MP में हर महीने हो रही है 10 से अधिक तेंदुए की मौते, सड़क हादसे में सबसे अधिक मरे

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MP में हर महीने हो रही है 10 से अधिक तेंदुए की मौते, सड़क हादसे में सबसे अधिक मरे

भोपाल। मप्र में पिछले साल जनवरी के बाद 14 महीनों में कुल 149 तेंदुओं की मौत हुई है। यानि हर महीने 10 तेंदुए की मौत हो रही है। यह भी सच्चाई है कि देश में सबसे अधिक तेंदुए मप्र में ही पाए जाते है।वन्य प्राणी क्षेत्र में कार्य कर रहे एक्टिविस्ट अजय दुबे ने इन आंकड़ों को “चिंताजनक” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि “टाइगर स्टेट” कहलाने वाला मध्य प्रदेश अब तेंदुओं के लिए कब्रगाह बनता जा रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के दिशा-निर्देशों के पालन में कमी और सुरक्षित कॉरिडोर की कमी को इसका बड़ा कारण बताया है।

आरटीआई एक्टिविष्ट अजय दुबे सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत पूछे गए एक सवाल के जवाब में यह जानकारी सामने आई है। इसमें यह भी बताया गया है कि दुर्घटनाओं में सबसे अधिक तेंदुओं की मौतें हुई हैं। दुबे ने कहा कि आंकड़े एक गंभीर वास्तविकता को दर्शाते हैं जबकि वन विभाग ने कहा कि मौतों को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। वन विभाग ने यह भी कहा कि चार प्रतिशत की मृत्यु दर ‘बड़ी बिल्लियों’ के लिए स्वीकृत सीमा के भीतर है। फरवरी 2024 में जारी भारत में तेंदुओं की स्थिति 2022‘ रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश में तेंदुओं की संख्या देश में सबसे अधिक 3,907 है। इसके बाद महाराष्ट्र और कर्नाटक का स्थान है। राज्य में 2018 में 3,421 तेंदुओं के होने की सूचना थी।

*सड़क दुर्घटना से 31 प्रतिशत मौतें*

आरटीआई जवाब में विभाग ने कहा कि जनवरी 2025 से शुरू होने वाले 14 महीनों में मध्यप्रदेश में 149 तेंदुओं की मौत हुई। विभाग के मुताबिक इनमें से 31 प्रतिशत मौतें सड़क दुर्घटनाओं के कारण हुईं और इनमें भी 19 प्रतिश मौतें राजमार्गों पर हुईं।

*14 प्रतिशत मौतों के लिए अवैध शिकार*

24 प्रतिशत मौतें उम्र और बीमारी जैसे प्राकृतिक कारणों से हुई, जबकि 21 प्रतिशत वन्यजीवों के बीच संघर्ष के कारण हुई। लगभग 14 प्रतिशत मौतों के लिए अवैध शिकार और प्रतिशोधी हत्याएं जिम्मेदार थीं। आठ जानवरों को जानबूझकर या गलती से बिजली का झटका लगा था, जबकि दो को जाल में फंसने के कारण मौत हुई है ।

*मध्य प्रदेश तेंदुआ मृत्यु दर चार्ट (14 माह)*

*सड़क व रेल दुर्घटना* 46 यानि 31% मरे, जिसमें सबसे अधिक सिवनी, रायसेन, होशंगाबाद (NH-44 और रातापानी क्षेत्र)।

*प्राकृतिक मृत्यु*

36 यानि 24%। ये मौते कान्हा बांधवगढ़ और पेंच टाइगर रिजर्व में हुई।

*आपसी संघर्ष*

31 मौत, जिसमें बांधवगढ़, पन्ना और उमरिया।

*शिकार और प्रतिशोध*

21 मरे, जिसमें छिंदवाड़ा, सागर और दमोह के वन क्षेत्र।

*अज्ञात / अन्य कारण* 13 मरे। इनमें मुरैना, ग्वालियर और शिवपुरीमें सबसे अधिक

*करंट लगना* 

10 तेंदुए की मौत सिवनी, इंदौर और शहडोल (खेतों के किनारे) हुई।

*जाल / फंदे** 

2 मरे वह भी बांधवगढ़ बफर और उमरिया।

**सड़क दुर्घटना हॉटस्पॉट:*

* सबसे अधिक मौतें, सिवनी और रायसेन जिलों में हुई हैं।एनएच-44 (NH-44) और रातापानी अभयारण्य से गुजरने वाले मार्ग तेंदुओं के लिए “डेथ ट्रैप” साबित हो रहे हैं। * आपसी संघर्ष: बांधवगढ़ जैसे उच्च घनत्व वाले क्षेत्रों में तेंदुओं के बीच क्षेत्र (territory) को लेकर होने वाली लड़ाई मौतों का बड़ा कारण है।* मानव-वन्यजीव संघर्ष: छिंदवाड़ा और इंदौर के आसपास के ग्रामीण इलाकों में बिजली के तारों (करंट) और अवैध शिकार के मामले अधिक देखे गए हैं।

*इनका कहना*

‘‘राज्य में तेंदुए की मृत्यु दर को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। तेंदुए छोटे और फुर्तीले होते हैं , इसलिए हम एक रोडमैप के साथ मृत्यु दर को कम करने की कोशिश कर रहे हैं।’’

*एल कृष्णमूर्ति एपीसीसीएफ वन्य प्राणी*