Kissa-A-IAS: Kajal Jawla: कैब में पढ़ाई,9 घंटे की जॉब, पति और पिता के सपोर्ट से ऐसे बनी IAS 

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Kissa-A-IAS: Kajal Jawla: कैब में पढ़ाई,9 घंटे की जॉब, पति और पिता के सपोर्ट से ऐसे बनी IAS  

Kajal Jawla: मध्य प्रदेश कैडर में 2019 बैच की IAS अधिकारी काजल जावला की सफलता की कहानी देश की अन्य महिलाओं के लिए एक प्रेरणा के रूप में सामने है। हालांकि बचपन का सपना डॉक्टर बनने का था लेकिन पिता की इच्छा को सर्वोपरि मानते हुए बेटी काजल ने सिविल सेवा को अपना लक्ष्य बनाया और पूरी ताकत से तैयारी शुरू की।

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लेकिन, यह सफर इतना आसान नहीं था। काजल एक प्राइवेट कंपनी में 9 घंटे की नौकरी करती थी और शादी भी हो चुकी थी। चार बार फेल होने के बाद अंततः पांचवें प्रयास में उन्हें सफलता मिली और अपने पिता के सपने को साकार किया।

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मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मेरठ की रहने वाली काजल ने 2010 में मथुरा के कॉलेज से बीटेक की डिग्री हासिल करने के बाद एक प्रतिष्ठित कंपनी में इंजीनियर के तौर पर काम करना शुरू किया। उनका सालाना पैकेज 23 लाख रुपए का था। काजल का दफ्तर दिल्ली से गुरुग्राम में था। रोज आने-जाने में लगभग 4 घंटे का समय खर्च होता था। उन्होंने इस समय को बर्बाद करने के बजाय इसे अपनी ताकत बनाया।

कैब में पढ़ाई- घर से ऑफिस जाते और आते समय कैब के 4 घंटों का उपयोग वह नोट्स पढ़ने और करंट अफेयर्स अपडेट करने में करती थीं।

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ऑफिस में 9 घंटे की कड़ी मेहनत के बाद भी वे घर आकर पढ़ाई को समय देती थीं।

वीकेंड का सदुपयोग- शनिवार और रविवार को जब लोग आराम करते थे, काजल पूरे दिन किताबों में डूबी रहती थीं।

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इस संघर्षपूर्ण यात्रा में उनके पति ने उनका पूरा साथ दिया। काजल बताती हैं कि उनके पति और पिता उनके सबसे बड़े ‘सपोर्ट सिस्टम’ रहे, जिन्होंने बार-बार फेल होने के बावजूद उन्हें कभी टूटने नहीं दिया।

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अंततः पांचवें प्रयास में काजल को सफलता मिली। काजल ने अपना पहला प्रयास 2012 में, उसके बाद 2014 और फिर शादी के बाद 2016 और 2017 में भी परीक्षा दी लेकिन चारों बार असफलता हाथ लगी लेकिन काजल ने हार नहीं मानी। अंततः 2018 में अपने पांचवें प्रयास में काजल ने ऑल इंडिया रैंक 28 हासिल कर सबको चौंका दिया। जैसे ही परिणाम आया उन्होंने अपनी 23 लाख की मोटी सैलरी वाली नौकरी को बिना सोचे छोड़ दिया और देश सेवा का रास्ता चुना।

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वर्तमान में काजल मध्य प्रदेश में बड़वानी जिले में सीईओ जिला पंचायत है। बड़वानी के कार्यकाल के दौरान वे कुछ दिनों तक प्रभारी कलेक्टर भी रही। इस दौरान उनके कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसले चर्चा में रहे।

विशेष कर सामाजिक समानता से जुड़े एक मामले में निजी स्कूल में आदिवासी बच्चों को अलग बैठाकर पढ़ाने की शिकायत सही पाए जाने पर स्कूल पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।

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पानसेमल सबडिवीजन में एक खाद फैक्ट्री से जहरीले रसायनयुक्त पानी निकलने की शिकायत पर जांच कराई गई। पानी के नमूनों में रासायनिक प्रदूषण मिलने के बाद फैक्ट्री को नोटिस जारी कर केमिकल वेस्ट के उचित निस्तारण के निर्देश दिए गए और पालन नहीं होने पर कंपनी के खिलाफ एफआईआर की गई।

काजल की पूरी कहानी हमें बताती है कि हौसले अगर बुलंद है तो कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।