मंत्री का बेटा फरार, पुलिस बेबस: Bombay High Court की सरकार को कड़ी फटकार

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मंत्री का बेटा फरार, पुलिस बेबस: Bombay High Court की सरकार को कड़ी फटकार

Mumbai: बॉम्बे हाई कोर्ट में उस वक्त तीखी टिप्पणी देखने को मिली, जब अदालत के सामने एक मंत्री के फरार बेटे को लेकर पुलिस और राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े हुए। अदालत ने न केवल जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई, बल्कि सीधे तौर पर सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति पर भी प्रश्न खड़े कर दिए।

● कौन हैं भरत गोगावले और क्या है मामला
भरत गोगावले महाराष्ट्र सरकार में मंत्री हैं और शिवसेना शिंदे गुट से जुड़े माने जाते हैं। मामला उनके बेटे विकास गोगावले से जुड़ा है, जो एक आपराधिक प्रकरण में लंबे समय से फरार बताया जा रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार विकास गोगावले के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज है, लेकिन इसके बावजूद उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी।

● हाई कोर्ट में क्यों पहुंचा मामला
यह प्रकरण उस समय हाई कोर्ट के संज्ञान में आया, जब आरोपी की गिरफ्तारी न होने और जांच में ढिलाई को लेकर याचिका दायर की गई। याचिका में आरोप लगाया गया कि प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से जुड़े होने के कारण आरोपी को संरक्षण मिल रहा है और पुलिस जानबूझकर सख्त कदम नहीं उठा रही है।

● न्यायमूर्ति माधव जमदार की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति माधव जमदार ने बेहद कड़े शब्दों में राज्य सरकार को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि क्या राज्य का मुख्यमंत्री इतना बेबस है कि अपने ही मंत्री के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सकता। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि जब मंत्री के बच्चे अपराध करते हैं और खुलेआम घूमते हैं, लेकिन पुलिस उन्हें पकड़ नहीं पाती, तो यह कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

● पुलिस की भूमिका पर सवाल
हाई कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया कि केवल आरोपी का फरार होना ही समस्या नहीं है, बल्कि उससे बड़ी चिंता यह है कि पुलिस उसे पकड़ने में नाकाम क्यों रही। अदालत ने यह जानना चाहा कि क्या सच में गिरफ्तारी के प्रयास किए गए या फिर मामला राजनीतिक दबाव के कारण ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

● सरकार से जवाब-तलब का संकेत
अदालत की टिप्पणी से यह साफ हो गया कि आने वाली सुनवाइयों में सरकार को यह स्पष्ट करना पड़ेगा कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए। साथ ही यह भी बताना होगा कि क्या किसी मंत्री या राजनीतिक व्यक्ति के कारण जांच प्रभावित हुई है।

● कानून सबके लिए बराबर का संदेश
हाई कोर्ट की इस सख्त टिप्पणी को कानून के समान अनुप्रयोग का मजबूत संदेश माना जा रहा है। अदालत ने अप्रत्यक्ष रूप से यह स्पष्ट किया कि राजनीतिक रसूख या पारिवारिक हैसियत के आधार पर किसी को कानून से ऊपर नहीं रखा जा सकता।

● राजनीतिक हलकों में हलचल
इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्ष इसे सरकार की कानून व्यवस्था पर हमला बता रहा है, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष पर मंत्री के बेटे को संरक्षण देने के आरोप और तेज हो गए हैं।
कुल मिलाकर, बॉम्बे हाई कोर्ट की यह टिप्पणी केवल एक आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की जवाबदेही, पुलिस की निष्पक्षता और सरकार की इच्छाशक्ति पर सीधा सवाल खड़ा करती है। आने वाले दिनों में यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिए बड़ी कसौटी बनने वाला है।