
Man of the Era : पद्मभूषण, लोकसभा पूर्व अध्यक्ष महाजन और पूर्व मंत्री जटिया ने की युग पुरुष के लेखकों की सराहना!
पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी, आडवाणी, पूर्व सीएम पटवा, जोशी से जुड़े रोचक प्रसंग!
कश्मीर समस्या, राफैल डील, भ्रष्टाचार, आपातकाल तक का है सटीक ब्यौरा!
Ratlam : जनसंघ से लेकर भारतीय जनता पार्टी तक की वैचारिक यात्रा, संघर्ष और संगठन निर्माण की गाथा को सहेजने वाली पुस्तक युग पुरुष बाबूजी पर की गई मेहनत वर्तमान समय में असाध्य कार्य समान है। लेखकों ने यह मेहनत बेहद ईमानदारी से की है जो इस पुस्तक में परीलक्षित होता है। यह बात पद्मभूषण, लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष, 8 बार की सांसद रहीं सुमित्रा महाजन तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री, उज्जैन के 7 बार लोकसभा तथा राज्यसभा सांसद रहें
सत्यनारायण जटिया ने कहीं।
पुस्तक के लेखक एवं रतलाम प्रेस क्लब अध्यक्ष मुकेशपुरी गोस्वामी, वरिष्ठ पत्रकार एवं प्रेस क्लब के कोषाध्यक्ष नीरज कुमार शुक्ला तथा पत्रकार अदिति मिश्रा द्वारा पुस्तक भेंट किए जाने पर दोनों वरिष्ठ नेताओं ने इसके लेखन, शोध और प्रस्तुति की मुक्तकंठ से सराहना की। श्रीमती महाजन ने कहा कि पुस्तक की भाषा और संरचना से स्पष्ट झलकता है कि लेखकों ने इस विषय पर गहन अध्ययन और गंभीर परिश्रम किया है।

वहीं जटिया ने कहा कि यह पुस्तक केवल एक व्यक्ति की जीवनी नहीं, बल्कि मालवा अंचल की वैचारिक, सामाजिक और राजनीतिक यात्रा का सजीव दस्तावेज है, जिसमें उस दौर की राजनीति, आमजन के जीवन और समय के साथ आए बदलावों की स्पष्ट झलक मिलती है।
कठिन दौर में संघ की नींव थे बाबूजी युग पुरुष बाबूजी पुस्तक डॉ. लक्ष्मीनारायण पाण्डेय की जीवन यात्रा पर आधारित है, जो जनसंघ के कठिन दौर में मालवा और मध्यभारत में संगठन की रीढ़ बने। वे मंदसौर संसदीय क्षेत्र से आठ बार सांसद और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भी रहें हैं। मध्यप्रदेश गठन के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री को पराजित कर विधायक बनने का ऐतिहासिक कीर्तिमान भी उनके नाम दर्ज है। डॉ. पाण्डेय मालवा में जनसंघ के पहले विजयी हस्ताक्षर माने जाते हैं।
शीर्षस्थ नेताओं के अंदरुनी किस्सों से सजी किताब
इस पुस्तक में 1940 से लेकर 2010 के दशक तक जनसंघ के संघर्षपूर्ण दिनों का तथ्यात्मक वर्णन से लेकर भारतीय जनता पार्टी में बदली परीस्थितियों का सत्य और सटीक वर्णन है। आपातकाल के दौर की परिस्थितियां, 80-90 के दशक में वैचारिक बदलाव, गुटबाजी की सुगबुगाहट, 2000 के बाद भारतीय राजनीति में आए व्यापक परिवर्तनों के साथ देश के शीर्षस्थ राजनेताओं के अंदरुनी और कई रोचक प्रसंग हैं। ठोस संदर्भों, घटनाओं और प्रत्यक्ष अनुभवों के साथ प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मुरलीमनोहर जोशी से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री सुंदर पटवा, कैलाश जोशी समेत दर्जनों राष्ट्रीय नेताओं के रोचक प्रसंगों के साथ सधी हुई शैली में राफैल डील, आयुष बिल, कशमीर समस्या जैसे विषयों पर पुरानी रिपोर्टस तक शामिल हैं।

विमोचन के पल से ही मिल रही सराहना!
कई पाठकों ने समीक्षा में कहा कि लेखकों ने केवल बाबूजी की जीवनी नहीं, बल्कि मालवा की वैचारिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया है। पगडंडी पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक स्थानीय साहित्य, इतिहास को राष्ट्रीय पटल पर प्रस्तुत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इसके पहले पुस्तक का विमोचन मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कर-कमलों से हुआ।
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, कृषि मंत्री एंदल सिंह कंषाना, प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक हेमंत खंडेलवाल, उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, सांसद सुधीर गुप्ता, राज्यसभा सदस्य बंशीलाल गुर्जर, पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सकलेचा, जिला पंचायत अध्यक्ष लाला बाई शंभुलाल चंद्रवंशी, विधायक मथुरालाल डामोर, जिला अध्यक्ष प्रदीप उपाध्याय, पूर्व मंत्री हरदीप सिंह डंग सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि उपस्थित रहें!





