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प्रदूषण जांच केन्द्रों के लिए लाइसेंस फीस भी बढ़ा दी गई है। अब पेट्रोल और डीजल के वाहनों की प्रदूषण जांच के लिए अलग-अलग लाइसेंस लेना होगा। प्रत्येक लाइसेंस के लिए दस हजार रुपए अलग-अलग फीस देना होगा। पेट्रोल चलित वाहनों की प्रदूषण जांच हेतु अधिकृत केन्द्र सीएनजी और एलपीजी चलित वाहनों की प्रदूषण की जांच भी कर सकेंगे। एक ही केन्द्र संचालक को पेट्रोल और डीजल के वाहनों की प्रदूषण जांच के लिए भी प्रमाणपत्र अलग-अलग जारी किए जा सकेंगे। लाइसेंस लेने के लिए आवेदक को पैन कार्ड और जीएसटी का पंजीयन प्रमाणपत्र देना होगा। लाइसेंस जारी होंने के पंद्रह दिन के भीतर उन्हें वाहन उत्सर्जन जांच हेतु गैस ऐनेलाईजर, स्मोक मीटर खरीदना होगा। सारे प्रदूषण जांच केन्द्रो को अब आनलाईन ही लाइसेंस जारी किए जाएंगे। आवेदन भी इलेक्ट्रानिक रुप से आनलाईन ही करना होगा।
मोबइल प्रदूषण जांच केन्द्रों पर शिकंजा
मोबाइल प्रदूषण जांच केन्द्रों को जीपीएस के माध्यम से जियो फेंसिंग से जोड़ा जाएगा। वे अपने तय स्थान से एक किलोमीटर के दायरे में ही वाहनों की जांच कर प्रमाणपत्र जारी कर पाएंगे। अभी तक चलित प्रदूषण जांच केन्द्र कहीं से भी किसी भी वाहन की जांच कर PUC जारी कर देते थे इस पर अब रोक लग जाएगी।