललिता लोधा ने माना

उद्घाटन सत्र में अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के प्रथम टेक्निकल सेशन में सेशन के चेयर पर्सन प्रो. हेंकी थे जिसमें डॉ. आदित्य गुप्ता एवं प्रो. एस. पी . पंवार ने अपने वक्तव्य प्रस्तुत किए।

दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. आदित्य गुप्ता ने चेतना के दर्शन पर अपना वक्तव्य करते हुए “सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:” की भावना को विकसित भारत से जोडक़र वसुधैव कुटुम्बकम् को भारतीय दर्शन का आधार बताया ।
द्वितीय स्पीकर प्रो.पंवार ने भारतीय अर्थशास्त्र के कृषि के संबंध में चर्चा कर भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषिक्षेत्र की समस्याओं के बारे में जानकारी देकर मनरेगा, किसान सम्मान निधि ,सहित विभिन्न योजनाओं के प्रभाव बारे में रोचक जानकारी प्रदान की ।

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द्वितीय टेक्निकल सत्र अध्यक्षता डॉ. आदित्य गुप्ता दिल्ली यूनिवर्सिटी ने की प्रथम वक्ता के रूप मै डॉ. शैलेंद्र सिंह इलाहाबाद यूनिवर्सिटी ने वसुधैव कुटुम्बकम् की वैश्विक समरसता की एक सकारात्मक दृष्टि पर अपने विचार प्रस्तुत किए। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के विजन 2020 को रेखांकित करते हुए वर्तमान के विकसित भारत 2047 पर विचार व्यक्त किए। ग्लोबलाइजेशन को वसुधैव कुटुम्बकम् समझना गलत है क्योंकि ग्लोबलाइजेशन आर्थिक आधार पर टिका हुआ।

द्वितीय वक्ता के रूप में डॉ सिंधु पोडियाल त्रिपुरा यूनिवर्सिटी ने अपने वक्तव्य में डिकॉलोनाइजेशन का अर्थ केवल किसी विदेशी शक्ति के राजनीतिक शासन को समाप्त करना नहीं बल्कि उन सभी मानसिक सांस्कृतिक और आर्थिक ढांचों को जड़ से उखाड़ना है जो उपनिवेशवाद में पीछे छोड़े हैं। इसके लिए हमें अपने नए नॉर्म्स तय करने होंगे।

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अगले वक्ता के रूप में डॉ.धीरेंद्र राज तिवारी प्रिंसीपल बागेश्वर कॉलेज उत्तराखंड ने उत्पादन एवं उपभोक्ता के मॉडल पर बात की , सभ्यता कैसी होनी चाहिए, प्राणीयों में वासना हो, परिवार पर निर्भरता और लोग कैसे हो जीवन शैली समय एवं पर्यावरण संबंधित बात कहीं, मनुष्य के विचार कैसे हो वसुधैव कुटुम्बकम् से संबंधित बात की।

सभी सत्रों में महाविद्यालय के स्टाफ सदस्यों एवं विद्यार्थियों ने प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओ को शांत किया ।
द्वितीय टेक्निकल सेशन का संचालन डॉ सीमा जैन ने किया एवं आभार डॉ. सचिन शर्मा ने माना।

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अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में विशेष रूप से कलेक्टर श्रीमती अदिति गर्ग , समाजसेवी श्री रविन्द्र प्रताप सिंह बुंदेला , डॉ क्षितिज पुरोहित सहित अन्य वरिष्ठ गणमान्य जनों की उपस्थिति रही ।

टेक्निकल सत्र समापन के बाद सांयकाल में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुआ जिसमें समस्त अतिथियों की गरिमामय उपस्थिति महाविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा संगीतमय मनोहारी प्रस्तुतिया दी गयी।