
Kissa-A-IPS: IPS Dr.GV Sundeep Chakravarthy: श्रीनगर से लेकर दिल्ली तक जिनकी है चर्चा
आजकल कुछ डॉक्टरों के आतंक से जुड़े होने की खबरें सुर्खियों में हैं और यह सवाल उठ रहा है कि जब सफेद कोट पहनने वाले इस कदर गंभीर अपराधों में शामिल पाए जाए तो समाज किस दिशा में जा रहा है? लेकिन इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि इस व्हाइट कॉलर टेरर नेटवर्क का भंडाफोड़ किसी आम पुलिस अधिकारी ने नहीं, बल्कि एक डॉक्टर से पुलिस अफसर बने एसएसपी डॉक्टर जीवी संदीप चक्रवर्ती ने किया। दरअसल, एक साधारण-से दिखने वाले पोस्टर में एक डॉक्टर-कॉप ने वह देखा जो आम लोग नजरअंदाज कर गए।

श्रीनगर में अक्टूबर की एक ठंडी सुबह। नौगाम इलाके की दीवारों पर अचानक जैश ए मोहम्मद के उर्दू पोस्टर दिखाई दिए। यह दृश्य वर्षों बाद लौटी वही दहशत की आहट थी, जिसे देखकर स्थानीय लोग तो सहम गए, लेकिन एक अधिकारी ने उसी क्षण कुछ ऐसा देख लिया, जो बाकी सबकी नजर से चूक गया। यह अधिकारी कोई और नहीं, बल्कि डॉक्टर से IPS बने डॉ. जी. वी. सुंदीप चक्रवर्ती थे। वही शख्स जिनकी नजरें सतह के नीचे छिपे खतरे को पढ़ने की ताकत रखती हैं।
अक्टूबर के मध्य में जब नौगाम इलाके में जैश ए मोहम्मद के पोस्टर लगे, तो देखने में यह एक छोटी घटना लग सकती थी, लेकिन डॉ. चक्रवर्ती ने इसे एक बड़े संकेत के रूप में लिया। उन्होंने तुरंत जांच का आदेश दिया और यही निर्णय बाद में एक विशाल आतंकी मॉड्यूल के खुलासे का कारण बना।

जांच ने तीन संदिग्धों तक पहुंचाया। पूछताछ ने एक धार्मिक व्यक्ति तक रास्ता खोला, और धीरे धीरे यह सामने आया कि यह मॉड्यूल श्रीनगर से निकलकर हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ एक संगठित नेटवर्क था।
*इस ऑपरेशन में:*
• लगभग 2900 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री
• इलेक्ट्रॉनिक डिटोनेटर और बम बनाने के उपकरण
• कई ए के सीरीज राइफलें
• और नागरिक वेश में छिपे कई आतंकी गिरफ्तार किए गए
यह मामला चर्चा में व्हाइट कोट आतंक के नाम से उनकी सूझबूझ के कारण जाना गया, क्योंकि इसमें डॉक्टर, धार्मिक नेता और चरमपंथी विचार वाले लोग शामिल थे जो सामान्य पहचान की आड़ में आतंकी गतिविधियां बढ़ाने की तैयारी कर रहे थे।

तीखे दिमाग, शांत स्वभाव, अद्भुत साहस और करुणा से भरी दृष्टि। डॉ. सुंदीप चक्रवर्ती आज भारतीय पुलिस सेवा में उन अधिकारियों में गिने जाते हैं जिन्होंने सेवा को हर पद पर अपने कर्म से साबित किया है। डॉक्टर रहते हुए भी उनका मकसद जिंदगियां बचाना था, और आज भी वर्दी पहनकर वे वही मिशन नई रणनीति और अलग मोर्चे पर निभा रहे हैं।

*शुरुआती जीवन से सेवा तक की यात्रा*
कुर्नूल, आंध्र प्रदेश में एक साधारण परिवार में जन्मे सुंदीप बचपन से ही मेहनती और संवेदनशील माने जाते थे। उनके पिता सरकारी अस्पताल में मेडिकल ऑफिसर और मां स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत थीं। डॉक्टर बनकर लोगों के लिए कुछ बड़ा करने का सपना उनके भीतर बचपन से था। यही कारण था कि उन्होंने कुर्नूल मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया और लगभग एक वर्ष तक चिकित्सा सेवा भी दी।
लेकिन देश के लिए कुछ और व्यापक करने की चाह उन्हें एक नई दिशा की ओर ले गई। उन्होंने यूपीएससी की कठिन परीक्षा पास की और 2014 बैच के जम्मू कश्मीर कैडर के आईपीएस अधिकारी बने। यहीं से उनकी नई यात्रा शुरू हुई। पहले एएसपी पुंछ, फिर एसडीपीओ उरी और सोपोर, और उसके बाद एसपी बारामुला, कुपवाड़ा, अनंतनाग, कुलगाम और श्रीनगर जैसे सबसे संवेदनशील जिलों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां।
*ऑपरेशन्स और नेतृत्व की पहचान*
डॉ. चक्रवर्ती को ऑपरेशनल इंटेलिजेंस, शांत दिमाग और जोखिम भरी परिस्थितियों में समझदारी भरे निर्णयों के लिए जाना जाता है। श्रीनगर में उनकी तैनाती ने पुलिसिंग की नई ऊर्जा पैदा की। सामुदायिक पुलिसिंग, सटीक खुफिया कार्य और तेजी से कार्रवाई के कारण उनका काम बार बार चर्चा में आया। इससे पहले हैंडवाड़ा और बारामुला में उनके नेतृत्व में कई अहम ऑपरेशन सफल हुए।
उनकी बहादुरी को देखते हुए उन्हें अब तक राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक छह बार मिल चुके हैं। सेना के चीफ कमेंडेशन डिस्क और कई पुलिस वीरता पदक भी उनकी उपलब्धियों की श्रृंखला में शामिल हैं। उनके सहकर्मी कहते हैं कि वे उन अधिकारियों में हैं जो मैदान में सबसे आगे खड़े रहते हैं और ऑपरेशन की हर परत को वैज्ञानिक, तार्किक और शांतपूर्ण दृष्टिकोण से देखते हैं।
*एक संतुलित, मानवीय और जिम्मेदार पुलिस अधिकारी*
डॉ. चक्रवर्ती की सबसे बड़ी ताकत केवल ऑपरेशनल क्षमता नहीं, बल्कि लोगों से जुड़ने की उनकी शैली है। वे अपनी टीम में विश्वास पैदा करते हैं, जनता से संवाद रखते हैं और पुलिस जन संपर्क को मजबूत करने पर जोर देते हैं। उनके नेतृत्व में श्रीनगर में पुलिस प्रशासन की कार्यशैली और जनता का भरोसा दोनों बढ़े।
उनकी मेडिकल पृष्ठभूमि उनके निर्णयों में गंभीरता, वैज्ञानिक सोच और मानवता की भावना जोड़ती है। यही कारण है कि वे डॉक्टर टर्न्ड कमांडर की उस दुर्लभ श्रेणी में आते हैं, जो जीवन बचाने की जिम्मेदारी को हर परिस्थिति में अपने केंद्र में रखते हैं। चाहे वह अस्पताल की आपातकालीन वार्ड हो या आतंक प्रभावित कोई मोर्चा।
डॉ. जी. वी. सुंदीप चक्रवर्ती की कहानी भारत की नई पीढ़ी के लिए एक सशक्त संदेश है। किसी भी पेशे में उत्कृष्टता केवल ज्ञान से नहीं, बल्कि निष्ठा और सेवा भाव से आती है। स्टेथोस्कोप से यूनिफॉर्म तक उनके जीवन का उद्देश्य एक ही रहा: लोगों की रक्षा करना, समाज को सुरक्षित रखना और उन खतरों को खत्म करना जिनसे आम नागरिक अनजान रहते हैं।
वे सिर्फ एक पुलिस अधिकारी नहीं, बल्कि एक ऐसे रक्षक हैं जो अपनी बुद्धिमत्ता, साहस और संवेदनशीलता से हर दिन यह साबित करते हैं कि एक व्यक्ति भी सिस्टम में रहकर कितना बड़ा परिवर्तन ला सकता है। उनका सफर आगे भी प्रेरणा का एक सशक्त स्रोत बना रहेगा।









