
New Excise Policy: MP में अब E आबकारी व्यवस्था,ETP, E-चालान, E निरीक्षण, 300 मीटर की दुकानें होंगी शिफ्ट
भोपाल: मध्यप्रदेश की नई आबकारी नीति में ई आबकारी को मजबूत बनाया गया है। शराब परिवहन के लिए परमिट भी ईटीपी के जरिए जारी होगा। प्रदेश की सभी 3 हजार 553 दुकानों का आवंटन आरक्षित मूल्य पर ई टेंडर एवं ई टेंडर कम आक्शन के माध्यम से किया जाएगा। ई टेंडर में धरोहर राशि अब ईएमडी के माध्यम से जमा कराना होगा। यह राशि एमपी टेंडर्स पोर्टल पर आनलाईन देना होगा निष्पादन के तीन दिन में जमा करना होगा। राजस्व सुरक्षा के लिए सभी प्रकार की बैंक गारंटियां सिक्योरिटी डिपोजिट भी ई बैंक गारंटी के रुप में स्वीकार होगी।
निरीक्षण के लिए भी ई एप्लीकेशन का उपयोग किया जाएगा। तीन सौ मीटर के दायरे में स्थित तीन सौ से अधिक दुकानों को शिफ्ट किया जाएगा। इस बार तीन नये जिलों को शामिल करते हुए 55 जिलों में ठेके होंगे।
वाणिज्य कर विभाग ने नई आबकारी नीति के नियम-प्रक्रिया जारी कर दी है। इस बार न तो कोई नई दुकान खुलेगी न पुरानी दुकान का नवीनीकरण होगा। सभी दुकाने ई टेंडर के जरिए आवंटित की जाएंगी। सफल टेंडरदाता को संपूर्ण प्रतिभूति राशि की न्यूनतम पचास प्रतिशत राशि ई आबकारी पोर्टल पर ई चालान के माध्यम से निष्पादन के दस दिन के भीतर जमा करना होगा।समय पर प्रतिभूति राशि जमा न करने पर वसूली भू राजस्व के बकाया की भांति की जाएगी। ई बैंक गारंटी और ई चालान के रुप से मिश्रित रुप से भी प्रतिभूति राशि जमा की जा सकेगी।
आबकारी विभाग के कार्यपालिक अधिकारियों द्वारा बारों के निरीक्षण के लिए जीपीएस आधारित मोबाइल एप्लीकेशन की व्यवस्था शुरु की जाएगी। सभी श्रेणी के बार लाइसेंसियों की ई केवायसी कराना अनिवार्य होगा। सभी जगह सुबह साढ़े नौ बजे से रात्रि साढ़े ग्यारह बजे तक शराब की बिक्री की जा सकेगी।
प्रदेश की शराब दुकानों पर पाइंट आफ सेल मशीनें स्थापित कर उनसे बिलिंग एवं बॉटल लेबल तक ट्रेक एंड ट्रेस व्यवस्था लागू की जाएगी। प्रदेश की सभी देशी और विदेशी शराब भंडागारों पर बायोमेट्रिक ई लॉक का उपयोग किया जाएगा। प्रदेश में विदेशी शराब के भांडागारों को स्मार्ट वेयर हाउस में बदला जाएगा। इसके लिए वटीकल स्टेकिंग, फायर रिट्रेडिंग सिस्टम, मोबाइल एप्लीकेशन बेस्ड रिसीप्ट जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। शराब की दुकान मी डिमांड की आटो एप्रूवल व्यवस्था लागू होगी। प्रदाय के लिए पोर्टल पर वेलीडेशन लागू किए जाएंगे।
दस करोड़ तक की दुकान के लिए आरक्षित मूल्य के दो प्रतिशत तक धरोहर राशि होगी। दस करोड़ से अधिक की दुकान पर बीस लाख और आरक्षित मूल्य की दस करोड़ से अधिक राशि के लिए एक प्रतिशत के आगामी पांच लाख तक के गुणांक में ईएमडी देना होगा। इस बार टेंडर में भाग लेने के लिए तीस हजार रुपए प्रति समूह के मान से ई टेंडर फार्म लेना होगा। मदिरा दुकान के लाइसेंसधारक को किसी पक्ष को देय निर्धारित प्रत्याभूत राशि ई आबकारी सायबर ट्रेजरी इंट्रीग्रेशन के माध्यम से ई वालेट में जमा करना होगा। किसी भी समूह की देय राशि पक्षांत तक जमा न किए जाने पर आगामी दिस से ही पोर्टल द्वारा प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। वह समूह पोर्टल पर डिफाल्टर के रुप में प्रदर्शित होगा। जिला आबकारी अधिकारी उस लाइसेंसी को लाइसेंस निरस्तीकरण का नोटिस जारी करेगा।
समय पर वार्षिक लाइसेंस फीस जमा न करने पर शराब दुकान के समूह का आॅफर निरस्त किया जाएगा और धरोहर राशि, आंशिक लायसेंस फीस जप्त की जाएगी। ऐसी दुकानों का पुन: निष्पादन होगा। डिफाल्टर टेंडरदाता, लाइसेंसी को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा और उसे संपूर्ण प्रदेश में निष्पादन के आगामी सभी चरणों, लाइसेंस अवधि में किसी भी प्रकार से भाग लेने की अनुमति नहीं होगी।
कई जिलों में समान और भिन्न समूहों की अनेक शराब दुकाने बहुत ही निकट और पूर्व से संचालित है। अब नवीनीकरण नहीं करने का निर्णय लिया गया है इसलिए पूर्व से संचालित ऐसी सभी शराब दुकाने जो तीन सौ मीटर की परिधि में संचालित है इन्हें निविदा प्रक्रिया से पूर्व समान निकाय में विस्थापित किया जाएगा। इससे लगभग तीन सौ दुकाने दूसरे स्थानों पर शिफ्ट की जाएंगी।
प्रदेश की सभी शराब दुकानों के निष्पादन में इस बार पांच शराब दुकानों तक का ही समूह गठित किया जा सकेगा। रीवा, सतना और छिंदवाड़ा जिलों को विभाजित कर मऊ गंज, मैहर और पांर्ढुना नवीन जिले गठित किए गए है इन जिलों में वर्तमान में पचलित किसी शराब दुकान में शामिल दुकाने यदि एक से अधिक जिले की राजस्व सीमा में आती है तो उन समूहों का नवगठित जिलों की राजस्व सीमा के निर्धारण के अनुरुप पुनर्गठन किया जाएगा। पिछले साल संचालित वार्षिक मूल्य से बीस प्रतिशत इजाफा कर नया आरक्षित मूल्य तय किया जाएगा। ई टेंडर में मिले उच्चतम आफर की राशि उस मदिरा दुकान, समूह का वार्षिक मूल्य होगा।
आबकारी आयुक्त दुकानों के लिए विदेशी शराब और बीयर के ब्रांड की सूची तय कर सकेंगे जिसका स्टाक बिक्री के लिए रखना फुटकर विक्रेता को निवार्य होगा।
कई जिलों में अफसर नहीं- मध्यप्रदेश में उमरिया, गुना, टीकमगढ़, निवाड़ी, सतना, अलीराजपुर में जिला आबकारी अधिकारी नहीं है। पड़ौस के जिलों के अफसरों को इनका प्रभार दिया गया है। इससे ठेके आवंटन की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।





