Jobat Vidhansabha By-Election: दावों और वादों के बीच उपचुनाव जीतने की जुगत!

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झाबुआ से कमलेश नाहर की रिपोर्ट

Jhabua MP: जोबट विधानसभा उपचुनाव की घोषणा के साथ राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ गई है। टिकट के दावेदार पूरे दमखम से अपने अपने आकाओं से टिकट दिलवाने के जतन में जुट गए है। करीब छह महीने पूर्व विधायक कलावती भूरिया की निधन से खाली हुई जोबट विधानसभा को 34 दिन बाद नया विधायक मिल जाएगा। 30 अक्टूबर को वोटिंग होगी और 2 नवंबर को वोटों की गिनती की जाएगी।

जोबट में यह दूसरा उपचुनाव है। इससे पहले यहाँ 1996 में उपचुनाव हुआ था। विधानसभा सीट के उपचुनाव में इस बार कशमकश की स्थिति है। क्योंकि, वर्ष 2018 में हुए चुनाव में भाजपा प्रत्याशी माधोसिंह डावर को सिर्फ 1838 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। हार के इस अंतर को पाटने के लिए भाजपा सत्ता के साकेत व संगठन स्तर पर पूरा जोर लगा रही है।

दोनों पार्टियां करीब 2 माह से इस क्षेत्र में सक्रिय है। पिछले एक पखवाड़े में प्रदेश सरकार के मुखिया सहित 4 मंत्रियों ने पूरे विधानसभा में भ्रमण किया था। जबकि, कांग्रेस भी अपनी सीट को बचाने के लिए जोर लगा रही है। 5 दिन पहले ही आम्बुआ में एक महिला सम्मेलन हुआ था, जिसमें कांग्रेस ने महिलाओं को साधने का प्रयास किया था। 1998 से 2018 के बीच तीन बार कांग्रेस और दो बार भाजपा ने इस सीट पर जीत हासिल की है।

दूसरी बार उपचुनाव
विधानसभा में यह दूसरा उपचुनाव है। इससे पहले वर्ष 1996 में उपचुनाव हुआ था, तब अजमेरसिंह रावत के निधन के बाद यह सीट रिक्त हुई थी। इस उपचुनाव में अजमेरसिंह की बहू सुलोचना बच्चूसिंह कांग्रेस से खड़ी हुई थी। सहानुभूति लहर के बल पर उन्होंने भाजपा के दरियावसिंह को 21059 वोटों से हराया था।

कुल 2,75178 वोटर वाली विधानसभा में दोनों प्रमुख पार्टियों की स्थिति

* कांग्रेस : कांग्रेस पार्टी को उम्मीद पिछले प्रदर्शनों से है। आदिवासी बहुल यह सीट कांग्रेस की परंपरागत सीट रही है। भाजपा को यहाँ सफलता कांग्रेस छोड़कर आये माधोसिंह डावर ने 2003 में दिलाई थी।
पिछले पांच चुनावों को देखें तो कांग्रेस ने तीन चुनाव जीते है। जबकि, भाजपा ने दो। वर्ष 2018 के चुनाव में पार्टी के ही एक कार्यकर्ता ने निर्दलीय खड़े होकर चुनौती दी थी, इससे जीत का अंतर कम हुआ था। इस बार कांग्रेस सभी को साथ लेकर चुनाव लड़ने के मूड में दिखाई दे रही है। टिकट को लेकर दावेदारी लंबे समय से की जा रही है। हालांकि, अब तक स्थिति साफ नहीं हुई है। उधर पार्टी पैनल में सुलोचना रावत का नाम आने की खबर से विरोध के स्वर उठना शुरू हो गए है। जिलाध्यक्ष महेश पटेल ने पहले ही दिन नामांकन फार्म ले लिया है।

* भाजपा : 2018 के चुनाव की लीड को कम करने के लिए भाजपा पिछले दो महीने से क्षेत्र में जोर लगा रही है। अब तक इस विधानसभा क्षेत्र में सीएम, प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश सरकार के कई मंत्री दौरे कर चुके हैं। वे कार्यकर्ताओं को एकजुट करने का प्रयास कर रहे हैं। कोई बागी खड़ा ना हो इसलिए मंत्रियों ने बैठक लेकर कार्यकर्ताओं को समझाइश दी थी। भाजपा ने कार्यकर्ताओं को जीत को ही आगे बढ़ने के अवसर बताया है।

आलीराजपुर के पूर्व विधायक नागरसिंह चौहान अपनी पत्नी अनिता के लिए टिकट की कोशिश कर रहे है। अनिता का मायका जोबट क्षेत्र में है। चौहान भोपाल जाकर पार्टी अध्यक्ष सहित कई वरिष्ठ नेताओं से मिल चुके है। उधर, माधोसिंह डावर चौथी बार पार्टी टिकट के लिए प्रयास कर रहे है।

इन मुद्दों पर वोट
कांग्रेस जहां महंगाई और बेरोजगारी को मुद्दा बना रही है। वहीं प्रदेश में आदिवासियों के साथ हो रही घटनाओं के मामलों को लगातार उठा रही है। इसके साथ ही कमलनाथ सरकार के 15 महीने के कार्यकाल में की गई ऋणमाफी को लेकर भी कांग्रेस ग्रामीणों के पास पहुंचेगी। जबकि, भाजपा केंद्र और प्रदेश सरकार की विकास योजनाओं का बखान कर रही है। इसके अलावा संबल योजना और विकास कार्य के मुद्दे पर चुनाव में उतरेगी। टिकट की स्थिति अभी दोनों ही पार्टियों ने टिकट को लेकर स्थिति साफ नहीं की है। हालांकि दोनों ही पार्टी के बड़े नेता जोबट विधानसभा क्षेत्र में समय से जनसंपर्क कर रहे हैं।

जोबट से रहे विधायक

वर्ष विधायक
■ 1998 सुलोचना रावत (कांग्रेस)
माधोसिंह डावर निर्दलीय
जीत का अंतर 12939

■ 2003 माधोसिंह डावर (भाजपा)
सुलोचना रावत (कांग्रेस)
जीत अंतर 11335

■ 2008 सुलोचना रावत (कांग्रेस) माधोसिंह डावर (भाजपा) जीत अंतर4560

■ 2013 माधोसिंह डावर (भाजपा)
विशाल रावत (कांग्रेस)
जीत अंतर11051
2018 कलावती भूरिया (कांग्रेस)
माधोसिंह डावर (भाजपा) जीत अंतर 1838