प्रेमिल शिव!

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प्रेमिल शिव!

मुकेश नेमा

सती और शिव जैसी प्रेमकथा कोई दूसरी हो सकती है ? शिव ठहरे अनिकेत,रहने को कोई घर नही बनाया उन्होंने अपने लिए।कोई संपत्ति अर्जित नही की।नितांत फक्कड़।परिवार वंश का कोई अता पता नहीं।सती थी कुलीन राजकुमारी और एक बैरागी के प्रेम में पड़ कर उनसे विवाह कर बैठी।स्वाभाविक है उनके पिता अप्रसन्न हुए।दामाद का सार्वजनिक रूप से निरादर किया उन्होंने।सती सह नही सकी ये बात तो पिता के यज्ञ कुंड मे कूद पड़ी,और उनके प्रेम मे आकंठ डूबे,शोकाकुल शिव उनका मृत शरीर लिए पूरे भारत में बारह बरस घूमते रहे।क्या पता किसी योग्य चिकित्सक की तलाश हो उन्हें।सती के शरीर के हिस्से क्रमशः जगह जगह गिरते रहे।जहाँ गिरे वो शक्ति पीठ हुए।सती के साथ शिव खुद ठहर गए इन स्थानों में।ऐसे मे मुझे हमारे ये मंदिर ,अध्यात्म और धर्म के केन्द्र से अधिक प्रेम के प्रतीक मालूम होते हैं।

अचरज लग सकता है बहुतों को कि ईश्वर ऐसे सुध बुध खो बैठे ? अपनी मृत पत्नी के शरीर को खुद से दूर करने को तैयार न हो ? अब ईश्वर यानी वीतरागी।मानवीय संवेदनाओं से परे ,तटस्थ जीव।वो ऐसा कैसे कर सकता है ? पर शिव ने ऐसा किया।और यही बात उन्हें विशिष्ट बनाती है।शिव ने प्रेम की महत्ता स्थापित की।बताया हमें कि वो और सती अलग नही।दोनो को अलग किया जाना संभव नही।शिव अकेले है जो राग और वैराग्य का अद्भुत योग हैं।और इसीलिए वो महादेव हैं।

 

इस संसार में प्रेम सर्वाधिक स्वीकार्य विचार है ,इसीलिए प्रेमपगे शिव सुर असुर ,नर किन्नर ,गंधर्व सबके हैं।आज भी हर लड़की अपने लिए शिव से एकनिष्ठ जीवन साथी की कल्पना करती है,और सती जैसा अगाध प्रेम करने वाली लड़की किस लड़के को नही चाहिए ? ये उद्दात शिखर हैं प्रेम के और इस बात का उदाहरण है कि सारे आदर्श प्रेम के अनुचर हैं।

 

ऐसे प्रेमिल शिव से सती दूर रह कैसे सकती थी ? वो पार्वती होकर वापस लौटीं।और फिर से शिव की जीवन संगिनी हुई।आज ही विवाह हुआ था इस अनुपम प्रेममुग्ध जोड़े का।ज़ाहिर है आज का दिन सचमुच बहुत अच्छा है।