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इस बदलाव से होने वाले फायदे
जानकारी के अनुसार इस व्यवस्था के दो बड़े फायदे होंगे। पहला यह कि सीसीटीएनएस से जुड़े टेबलेट्स के जरिए अपलोड हुआ कोई भी दस्तावेज हटाया या बदला नहीं जा सकेगा। दूसरा चालान सही समय पर पेश किया जा सकेगा। पहले जो टैबलेट्स दिए गए थे उससे 425 थानों में इस्तेमाल करते हुए तीन साल में 50 हजार एफआईआर दर्ज हुई हैं। सबसे बेहतर परिणाम जीआरपी ने दिए हैं, क्योंकि उनकी ज्यादातर एफआईआर या जांच चलती ट्रेन में दर्ज हुई हैं।
मध्य प्रदेश में अब तक किसी भी मामले की जांच प्रक्रिया थाने में रखे कंप्यूटर में अपलोड सीसीटीएनएस के जरिए ही होती थी। लेकिन, नक्शा मौका, एफआईआर, गिरफ्तारी फॉर्म, जब्ती, चालान और केस डायरी के पर्चे का डिजिटाइजेशन नहीं था। इसलिए कई बार एक पर्चा भरने में भी काफी वक्त लग जाता था। टेबलेट्स में इतना वक्त नहीं लगेगा।
इन टैबलेट्स में कोई बाहरी एप्लीकेशन डाउनलोड नहीं होगी और विवेचना अधिकारी इनका इस्तेमाल कॉलिंग के लिए नहीं कर सकेंगे। ऐसा इसलिए किया जा रहा है, ताकि टेबलेट का डेटा हैक न हो। पुलिस अधिकारी का कहना है कि 25 हजार नए टेबलेट्स खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शासन से अनुमति मिलते ही ये खरीदी कर ली जाएगी। इनकी मदद से विवेचना में लगने वाला समय घटेगा। अदालत में वर्चुअल पेशी होगी। तलाशी के समय भी वीडियोग्राफी अनिवार्य होगी।