PM मोदी की चुनावी कमान और अशोक गहलोत की ममता स्टाइल, राजस्थान विधान सभा चुनाव का रोमांच इस बार देखने वाला होंगा

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PM मोदी की चुनावी कमान और अशोक गहलोत की ममता स्टाइल, राजस्थान विधान सभा चुनाव का रोमांच इस बार देखने वाला होंगा

गोपेंद्र नाथ भट्ट की खास रिपोर्ट

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इतिहास में पहली बार सीधे किसी प्रदेश की चुनावी कमान सम्भाल रहें है। खबर हैकि उन्होंने राजस्थान के सभी सांसदों और पार्टी के प्रमुख पदाधिकारियों को आठ अगस्त को राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली बुलाया है। इस बैठक का उद्देश्य राजस्थान के ताज़ा राजनीतिक परिदृश्य का फीडबैक लेना बताया जा रहा है। मीटिंग में राजस्थान के चुनाव सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा की जाएगी। इस बैठक में राजस्थान के चुनाव प्रभारी केन्द्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी, प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह,सह प्रभारी गण और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, भूपेंद्र यादव, अश्विनी वैष्णव,अर्जुनराम मेघवाल और कैलाश चौधरी के साथ प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी,नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, उप नेता प्रतिपक्ष सतीश पूनिया भी शामिल हों सकते हैं।

विश्वस्त सूत्रों के अनुसार सांसदों के साथ होने वाली मीटिंग का जो एजेंड़ा तय किया गया है उसके अनुसार सांसदों के चुनाव क्षेत्र में आने वाली विधानसभा सीटों के बारे में फ़ीड बेक लिया जायेगा। विशेष कर उनके संसदीय क्षेत्र में कहां क्या स्थिति है और अभी क्या राजनीतिक संभावनाएं नजर आ रही हैं? साथ ही आगामी दिसंबर-2023 में होने विधानसभा चुनाव और मई-2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के बारे में की जाने योग्य उपयुक्त राजनीतिक घोषणाओं के बारे में भी चर्चा होंगी। इसके अलावा राजस्थान की कांग्रेस सरकार की नीतियों-योजनाओं, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनके मंत्रियों तथा विधायकों की कमज़ोरियों को उजागर करने के से बिंदुओं पर विचार कर वैचारिक, मौखिक और राजनीतिक आक्रमण की रणनीति भी बनाई जायेंगी।

साथ ही सभी सांसदों को मोदी और केंद्र की भाजपा सरकार की 9 साल की उपलब्धियों को लेकर लोगों के मध्य जाने की जिम्मेदारी के सम्बन्ध में उनके द्वारा अब तक किए गए कार्य का ब्योरा भी लिया जाएगा तथा अपने अपने क्षेत्र में हासिल की गई उपलब्धियों के बारे में भी जानकारी ली जाएगी।

बताया जा रहा है कि इस बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी इस माह के अन्त तक प्रदेश के विधायकों के साथ भी एक साथ या संभागवार बैठके करेंगे। वर्तमान में राजस्थान के संसद में कुल 28 सांसद हैं।इनमें 24 सांसद लोकसभा और 4 सांसद राज्यसभा से हैं।इसी प्रकार विधान सभा में पार्टी के 70 विधायक हैं। गुलाब चंद कटारियाँ को असम का राज्यपाल बनाने से उदयपुर की सीट रिक्त है।

प्रधानमंत्री मोदी राजस्थान में अपना फोकस बढ़ा रहे हैं और अब जब पार्टी में शीर्ष स्तर पर हुए निर्णय के अनुसार चुनाव की सारी कमान उनके हाथ में है तों वे राजस्थान विधानसभा चुनाव को लेकर विशेष रणनीति और प्लानिंग भी कर रहें है। विधान सभा के चुनाव इसी वर्ष नवम्बर-दिसम्बर में होने है। चुनाव में बहुत कम समय को देखते हुए टिकट वितरण पर भी प्रधानमंत्री मोदी की कोर टीम ही फैसले करेगी।

साथ ही राजस्थान में बड़ी चुनावी सभाओं और परिवर्तन यात्राओं की तैयारियाँ भी की जा रही हैं। प्रधानमंत्री चुनावी साल में पिछलें नौ माह में राजस्थान में अब तक आठ रेलियों को सम्बोधित कर चुके है। प्रधानमंत्री मोदी नवंबर,2022 से अब तक राजस्थान में बांसवाड़ा (वागड़), सिरोही (गोडवाड़), अजमेर-पुष्कर (मेरवाड़ा), भीलवाड़ा (मेवाड़), दौसा (ढूंढाड़), बीकानेर (मारवाड़), सीकर (शेखावाटी) का दौरा चुके हैं। अब उनका राजस्थान के अन्य इलाक़ों विशेष कर तीन-चार सांस्कृतिक क्षेत्रों में जाना बाकी है। इस लिहाज से अगले एक-डेढ़ महीने में प्रदेश में उनकी सभाएं एवं रैलियां बढ़ सकती हैं।

जुलाई में प्रधानमंत्री मोदी की एक सभा राजस्थान के प्रसिद्ध लोक देवता वीर तेजाजी महाराज के जन्म स्थान नागौर जिले के खरनाल में प्रस्तावित थी लेकिन ऐन मौके पर यह सभा स्थगित हो गई थी। बाद में पी एम मोदी पड़ोसी जिले सीकर में आए थे और जनसभा को संबोधित किया था। अब शीघ्र ही प्रधानमंत्री के राजस्थान में तीन और दौरे हो सकते हैं। पार्टी के सूत्रों के अनुसार अगस्त में मोदी खरनाल (नागौर) आ सकते है जहां वे वीर तेजाजी महाराज के मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे।
इसके बाद उनकी हाड़ौती अंचल के कोटा और ब्रज-मेवात इलाके के भरतपुर अथवा पश्चिम राजस्थान के प्रवेश द्वार मारवाड़ अंचल के जोधपुर संभाग में किसी एक स्थान पर हो बड़ी सभा हों सकती है। बताते है कि राजस्थानी नई दिल्ली में संसद के मानसून सत्र और पन्द्रह अगस्त स्वाधीनता दिवस के कार्यक्रमों में उनकी व्यस्तताओं को देखते हुए पीएम की सुविधानुसार इसका विस्तृत कार्यक्रम जल्द ही जारी होगा।

राजस्थान में भाजपा तीन बड़े धार्मिक स्थलों से जनसमर्थन रैलियां या यूँ कहें परिवर्तन यात्राएँ निकालने वाली है। अभी यह तय नहीं हुआ है कि इन धार्मिक स्थानों से निकलने वाली रैलियों का नेतृत्व कौन नेता करेगा। अब यह तय लगाया है कि इसका निर्णय भी प्रधानमंत्री मोदी और उनकी कोर टीम ही करेगी।यह रैलियां रणथम्भौर (सवाईमाधोपुर) स्थित भगवान त्रिनेत्र गणेशजी, लोकदेवता गोगाजी की गोगामेड़ी स्थली (हनुमानगढ़) और आदिवासियों के तीर्थस्थल बेणेश्वर धाम (डूंगरपुर) से निकाली जाएंगी। इन रैलियों के नेतृत्व के लिए पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, केन्द्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, उप नेता प्रतिपक्ष सतीश पूनिया, राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी और राज्य सभा सांसद डॉ. किरोणी लाल मीणा आदि के नामों पर विचार किया जा रहा है।

राजस्थान विधानसभा का चुनाव कई कारणों से भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल हों गया है।एक तों चुनाव की कमान अब प्रधानमंत्री मोदी के हाथ में है दूसरा रणनीतिक ठंग से पी एम मोदी और पार्टी देश में कांग्रेस की सबसे बड़ी ताकत और उसके मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से हर हाल में जीत चाहती है। राजस्थान में पिछले साढ़े चार साल से कांग्रेस सरकार है। एक समय था जब कांग्रेस देश में केवल दो राज्यों राजस्थान और छत्तीसगढ़ में ही सिमट कर सत्ता में रह गई थी। राजस्थान में दो बार बगावत का खेल भी हुआ, लेकिन गहलोत सरकार नहीं गिरी। इससे कांग्रेस को ताकत बहुत ताक़त मिलीं और प्रदेश एवं देश में कांग्रेस दोबारा खड़ी हुई तथा राहुल गाँधी की भारत जोड़ों यात्रा के साथ ही हिमाचल-कर्नाटक जैसे राज्यों के विधान सभा चुनावों में कांग्रेस ने जीत दर्ज की। अब इस ताकत को खत्म करना भाजपा के लिए बेहद जरूरी है।

भाजपा चाहती है कि लोकसभा की सभी सीटों पर इस बार भी प्रदेश में सभी सीटें उनकी झोली में जायें।राजस्थान अकेला प्रदेश जहां बीजेपी ने लगातार दो बार लोकसभा की सभी सीटों पर विजय हासिल की। भाजपा ने वर्ष 2014 और 2019 में प्रदेश की सभी 25 संसदीय सीटें कांग्रेस से छीनी थीं। हालांकि, 2019 के चुनाव में एक सीट नागौर गठबंधन के तौर पर हनुमान बेनीवाल को दी गई थी । हालाँकि वर्ष 2019 में राजस्थान में सरकार कांग्रेस की ही थी, लेकिन इसके बावजूद लोकसभा चुनाव में कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत पाई।

इसके अलावा भाजपा राजस्थान में पार्टी की गुटबाजी और मुख्यमंत्री फेस की खींचतान को भी समाप्त करना करना चाहती है। राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सहित चार बड़े केन्द्रीय मंत्रियों और स्थानीय स्तर पर नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, उप नेता प्रतिपक्ष सतीश पूनिया और प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी को मुख्यमंत्री की रेस में माना जाता है। इसे लेकर कई बार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस राजनीतिक कटाक्ष भी करती आई हैं।ऐसे में यहां बड़े नेताओं के बीच खींचतान और मुख्य मंत्री के चेहरे को लेकर कशमकश को खत्म करने के लिए स्वयं प्रधानमंत्री मोदी ने चुनावी मोर्चे को अपने हाथ में ले लिया है तथा इस रणनीति के तहत भाजपा के शीर्ष नेतृत्व द्वारा मोदी के चेहरे और केंद्र की योजनाओं के आधार पर ही राजस्थान विधान सभा के चुनाव के रण में जाने का निर्णय ले लिया गया है।

आम तौर पर विधानसभा चुनावों में प्रधानमंत्री सक्रिय रूप से चुनाव प्रचार तो करते हैं, लेकिन प्रायः चुनावी रणनीति पर प्रधानमंत्री के स्तर पर इस तरह सीधी निगरानी नहीं रखी जाती। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रदेश के प्रभारी, चुनाव प्रभारी और प्रदेशाध्यक्ष के माध्यम से ही चुनावी रणनीति बनाई जाती है, लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा इस बार प्रत्येक कार्यकर्ता और पदाधिकारियों को एक संदेश देना चाहती है कि प्रधानमंत्री भी संगठन में एक कार्यकर्ता की ही तरह होते हैं। उन्हें भी चुनाव में जिम्मेदारी दी जाती है

राजस्थान में पिछले दो दशक में यह पहला मौक़ा होंगा जब भाजपा प्रदेश में मुख्यमंत्री के किसी चेहरे बिना चुनाव लड़ेगी। वर्ष 2002 से 2018 तक 2003, 2008, 2013 और 2018 के चार चुनावों में वसुंधरा राजे ही मुख्यमंत्री का चेहरा रहीं और उन्हीं के नेतृत्व में पार्टी की रणनीति तय हुई। पिछले चुनावों 2018 में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह थे। उस वक्त शाह, वसुंधरा राजे और प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी के हिसाब से रणनीति तय होती थी लेकिन इस बार राजस्थान के राजनीतिक इतिहास में यह पहला मौका है, जब भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चेहरे और केंद्र की योजनाओं के आधार पर ही न केवल विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया है, बल्कि अब चुनावों की सीधी जिम्मेदारी भी स्वयं प्रधानमंत्री मोदी ही संभालेंगे।

इधर कांग्रेस मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में ही विधान सभा चुनाव लड़ेगी। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी की मध्यस्थता से गहलोत सचिन गुट के मध्य समझौता हो गया है लेकिन राजेन्द्र गुढा काण्ड तथा भीतर घात का खतरे को नज़र अन्दाज़ नही किया जा सकता। इस पर क़ाबू पाने कांग्रेस ने सितम्बर में ही अपने उम्मीदवार घोषित करने की रणनीति बनाई है फिर उसे गहलोत की प्रदेश और देश में लोकप्रिय ही रही जन कल्याणकारी योजनाओं से प्रदेश में पिछलीं परंपराओं को तोड़ते हुए पुनः सत्ता पर क़ाबिज़ होने का पक्का भरोसा है।पार्टी आदिवासी दिवस पर राहुल गाँधी की आदिवासितों के जलियाँवाला बाग माने जाने वाले मानगढ धाम पर होने वाली विशाल रैली की तैयारियों में जुटी है और आगे सोनिया गाँधी तथा अन्य बड़े नेताओं की बड़ी सभाएँ भी करेंगी।

प्रधानमंत्री मोदी के सीधे चुनावी रण में उतरने पर पार्टी नेता कह रहें है कि उन्हें हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में भी चेहरा बनाया गया था लेकिन उसका हश्र सभी ने देखा है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इस बार प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा चुनावी कमान सम्भालने और अशोक गहलोत की ममता स्टाइल से इस बार राजस्थान विधान सभा चुनाव का रोमांच देखने वाला होंगा।