

Kissa-A-IAS : IAS Dr Renu Raj: एक मरीज की हालत देखकर सिविल सेवा में आने का विचार आया!
जब कोई अपना प्रोफेशन बदलकर सिविल सेवा में आता है, तो उसके पीछे कोई न कोई कारण जरूर होता है। कुछ ऐसी ही कहानी डॉ रेनू राज की है, जिन्होंने डॉक्टर होने के बाद यूपीएससी दी और फिर सिविल सेवा में आई।
हॉस्पिटल में काम करते हुए रेनू ने गरीबी, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और सामाजिक असमानता जैसे मामलों को करीब से देखा। एक दिन उनकी मुलाकात एक मरीज से हुई, जिसकी हालत देखकर उन्हें लगा कि सिर्फ इलाज से लोगों की स्वास्थ्य समस्याएं हल नहीं होंगी, उसके लिए सामाजिक स्तर पर बदलाव जरूरी है। उन्हें लगा कि प्रशासनिक सेवा में जाकर ही वे बड़े पैमाने पर बदलाव ला सकती हैं। उन्होंने डॉक्टर की नौकरी करते हुए यूपीएससी परीक्षा की तैयारी की और 2014 में पहले ही प्रयास में दूसरी रैंक के साथ यूपीएससी परीक्षा पास की।
अपनी शुरुआती पढ़ाई केरल के कोट्टायम के सेंट टेरेसा हायर सेकेंडरी स्कूल से पूरी की। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद, कोट्टायम के ही सरकारी मेडिकल कॉलेज में मेडिकल की पढ़ाई की। साल 2013 में उन्होंने मेडिकल प्रैक्टिस के साथ-साथ यूपीएससी परीक्षा की तैयारी भी शुरू कर दी। 2014 में रेनू राज यूपीएससी द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा में शामिल हुईं। अपने पहले ही अटेंप्ट में उन्होंने दूसरी रैंक हासिल की। उनकी दोनों बहनें और उनके पति डॉक्टर है। 2015 बैच की आईएएस अधिकारी डॉ रेनू राज युवाओं की प्रेरणा हैं।
सिविल सेवा में 10 साल पूरे होने के बाद भी वे यूपीएससी परीक्षा देने वालों के लिए रोल मॉडल की तरह है। सामान्य परिवार की डॉ रेनू राज ने पहले एमबीबीएस की पढाई की। कुछ समय बतौर डॉक्टर काम किया और फिर यूपीएससी परीक्षा में सफल होकर आईएएस अफसर बन गईं। केरल के कोट्टायम जिले की रहने वाली रेनू का जन्म साधारण परिवार में हुआ। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। लेकिन, माता-पिता ने उनकी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दिया। उनके पिता राजकुमारन नायर बस कंडक्टर के पद से रिटायर हुए और मां लता एक होममेकर हैं। रेनू बचपन से ही मेधावी छात्रा थीं और डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करनी चाहती थीं और इसीलिए उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई की।
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आईएएस अफसर बनने के बाद रेनू राज ने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। उन्होंने हमेशा गरीबों और जरूरतमंदों के लिए काम करने को प्राथमिकता दी। वे केरल सरकार के अनुसूचित जनजाति विकास विभाग की निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। इसके साथ ही वे आदिवासी पुनर्वास और विकास मिशन की विशेष अधिकारी भी हैं। इससे पहले वे अलाप्पुझा, वायनाड और एर्नाकुलम जिलों की कलेक्टर रहीं। अप्रैल 2022 में डॉ. रेनू राज ने आईएएस अधिकारी श्रीराम वेंकटरमण से शादी की, जो केरल मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन में एमडी हैं। इस जोड़े ने अपनी शादी को सादगी से मनाया और अपने प्रियजनों के बीच सभी रस्में पूरी की। श्रीराम वेंकटरमन ने 2012 में यूपीएससी परीक्षा में भी दूसरी रैंक हासिल की थी।