
Multi-Vehicle Accident in Bengaluru Hoskote: 160 की रफ्तार, नाबालिग हाथों में स्टीयरिंग और सात जिंदगियों का अंत
Bengaluru: बेंगलुरु ग्रामीण का होसकोटे हादसा अब नए सवाल खड़े कर रहा है। बेंगलुरु से सटे बेंगलुरु ग्रामीण जिला के होसकोटे तालुक में दो दिन पहले तड़के सुबह जो कुछ हुआ, उसने रफ्तार के खतरनाक जुनून को लेकर पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। करीब 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही एक लग्जरी एसयूवी ने पहले एक बाइक सवार को कुचला, फिर आगे चल रहे ट्रक में जा घुसी और देखते ही देखते सात जिंदगियां खत्म हो गईं। मरने वालों में छह युवा थे, जिनमें पांच नाबालिग बताए गए हैं।
यह घटना 14 फरवरी की सुबह करीब 4 बजकर 15 से 4 बजकर 30 मिनट के बीच कंबलिपुरा गेट के पास सैटेलाइट टाउन रिंग रोड पर हुई। सड़क लगभग खाली थी, लेकिन रफ्तार बेकाबू थी। अब दो दिन बाद इस मामले में जांच का फोकस केवल हादसे पर नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और कानूनी पहलुओं पर भी आ गया है।

● क्या हुआ उस सुबह
पुलिस जांच के मुताबिक एक Mahindra XUV700 तेज रफ्तार में डोब्बासपेट की ओर बढ़ रही थी। वाहन में छह युवा सवार थे। बताया जा रहा है कि चालक 17 साल का था। निर्धारित स्पीड लिमिट लगभग 100 किमी प्रति घंटा थी, लेकिन एसयूवी 150 से 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही थी।
सबसे पहले गाड़ी ने आगे चल रही एक बाइक को पीछे से जोरदार टक्कर मारी। बाइक सवार गगन की मौके पर ही मौत हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक के पुर्जे सड़क पर दूर तक बिखर गए। इसके बाद एसयूवी अनियंत्रित होकर एक ट्रक से जा भिड़ी। टक्कर से ट्रक का पिछला एक्सल टूटकर अलग हो गया और ट्रक सर्विस रोड की ओर पलट गया। एसयूवी करीब 150 मीटर तक घिसटती चली गई।
कुछ ही मिनट बाद सड़क पर पड़े ट्रक के मलबे से एक अन्य कार टकराई, जिसमें सवार व्यक्ति को हल्की चोटें आईं। उसी ने पुलिस को हादसे की सूचना दी।

● कौन थे मृतक
एसयूवी में सवार छह युवाओं में पांच नाबालिग थे जिनकी उम्र 16 से 17 साल के बीच बताई गई है। एक युवक 26 वर्ष का था। सभी की मौके पर या अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। बाइक सवार गगन भी इस हादसे का शिकार बना। स्थानीय स्तर पर जानकारी सामने आई है कि ये सभी दोस्त देर रात साथ निकले थे और तेज रफ्तार में ड्राइव का रोमांच ले रहे थे। यही रोमांच कुछ ही मिनटों में मातम में बदल गया।

● अब जांच का नया एंगल
दो दिन बाद जांच का फोकस केवल स्पीड पर नहीं है। पुलिस यह भी देख रही है कि नाबालिग के हाथ में इतनी महंगी और ताकतवर एसयूवी कैसे आई। वाहन मालिक की भूमिका, अभिभावकों की जवाबदेही और मोटर वाहन अधिनियम के तहत संभावित धाराएं अब जांच के केंद्र में हैं।
जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के प्रावधानों के तहत नाबालिग द्वारा गंभीर अपराध की स्थिति में अभिभावकों पर भी कार्रवाई संभव है। इस बिंदु पर पुलिस कानूनी राय ले रही है।
इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि वाहन में सेफ्टी फीचर्स जैसे एयरबैग और सीट बेल्ट का इस्तेमाल हुआ या नहीं। शुरुआती संकेत बताते हैं कि इतनी अधिक रफ्तार में टक्कर होने के कारण सेफ्टी सिस्टम भी यात्रियों को नहीं बचा पाए।
● रफ्तार बनाम सुरक्षा
सैटेलाइट टाउन रिंग रोड को हाई स्पीड कॉरिडोर माना जाता है, लेकिन यहां स्पीड लिमिट तय है। विशेषज्ञ मानते हैं कि खाली सड़क अक्सर युवाओं को तेज ड्राइव के लिए उकसाती है। यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि 150 से 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पर वाहन चालक के पास प्रतिक्रिया के लिए मुश्किल से कुछ सेकंड होते हैं।
इस मामले ने सोशल मीडिया पर भी बहस छेड़ दी है कि महंगी और हाई पावर गाड़ियों की पहुंच कम उम्र के युवाओं तक कितनी सुरक्षित है। साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि रात के समय हाईवे पर स्पीड मॉनिटरिंग और पेट्रोलिंग कितनी प्रभावी है।
● आगे क्या
पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और फोरेंसिक जांच के साथ तकनीकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। स्पीड, ब्रेकिंग पैटर्न और टक्कर के एंगल का विश्लेषण किया जा रहा है।
यह हादसा केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि लापरवाही, रोमांच और जिम्मेदारी की कमी की संयुक्त त्रासदी के रूप में सामने आया है। सात परिवारों में पसरा मातम अब इस सवाल के साथ है कि अगर रफ्तार पर लगाम होती, तो क्या ये सात जिंदगियां बच सकती थीं।





